गौमाता से जुड़ी एक रोचक कथा….
एक समय की बात है जिस समय समुद्र मंथन हुआ उस समय चौदह रत्नों में एक रत्न गौ माता का प्रादुर्भाव हुआ था, जिसमें एक रत्न अमृत भी निकला था, अमृत के बंटवारे में देवता और असुर आपस मे लड़ाई करने लगे , इसको देखते हुए भगवान श्रीहरी विष्णुजी मोहिनी रूप धारण कर देवता और असुरों को अलग अलग बैठाकर पहले भगवान ने अमृत देवताओं को पिला दिया, लेकिन राक्षस ने कपट रूप धारण कर राहु नामक राक्षस अमृत पीना चाहा,भगवान विष्णु पहचान गए,तत्काल उसी समय भगवान ने अपने चक्र सुदर्शन से उस राक्षस का वध कर उसका गला काट दिया, राक्षस ने देवताओं से खिन्न होकर देवताओं पर चढ़ाई कर दी देवता घबराकर ब्रह्मा जी के पास गए ब्रह्मा जी ने गौ माता के शरीर में सभी देवताओं को स्थान प्रदान किया, उसी समय भगवान भूत भगवान भोलेनाथ ने श्री हनुमान जी को गौ माता की रक्षा के लिए नियुक्त कर दिया जब राक्षस राज तपकासुर ने यह जाना के देवता गौमाता की सुरक्षा मे हैं उसी समय तपका सुर राक्षस ने गौ माता की हत्या के लिए तत्पर हुआ तब श्री हनुमान जी महाराज ने उस राक्षस का अंततः बध करके गौ माता की सुरक्षा किया जिससे देवताओं का प्राण बचा तथा देवता निर्भीक होकर स्वर्ग में निवास करने लगे इस कारण से प्रथम गौ सेवक श्री हनुमान जी महाराज थे।
आज श्रीहनुमान जी महाराज की कृपा से गौ माता की सुरक्षा के लिए हनुमानगढ़ी से ही हूंकार तथा गौ माता की रक्षा के लिए महंत बजरंग दास जी महाराज राष्ट्रीय गौ संरक्षक दल के द्वारा गौ माता की सुरक्षा का बीड़ा उठाया है।
(जय गौ माता जय गोपाल)
प्रेस विज्ञप्ति :-
राष्ट्रीय अध्यक्ष
महंत श्री श्री 1008 बजरंग दास जी महाराज हनुमानगढ़ी अयोध्याधाम