सिद्धार्थनगर: नई रेल लाइन निर्माण से संसदीय क्षेत्र डुमरियागंज के विकास को मिलेगी नई रफ़्तार!
विकास की नई उड़ान भरने की बढ़ी उम्मीद! पूर्वोत्तर रेलवे ने लगाए बोर्ड
खलीलाबाद से बहराइच तक 240 किमी में बिछनी है नई रेल लाइन
शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच होगी सुगम,समग्र आर्थिक विकास को मिलेगी नई दिशा
सिद्धार्थनगर,डुमरियागंज: खलीलाबाद से बहराइच तक प्रस्तावित 240 किमी नई रेल लाइन क्षेत्र की तरक्की एवं विकास का एक बड़ा आधार बनने जा रही है। यह परियोजन पूरे इलाके के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलते हुए ऐतिहासिक परिवर्तन लाएगी। इससे यात्रा सुविधाजनक होगा व यात्रा का मार्ग प्रशस्त होगा।
इस रेल लाइन के बन जाने से रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे,व्यापार और उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। दशकों से अपेक्षित क्षेत्रवासियों का यह सपना अब साकार होने की ओर अग्रसर है, और आने वाले समय में इससे डुमरियागंज लोकसभा क्षेत्र को व्यापक लाभ होगा।
भारत सरकार रेल मंत्रालय यह भूमि भारत सरकार द्वारा खलीलाबाद-बांसी रेल परियोजना हेतु अधिग्रहित की गयी है. इस भूमि पर अनाधिकृत गतिविधि भारतीय रेल अधिनियम के अन्तर्गत वर्जित है- उप-मुख्य इंजीनियर निर्माण पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर.
वहीं स्थानीय निवासियों ने बताया कि लगभग पांच दशक बाद रेल लाइन का कार्य आगे बढ़ते देख मन में नया उत्साह पैदा हुआ है। अधिग्रहण के बोर्ड लगने से लगता है कि अब रेल सुविधा का सपना जरूर पूरा होगा।भूमि अधिग्रहण के बोर्ड लगने से आशा बढ़ी है कि अब क्षेत्र में विकास की गति तेज होगी। रेल लाइन तैयार होने पर रोजगार, व्यापार और सुविधाओं के कई नए अवसर खुलेंगे।स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सीमित होने से लोग रेल के सहारे ही बाहर जाते हैं। रेल लाइन निर्माण हो जाने से यात्रा मार्ग सुगम होगा और आवागमन में लंबे समय से हो रही कठिनाइयां समाप्त होंगी।रेल लाइन बनना व्यापार और शिक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण परिवर्तन लाएगा। इससे युवाओं को बेहतर अध्ययन करने के साधन मिलेंगे,साथ ही व्यापारियों के लिए नए बाज़ारों तक पहुंचना आसान होगा।
तहसील क्षेत्र के सेखुई में बोर्ड लगाते रेल कर्मी: पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर मंडल द्वारा तहसील क्षेत्र के कई गांवों में भूमि अधिग्रहण के बोर्ड लगाए जा रहे हैं। इससे संकेत मिल रहा है कि शीघ्र ही रेल लाइन बिछाने का कार्य गति पकड़ेगा। बोर्ड लगते ही क्षेत्रवासियों में वर्षों पुराना सपना साकार होने की आशा प्रबल हो उठी है। लोगों का कहना है कि अब लग रहा है, लंबे इंतजार के बाद छुक-छुक करती रेलगाड़ी की ध्वनि सुनने का सपना पूरा होगा। क्षेत्र में विकास की ऊंची उड़ान भरने की उम्मीद बढ़ गई है।वर्ष 1972 में तत्कालीन सरकार के रेलमंत्री ने गोरखपुर से बलरामपुर तक सर्वे का आदेश दिया था, जिसे 1975 में पूरा कर पत्थर भी लगा दिए गए थे। किन्तु सर्वे के बाद योजना आगे नहीं बढ़ सकी। जिन काश्तकारों की भूमि रेल लाइन में अधिग्रहित किया गया है उनके खसरा खतौनी सहित सभी अभिलेख एडीएम न्यायिक सिद्धार्थनगर को भेज दिए गए हैं। शीघ्र ही मुआवजा मिल जाएगी।
अभी तक डुमरियागंज, इटवा और बांसी तहसील के लोगों को रेल सुविधा के लिए बस्ती, खलीलाबाद, गोरखपुर या गोंडा जाने की विवशता बनी रही। इसी दूरी और असुविधा को देखते हुए 2018 में एनडीए सरकार ने खलीलाबाद से बहराइच तक 240 किमी लंबी रेल लाइन की स्वीकृति प्रदान की। लंबी दूरी और व्यापक अधिग्रहण प्रक्रिया के कारण कार्य की गति धीमी रही। जनपद के दो तहसीलों से होकर गुजरने वाली इस लाइन के लिए पूर्वोत्तर रेलवे ने बांसी तहसील में भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य को तेज कर दिया है।लेकिन डुमरियागंज क्षेत्र में कार्य अभी सर्वे तक ही सीमित था, किन्तु पिछले दो दिनों से रेलवे द्वारा जगह-जगह बोर्ड लगाए जाने से लोगों के सपनों को नई उड़ान मिल गई है।

