महराजगंज/एनीमिया मुक्त भारत का सपना होगा साकार कॉलेज में आयोजित हो रहे इससे जुड़े कार्यक्रम,पोषण, बाल विकास व लिंग आधारित हिंसा पर किशोरों को किया जा रहा जागरूक- डॉ0अग्रेश सिंह

स्वास्थ्य, शिक्षा व आईसीडीएस विभाग का संयुक्त प्रयास जुड़ेंगे करीब 2750 किशोर व किशोरिया
महराजगंज – फरेन्दा में एनीमिया की रोकथाम के लिए जीवन चक्र आधारित रणनीति अपनाई गई है इसमें सभी वर्गों को सम्मिलित किया गया है इस रणनीति के अंतर्गत 10 से 19 वर्ष के सभी किशोर किशोरियों के लिए सप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड संपूर्ण कार्यक्रम तथा 5 से 10 वर्ष के सभी बच्चों के लिए जूनियर कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। एनीमिया एक प्रमुख जन स्वास्थ्य समस्या है जिसका मुख्य कारण अल्प पोषण तथा खानपान में लौह तत्व की कमी का होना है। उत्तर प्रदेश में विभिन्न आयु वर्गों में एनीमिया एक व्यापक एवं गंभीर समस्या है एक सर्वे के अनुसार करीब 53% किशोरिया एनीमिया से ग्रसित और व्यापकता को कम करना के उद्देश्य से विफ़स कार्यक्रम का क्रियान्वयन किया जा रहा है जिसमें समस्त विभागों की सहभागिता अति आवश्यक है।
उक्त बातें राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम में सीएचसी के अधीचक डॉक्टर अंगरेश सिंह ने किशोर स्वास्थ्य मंच कार्यक्रम अंतर्गत जनता इंटर कालेज में कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा।
प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी अंजनी कुमार सिंह द्वारा बताया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार किशोर किशोरियों में एनीमिया की रोकथाम के उद्देश्य से नेशनल आयरन प्लस इनीशिएटिव अर्थात निपी कार्यक्रम के अंतर्गत विफ़स कार्यक्रम क्रियान्वित कर रही है इसमें आयरन गोलियों का क्रय आपूर्ति उपभोग एनीमिया का प्रबंधन तथा वर्ष में दो बार कृमि नाशक दवाइयों के दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
बीपीएम रिपुंजय पांडे ने कहा कि उपक्रम की सफलता के लिए स्वास्थ्य विभाग बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा का सहयोग लिया जा रहा है। बाल विवाह और लिंग आधारित हिंसा पर भी विस्तार से चर्चा किया ।
इसी क्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम के काउन्सलर विनोद गुप्ता ने बताया गया कि एनीमिया गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जो स्वास्थ्य के साथ साथ शारीरिक एवं मानसिक क्षमता को विपरीत रूप से प्रभावित करती है, जिसके बचाव हेतु विभाग के द्वारा आयरन के दो टेबलेट नीले और गुलाबी रंग का सभी स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों को दिया जाता है, जिसे हेतु यह प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। बीसीपीेएम बबीता शर्मा द्वारा बताया गया कि किशोरावस्था 10 से 19 वर्ष की आयु का अंतराल है जिसमें किशोरों में शारीरिक व मानसिक विकास और परिवर्तन तेजी से होते हैं इन परिवर्तनों को समझ पाने में किशोर स्वयं को भ्रम की स्थिति में पाते हैं जिससे उनका स्वास्थ्य एवं वृद्धि प्रभावित होता है इसमें समुचित विकास हेतु पोषण एक महत्वपूर्ण कारक है पोषण पर ध्यान देने की आवश्यकता है। 10 से 19 वर्ष की किशोरावस्था अति संवेदनशील अवस्था है जिसमें किशोरों में अनेक शारीरिक मानसिक मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक परिवर्तन होते हैं इस अवधि में मन चंचल होता है तथा गलत आदतों का तेजी से अपना लेने की प्रवृत्ति भी आ जाती है इसलिए प्रेशर से भी खुद को बचाना होगा।
उक्त कार्यक्रम में विद्यालय के छात्रों को किशोरावस्था से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन नुक्कड़ नाटक तथा खेलकूद के माध्यम से जागरूक किया गया। कार्यशाला में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर विधिवत प्रकाश डाला गया तथा महावारी के दौरान स्वच्छ कपड़ों या सेनेटरी पैड के प्रयोग के बारे में जागरुक किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के चिकित्साधिकारियों द्वारा किया गया तथा काउन्सलिंग की सेवा किशोर स्वास्थ्य परामर्शदाता द्वारा किया गया तथा आवश्यकतानुसार किशोरों को ब्लाक इकाई पर संचलित किशोर स्वास्थ्य क्लिनिक पर किया गया।कार्यशाला के दौरान पोस्टर प्रतियोगिता के माध्यम से किशोरावस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर किशोर/किशोरियों द्वारा अपने विचारों को व्यक्त किया गया। कार्यक्रम के दौरान विजेता प्रतिभागी को सीएचसी अधीक्षक द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
(महराजगंज से न्यूज़ 17 इंडिया संपादक की रिपोर्ट..)