ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने पर हो सकता है प्रशासक समिति का गठन- के0 के0 पांडे प्रदेश अध्यक्ष
उ0प्र0,लखनऊः अगले महीने की 26 तारीख को ग्राम पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो जाने पर पंचायतों की जिम्मेदारी किसके हाथों में होगी,इस पर शासन प्रशासन द्वारा मंथन शुरू हो गया है। पंचायती राज एक्ट की व्यवस्थाओं के तहत प्रशासक की तैनाती और प्रशासक समिति का गठन दोनों पर विचार किया जा रहा है। अधिक संभावना है कि इस बार प्रशासक समिति का गठन कर चुनाव होने तक उसे पंचायतों की जिम्मेदारी दे दी जाए। ऐसा नहीं होने पर पूर्व की तरह एडीओ (पंचायत) ही प्रशासक बनाए जाएंगे।
राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर पांडेय की अध्यक्षता में बीते बुधवार को पूरे प्रदेश भर से आए प्रधानों ने मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने या ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाने की मांग उठाई थी।प्रदेश अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया था कि सरकार द्वारा संगठन की बातें मान ली जाएगी।
अपको बता दें कि पंचायती राज एक्ट में दो व्यवस्थाएं हैं। पहला ग्राम पंचायतों का पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर प्रशासक तैनात किया जाए। इसमें एडीओ (पंचायत) को प्रशासक बनाकर चुनाव नहीं होने तक पंचायतों में पंचायती प्रशासक तैनात किए जाने की व्यवस्था पर विचार हो रहा है। जिसमे विकास कार्य कराने के साथ ही अन्य अधिकार दिए जाते हैं। राज्य में अब तक जब भी ऐसी स्थिति बनी है,प्रशासक ही तैनात किए जाते रहे हैं।
दूसरी व्यवस्था यह है कि प्रशासक समिति का गठन करते हुए उसे पंचायत के विकास कार्यों को कराने के साथ ही प्रशासनिक अधिकार दे दिए जाएं। इसमें पूर्व ग्राम प्रधान व पूर्व पंचायत सदस्य के साथ ही गांव के किसी भी पात्र व्यक्ति को लिया जा सकता है। प्रशासक की व्यवस्था में नौकरशाही का नियंत्रण होता है।जबकि प्रशासक समिति में स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी बनी रहती है।
भाजपा शासित राज्य मध्य प्रदेश और राजस्थान में प्रशासक समिति को पंचायतों की जिम्मेदारी पूर्व में दी जा चुकी है। इसे देखते हुए यह माना जा रहा है कि प्रदेश सरकार भी यह निर्णय ले सकती है। प्रशासक समिति की व्यवस्था में व सरकार भाजपा के कार्यकर्ताओं को भी मौका दे सकती है।

