एक जनपद एक उत्पाद (ODOP) के तहत कालानमक धान के उत्पादन से किसानों के आय में हो रही है दोगुनी वृद्धि–उपकृषि निदेशक
सिद्धार्थनगर। प्रदेश सरकार द्वारा एक जनपद एक उत्पाद (ODOP)के तहत जनपद सिद्धार्थनगर में कालानमक धान का उत्पादन प्राचीनकाल से हो रहा हैं। इसकी खेती बुद्ध काल (600 BC) से सिद्धार्थनगर में हो रही हैं। कालानमक चावल सुगन्धित होने के साथ ही पोषक तत्व से भरपूर है जिसके कारण इसकी मांग देश एवं देेश के बाहर होती रही हैं। जिसके कारण जनपद में प्राचीनकाल में लगभग 40000 हे0 में हिमालय के तलहटी वाले क्षेत्रो में खेती की जाती थी परन्तु धीरे-धीरे संसाधनो के अभाव में इसकी खेती में गिरावट आने लगी। सन् 2012 में भारत सरकार द्वारा कालानमक प्रजाति की GI tagging कराया तथा कालानमक पैदा करने के लिए क्षेत्र का निर्धारण कराया।
कालानमक के लिए उ0प्र0 में 27° 28‘ उत्तरी अक्षांस एवं 82° 45‘ से 83° 10‘ पूर्वी देेशान्तर के मध्य का क्षेत्र उपयुक्त माना गया हैं। जनपद सिद्धार्थनगर के साथ-साथ आस-पास के जनपदो के विभिन्न ब्लाको तथा बलरामपुर का पंचपेड़वा व गैसड़ी ब्लाक बस्ती का रामनगर, रुधौली ब्लाक ,संतकबीरनगर का सांथ ब्लाक ,गोरखपुर का पीपीगंज ब्लाक व महाराजगंज जनपद का निचलौल, फरेन्दा , बृजमनगंज ब्लाक शामिल हैं।
वर्षो पूर्व में जनपद सिद्धार्थनगर में कालानमक की खेती लगभग 22000 हे0 क्षेत्रफल में होती थी, कालान्तर मेे कम उत्पादन होेने के कारण धीरे-धीरे कृषको को इसकी खेती से मोह भंग हो गया था,संसाधनों के अभाव में किसान इसके स्थान पर अन्य धान की प्रजातियो की खेती करने लगे। इसके पश्चात् वर्ष 2012 से कृषि विभाग एवं प्रदेश सरकार व शासन ने मिलकर कालानमक को प्रोत्साहित करने हेतु प्रदर्शन,किसान गोष्ठी,कृषक वैज्ञानिक संवाद, किसान मेला इत्यादि के माध्यम से जनपद में कालानमक की क्षेत्रफल की वृद्धि हेतु विभिन्न प्रयास किये गये।
इसका परिणाम वर्ष 2020-21 में दिनांक 13.03.2021 से 15.03.2021 तक 03 दिवसीय कालानमक चावल महोत्सव का आयोजन जनपद स्तर पर कराया गया। इसी प्रकार दिनांक 20.11.2021 से 24.11.2021 तक 05 दिवसीय कालानमक के स्टाल लगाते हुए कालानमक की खेती को बढावा देने हेतु दिनांक 25.11.2021 को एक दिवसीय काला नमक चावल गोष्ठी का आयोजन किया गया।
उपरोक्त विभिन्न कार्यक्रमों एवं जनपद के कालानमक के क्षेत्र में कार्य करने वाले कृषक उत्पादन संगठन के सहयोग से किसानों में कालानमक के उत्पादन में वृद्धि हेतु उत्साहवर्धन का कार्य किया गया। कालानमक लम्बी अवधि में तैयार होती है, जिसके लिए इसे अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है।उक्त मॉग को पूर्ण करने हेतु प्रदेश सरकार द्वारा सरयू नहर परियोजना का प्रारम्भ हुआ है। जो जनपद के कालानमक उत्पादक क्षेत्रो जैसे- नौगढ, उसका बर्डपुर लोटन जोगिया, बढनी, शोहरतगढ के कृषको के लिए वरदान सिद्ध हो रहा है,कृषको को उनकी मॉग के अनुसार सिचाई हेतु जल उपलब्ध कराया जा रहा है, कालानमक उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। जिसके फलस्वरूप कालानमक के क्षेत्रफल में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2012 में कालानमक का क्षेत्रफल 2342 हेक्टेयर था। यह वर्ष 2022 में बढकर 15000 हे0 तक हो गया है।
जनपद में खरीफ वर्ष 2022 में कालानमक धान का औसत उत्पादन 22 कुं0/हे0 है। इस वर्ष जनपद में काला नमक का अनुमानित उत्पादन 330000 कुं (330 मैट्रिक टन) तक हुआ है जो कि जनपद में कालानमक की खेती करने वाले किसानों के आय में दुगनी वृद्धि करने में सहायक सिद्ध हो रही है।
नोट:–उक्त आशय की जानकारी उप कृषि निदेशक सिद्धार्थनगर ने अपने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दिया है।