आस्था पर उपेक्षा की धूल,विकास भवन के पास अधूरा मंदिर! नाली पर रखी मूर्तियां पूँछ रही सवाल
मंदिर निर्माण अधूरा क्यों,आस्था से जिम्मेदार कर रहे खिलवाड़ ?
सिद्धार्थनगर | विकास भवन के पास आस्था का प्रतीक मंदिर आज भी अधूरा, उपेक्षित और जर्जर अवस्था में पड़ा है,NH kiनाली के किनारे रखी देवी-देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरें मानो व्यवस्था की संवेदनहीनता पर सवाल उठा रही हैं।यह दृश्य सिर्फ मंदिर निर्माण कार्य में देरी नहीं, बल्कि जनभावनाओं के साथ हुए खिलवाड़ की जीवंत तस्वीर बन गया है। पिछले नवरात्रि के पावन महीने में मंदिर और मूर्तियां हटाए जाने से जनपद में आक्रोश का ज्वालामुखी फूट पड़ा था। तब तमाम चेहरों ने मौके पर पहुंचकर आश्वासन की झड़ी लगा दी थी। लोगों का आरोप है कि उस संवेदनशील मौके पर कई लोगों द्वारा आस्था की आड़ में राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम किया गया था। लेकिन वक्त बीतते ही वादे हवा हवाई हो गए।
उक्त मामले को जानबूझकर हवा दी गई, आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया! तब पूर्व जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने न सिर्फ संज्ञान लिया, बल्कि मंदिर निर्माण का ठोस प्रस्ताव बनाया। लोगों का कहना है कि उनके दृढ़ प्रयास और इच्छाशक्ति से जनपद में शत-प्रतिशत कार्य धरातल पर उतारने का प्रयास किया गया था, जिससे लोगों में उम्मीद की नई किरण जागी थी। लेकिन लोगों का कहना है कि उसी अधिकारी को विवाद का मुख्य कारक बनाने का प्रयास किया गया था। अब इसे विवाद का कारण माना जाए या सरकार का फरमान,उसी के बाद उनका स्थानांतरण हो गया। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि उन्हीं विवादों की वजह से तत्कालीन जिलाधिकारी राजनीतिक शिकार हो गए। उनके जाते ही विकास की रफ्तार पर ब्रेक लग गया। आज स्थिति यह है कि जो कार्य उन्होंने आरंभ कराया था, वह आज भी वहीं ठहरा हुआ है। कुछ कार्य चींटी की चाल से रेंग रहे हैं, लेकिन समग्र विकास की गति बैक गियर में चली गई है। लोगों का कहना है कि उस समय लोगों को सिर्फ मुद्दा चाहिए था, काम किसी और ने किया और खामियाजा किसी और को भुगतना पड़ा। जनता के कार्य गुणवत्ता के साथ बखूबी हो रहे थे, लेकिन कुछ लोगों को तत्कालीन जिलाधिकारी के कार्यों से दर्द हो रहा था,क्योंकि वह जनहितकारी कार्यों में रुचि रखते थे जिससे जनता उन्हें पसंद कर रही थी,काफी कम समय में जनता के बीच लोकप्रिय हो गए थे।
गौरतलब हो कि पूर्व जिलाधिकारी के रहने से जनता किसको पसंद नहीं कर रही थी,यह सब जानते हैं, इसलिए वह ऐसे लोगों की आंखों में किरकिरी की तरह चुभ रहे थे। लोगों का कहना है कि आज जनहित से जुड़े कार्यों पर कौन ध्यान दे रहा है। आज मुख्यालय पर वह भीड़ पूर्व जिलाधिकारी के जाने के बाद शिथिल पड़ गया है। लोगों का आरोप है कि जिस विवाद के कारण उनका स्थानांतरण हुआ,वह विवादित कार्य आज भी अधूरा पड़ा है। अब जनता में इस बात को लेकर गहरी निराशा है, लोगों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे उन्हें जनता के बुनियादी कार्यों,आस्था और विकास से कोई सरोकार नहीं रह गया है। बस औपचारिक दिनचर्या निभाई जा रही है, मीडिया द्वारा वाहवाही बटोरने का काम किया जा रहा है।
वहीं इस विषय पर वरिष्ठ समाजसेवी अखिलेश पाण्डेय ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग उठाई है कि अधूरे मंदिर का निर्माण कार्य अति शीघ्र, प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मूर्तियों को सम्मानपूर्वक स्थापित कराना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था को सम्मान मिले ताकि पूजा-अर्चना कर सके।

