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“राष्ट्रीय हिंदू वाहिनी संगठन” प्रदेश अध्यक्ष के0 के0 पांडे ने प्राइमरी शिक्षा को निजी स्कूलों से बेहतर बनाने हेतु मुख्य मंत्री व मुख्य सचिव उत्तर‌ प्रदेश को 19सूत्रीय भेजा ज्ञापन

कानपुर,औरैया/ दिनांक 26 जुलाई 2025

“राष्ट्रीय हिंदू वाहिनी संगठन” प्रदेश अध्यक्ष के0 के0 पांडे ने प्राइमरी शिक्षा को निजी स्कूलों से बेहतर बनाने हेतु मुख्य मंत्री व मुख्य सचिव उत्तर‌ प्रदेश को 19सूत्रीय भेजा ज्ञापन

कानपुर,औरैया: राष्ट्रीय हिन्द वाहिनी संगठन उ0.प्र0 ने मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश से पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि प्राथमिक शिक्षा को निजी स्कूलों से बेहतर बनाने के लिये निम्न (19) सूत्रीय ज्ञापन आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहा है। कृपया स्वीकार करने की कृपा करें। तथा क्रियान्वित कराकर कृत कार्यवाही से संगठन को भी अवगत कराने की कृपा करे।

आपको ज्ञात हो कि बेसिक शिक्षा के इतिहास में वह सबसे बड़ा काला दिन रहा होगा जिस दिन बेसिक शिक्षा का निजीकरण हुआ होगा। पहली बार अबोध बालको’ के मन में अमीरी और गरीबी का आभास” जागा होगा। उस दिन पैसे-वालों के दिमाग में पहली वार यह वात आयी होगी,कि बेसिक शिक्षा (कक्षा०-1 से 8 तक) निजी स्कूल खोल दिया जाए तो एक अच्छा व्यापार होगा। धन भी, कीर्ति भी, यश भी, सम्मान भी मिलेगा यहां तो वही कहावत चरितार्थ हो रहा है कि “आम के आम, गुठिलियों के दाम” तब क्या?? फिर गली-गली मुहल्ले- मुहल्ले निजी स्कूल खुल गये। सरकारी स्कूलों को षड्‌यंत्र पूर्वक बेकार व कमतर घोषित कराने का कुचक्र रचा जाने लगा लगा उसी काले दिन का परिणाम है कि आज सरकारी स्कूल बन्द करने पड़ रहे है। यह भी संगठन की राय में उचित नहीं है। काश! तत्कालीन सरकारों ने अपनी जिम्मेदारी समझी होती।, “बेसिक शिक्षा “निजी हाथों में न सौंपी होती। काश? नये स्कूल और बनाये होते। स्कूलों में और अधिक साधन, सुविधायें तथा महत्व दिया होता। बाल मनोविज्ञान समझा होता तो नौबत यहाँ तक नहीं आती। मृग मारीचिका के चलते करोड़ों लोगों की मेहनत की कमाई कुछ निजी स्कूल मालिकों की जेब में नही पहुँचती आज यह स्थित है कि प्रदेश का कुल बच्चों का आधे से अधिक संख्या का हिस्सा निजी स्कूलों में पढ़ रहा है। निजी स्कूलों द्वारा सरकारी स्कू‌लों को बेकार व कमतर साबित करने तथा खुद को श्रेष्ठतम साबित करने का प्रचार इस हद तक किया गया, कि जिस अभि-भावक की मासिक आमदनी 5-10 हजार रुपया भी है। तो वह भी अपने बच्चे को निजी स्कूल में पढ़ने भेज रहे हैं। भले ही साल दो साल बाद वे बच्चे कभी आगे की पढ़ाई अफोर्ड न कर पाये और वच्चे का भवीष्य चौपट हो जाये। जो अत्यन्त निर्धन बच्चे है उनके शिक्षा के प्रति भी सरकारों को विचार करने की जरूरत है। निजी स्कूल के प्रबंधक गरीब बच्चों के प्रति अति उदासीन है, मात्र खाना पूर्ति करते हैं। उनके बच्चे ही अध्यापकों की प्रेरणा से सरकारी स्कूलों में जाते हैं। लेकिन बच्चे तो बच्चे होते है। चाहे अमीर के हो, या गरीब के?? बेहतर शिक्षा पर तो सबका अधिकार‌ बराबर का होना चाहिये। यह उत्तरदायित्व सरकार का है। हैसियत से अधिक खर्च करने वाले अभिभावकों को सरकारी शिक्षा की बेहतरी का विश्वास दिलाना होगा। यह जिम्मेदारी लोक प्रिय सरकार की है।

कृपया इसके लिये निम्न 19सूत्रीय ज्ञापन सेवा में प्रस्तुत हैं। कृपया स्वीकार कर क्रियान्वित कराने की कृपा करे।

1) प्रत्येक गली-मुहल्ले,गाँव, कस्बों तथा शहरों के निजी स्कूलों की सघनतम जांच की जाये। अध्यापक, प्रधानाध्यापक की शैक्षिक योग्यता, (मानक के अनुसार) वेतन-फीस, वातावरण, मूल भूत सुविधायें आदि का सख्ती से सघनतम मूल्यांकन हो, तथा कुछ भी अन्यथा पाये जाने पर उनकी मान्यता समाप्त कर दी जाये तथा भवनों का सरकारी उपयोग कर लिया जाये। ताकि अभिभावकों को वस्तुस्थित का ठीक से अन्दाजा हो सके।

2) सरकारी स्कूलों का भवन, वाउन्ड्री, गेट आदि भव्य व आकर्षक हो ताकि बच्चे का स्कूल जाने में मन लगे।

3) बेसिक शिक्षा के स्कूल हरे-भरे हो। इसके लिए माली की व्यवस्था हो।

4) स्कूलों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पानी के साधनों आदि के सतत संचालन हेतु सौर उर्जा की व्यवस्था की जाये।

5) स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के निर्णय व अधिकार संबंधित कार्य विना हस्तक्षेप के और बढ़ाए जाये। ताकि सब कुछ अनुशासित तथा ठीक रहे।

6) प्रत्येक स्कूल में’ लिपिक की नियुक्ति की जाये,ताकि अध्यापक फ्री होकर बच्चो को सही तरीके से पढ़ा सके।

7) प्रत्येक स्कूल में गेटकीपर तथा रनर की नियुक्ति की जाये।

8) तमाम अन्य विभागों से संबंधित कार्य स्कूल स्टाफ से हटा लिये जाये। अनावश्यक प्रवेश विद्यालय में शिक्षण काल के समय में रोक दिये जायें।

9) विद्यालय (स्कूल) की किसी तरह की भी जांच या किसी भी अन्य विभाग के अधिकारी या कर्मचारी का प्रवेश स्कूल में शिक्षण समय में न हो।

10) अध्यापकों व प्रधानाध्यापकों के सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाये। किसी भी दशा में किसी भी प्रकार का कोई अपमान जनक रवैये या भाषा का इस्तेमाल न हो।

11) जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को स्वतः निर्णय लेने के अधिकार दिये जाये। ताकि निर्णय लेने में विलम्ब न हो।

12) शुरुआत से ही बच्चे को तकनीकी व रोजगार-परक जानकारी भी दी जाये।

13) स्कूलों में अतिरिक्त परिसरों के होने की दशा में पार्क व वगीचा की स्थापना की जाये।

14) प्रधानाध्यापक को स्थानीय परिस्थतियों के अनुसार पूर्व की भांति एक दो या तीन दिन तक या आधे दिन का अवकाश स्वविवेकानुसार करने का अधिकार हो।

15) बच्चों को दी जाने वाली समस्त मूलभूत सुविधाये तथा अनुदान स्कूल के माध्यम से ही दी जाये। तााकी वह बच्चों को मिल सकें और दुरुपयोग न हो।

16) M.D.M. योजना को और अधिक गुणवत्ता पूर्ण पौष्टिक आकर्षक तथा पोषण युक्त खाना बनाया जाये। तथा इसके लिये महगाई के सापेक्ष पर्याप्त घन उपलब्ध कराया जाये। क्योकि अक्सर अभिभावक बच्चों को घर से भूखा ही भेज देते है। दोपहर के समय बच्चों का मनोरंजन स्कूल में ही होता है।

17) M.D.M. में खिचड़ी आदि न बनवाकर रोटी सब्जी चावल, रोटी दाल चावल आदि भोजन दिया जाये। कृपया “खिचड़ी” शब्द से M.D.M. का उपहास भी उड़ाया जाता है।

17) अध्यापकों का वेतन को लेकर बार-बार 10 हजार, 10 हजार कहकर तंज न कसा जाये। ये सम्मानित प्रथम गुरु है। “कृपया इससे अध्यापकों का मनोबल टूटता है। कृपया उपरोक्त बिंदुओं को संज्ञान में लेने का कष्ट करे। क्योंकि इतना वेतन उन्हीं अध्यापकों को मिल पाता है जो सेवा-निवृत्ति अवधि के करीब होते है,तथा यह कोई उपलब्धि नहीं है।अध्यापकों के वेतन तथा सुविधाये और अधिक से अधिक बढ़ायी जाये। तथा प्रधानाध्यापक तथा प्रधानाध्यापक के सहायको को उनको सहमती के विना स्थानान्तरण न हो।

18) अध्यापक का कार्य केवल पूरे मनोयोग से विना किसी तनाव को देकर वच्चों को पढ़ाना है। कृपया संज्ञान लेने की कृपा करे, अध्यापक को डॉक्टर, कारीगर तथा वकील की तरह तनाव देकर कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता ।

19) कृपया इस पर भी ध्यान दिया जाये, कि जो अभिभावक निजी स्कूलों की महगी फीस, किताबे, यूनीफार्म, वाहन, पॉकेट मनी आदि खर्च बहन कर सकतें है। क्या वे सरकारी अनुदान, फ्री राशन, आदि के अधिकारी है? क्या यह सब दिया जाना चाहिये।

आप से सादर निवेदन है कि कृपया उपरोक्त 19 सूत्रीय विन्दुबार सघनतम अवलोकन कर स्वीकार करने को कृपा करे। तथा विन्दुवार क्रियान्वित कराने की कृपा करें। कृपया कृत कार्यवाही से संगठन को भी अवगत कराने की कृपा करें।

         भवदीय: 

कौशल किशोर पाडेय,प्रदेश अध्यक्ष,राष्ट्रीय हिन्दू वाहिनी संगठन (उत्तर प्रदेश)

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