लखनऊ: दिनांक 07 फ़रवरी 2026
नेताजी सुभाष चंद्र बोस महाविद्यालय में लखनऊ संस्कृति एवं सिनेमा पर आधारित एक परिचर्चा का आयोजन हुआ
लखनऊ: स्थानीय नेताजी सुभाष चंद्र बोस राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय अलीगंज में दिनांक 7 फ़रवरी 2026 को लखनऊ संस्कृति एवं सिनेमा पर आधारित एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में जाने माने इतिहासकार डॉक्टर रोशन तक़ी मौजूद रहे। अपने उद्बोधन में उन्होंने लखनवी तहजीब की चर्चा करते हुए कहा कि लखनऊ गंगा जमुनी तहजीब का गहरवारा है।
उन्होंने विस्तार से लखनऊ के क्रमागत विकास की चर्चा करते हुए कहा कि देश के विभिन्न प्रांतों से सन 1775 में लोगों ने यहाँ आना शुरू किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ की पहचान लखनवी संस्कृति से है ये किसी ख़ास फिरके मजहब या धर्म से नहीं पहचाना जाता। मुख्य अतिथि ने कहा कि लखनऊ की पहले आप की चर्चा सारी दुनिया में होती है। उन्होंने कहा रानी केतकी की कहानी और पद्मावत ने अवध की जुबान को बहुत मजबूत किया है।
इस परिचर्चा का आयोजन महाविद्यालय के इतिहास विभाग के द्वारा किया गया। निदेशालय द्वारा स्वीकृत परियोजना से लखनऊ की संस्कृति एवं सिनेमा पर काम कर रहीं प्रोफेसर श्वेता मिश्रा एवं डाक्टर सनोबर हैदर ने परिचर्चा का विस्तार से उद्देश्य बताते हुए कहा कि छात्राओं को लखनऊ की संस्कृति से परिचित किया जाना जरूरी है।
डाक्टर तक़ी ने कहा पहली बोलती फ़िल्म आलम आरा लखनऊ की ही कहानी लगती है। आन और अमर जैसी फ़िल्मों की कहानी लखनऊ से ही लिखी गई। उन्होंने कहा कि जब महान फ़िल्म मुग़ले आज़म लिखी जा रही थी तो उसके लेखक कमाल अमरोही भाषा का अध्ययन करने लखनऊ आए थे। फ़िल्मों में लखनऊ के योगदान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मेरे महबूब और मेरे हुजूर जैसी फ़िल्में लखनऊ पर ही आधारित हैं। गुरुदत्त की चौदहवीं का चाँद भी लखनऊ की कहानी कहती है। उमराव जान और शतरंज के खिलाड़ी कभी न भूली जाने वाली फ़िल्में भी लखनऊ को स्पर्श करती है।
महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर रश्मि बिश्नोई ने अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी को लखनऊ का इतिहास और यहाँ की कला संस्कृति और विरासत को समझने की आवश्यकता है। परिचर्चा का संयोजन डाक्टर श्वेता मिश्रा तथा धन्यवाद ज्ञापन डाक्टर सनोबर हैदर ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रही।

