गोरखपर – 03 अगस्त 2024
गीतोपदेश की तरह गुरु का स्थान हमारे जीवन में सबसे महत्त्वपूर्ण है : प्रो विजय कुमार
दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्विद्यालय के कृषि संकाय में आज शैक्षिक महासंघ की ओर से गुरुवंदन का कार्यक्रम आयोजित किया गया,कार्यक्रम के अध्यक्षता करते हुए प्रो0 विजय कुमार ने बड़े विस्तार से भारतीय समाज के इतिहास में गुरु शिष्य परंपरा के स्वर्णिम इतिहास पर प्रकाश डाला। भूतकाल से लेकर वर्तमान और भविष्य में भी यह गुरु शिष्य का संबंध सुदृढ़ बना रहेगा। उन्होंने गीता और आइंस्टीन का उदाहरण देते हुए कहा कि गुरु आपके जीवन के समस्त संशयों को समाप्त कर आपको ज्ञान के पथ को प्रकाशित कर सकते हैं। गुरु जीवन को पर करने का मंत्र बताता है जबकि एक आम शिक्षक केवल विषय के सूचना मात्र दे सकते हैं।
मुख्य वक्ता के तौर पर कृषि संस्थान के निदेशक प्रो0 शरद मिश्र ने गुरु शब्द की व्याख्या करते हुए बताया कि सच्चे गुरु वही होते हैं जो शिष्य के अंतर्मन को समझ सकें और उनके जीवन को सम्पूर्ण रूप में आलोकित कर सकें। गुरु आपको सभी प्रकार के संशयों को समाप्त कर कर्तव्य पथ पर अग्रसर करते हैं। गुरु एक सम्पूर्ण मनुष्य का निर्माण करता है, सभी प्रकार के विद्या के साथ जीवनोपयोगी कौशल भी प्रदान करता है। कार्यक्रम के आयोजन सचिव डा आमोद कुमार राय ने मनु भाकर का उदाहरण देकर गीता से सीखने की प्रेरणा लेने पर बल दिया। गुरु के रूप में त्रिदेवो की परिकल्पना को समझाते हुए बताया कि गुरु के अंदर सर्जन, पालन और संवर्धन तीनों की क्षमता रहती है। शिष्य को समर्पित रहते हुए गुरु के मार्गदर्शन में रहना चाहिए। कार्यक्रम का आभार व ज्ञापन डा नितेश शुक्ला ने किया।