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राष्ट्रीय हिंदू वाहिनी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष के0के0 पांडे ने प्राइमरी शिक्षा को निजी स्कूलों से बेहतर बनाने हेतु मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को भेजा 19 सूत्रीय ज्ञापन

लखनऊ: 08 मार्च 2026

राष्ट्रीय हिंदू वाहिनी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष के0के0 पांडे ने प्राइमरी शिक्षा को निजी स्कूलों से बेहतर बनाने हेतु मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को भेजा 19 सूत्रीय ज्ञापन

राष्ट्रीय हिंदू वाहिनी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष के0के0 पांडे ने मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव उ0प्र0 को पत्र लिखकर ‘सादर निवेदन किया है, कि उत्तर प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा को निजी स्कूलों से बेहतर बनाने के लिये निम्न 19 सूत्रीय ज्ञापन पत्र आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहा है।उन्होंने पत्र में लिखकर आग्रह पूर्वक निवेदन किया है कि बेसिक शिक्षा के इतिहास में वह सबसे काला दिन रहा होगा जिस दिन बेसिक शिक्षा का भी निजीकरण हुआ होगा।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पहली बार अबोध बालकों के मन में अमीरी और गरीबी का आभास” जागा होगा। पैसे-बनालो’ के दिमाग में पहली बार यह वात आयी होगी, कि बेसिक शिक्षा कक्षा-1-8 तक एक अच्छा व्यापार होगा। धन भी, कीर्ति भी, यश भी, सम्मान भी “आम के आम, गुठिलियों के दाम। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि तब फिर क्या गली-गली मुहल्ले-मुहल्ले निजी स्कूल खुल गये। सरकारी स्कूलों को षड्‌यंत्र पूर्वक बेकार व कमतर घोषित कराने का कुचर्क रचा गया। इसी वजह से सरकारी स्कूल बन्द करने पड़ रहे है। यह भी संगठन की राय में उचित नहीं है।काश! तत्कालीन सरकारों ने अपनी जिम्मेदारी समझी होती। “बेसिक शिक्षा “निजी हाथों में न सौंपी होती। काश? नये स्कूल और बनाये होते। स्कूलों को और अधिक साधन, सुविधायें तथा महत्व दिया होता। बाल मनोविज्ञान समझा होता। तो आज यह नौबत यहाँ तक नहीं जाती।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कृपया,” मृग मारीचिका के चलते करोड़ों लोगों की मेहनत की कमाई कुछ निजी स्कूल मालिकों की जेब में पहुंचती हैं। आज यह स्थित है कि प्रदेश के कुल बच्चों की आधे से अधिक संख्या का हिस्सा निजी स्कूलों में पढ़ रहा है। निजी स्कूलों द्वारा सरकारी स्कूलों को बेकार व कमतर साबित करने तथा खुद को श्रेष्ठतम साबित करने का प्रचार इस हद तक किया गया कि! जिस अभिभावक की मासिक आमदनी 5-10 हजार रुपया ही है तो वह भी अपने बच्चे को निजी स्कूल में पढ़ने को हजार रुपया भेज रहे हैं। भले ही साल दो साल बाद वे बच्चे की आगे की पढ़ाई अफोर्ड न कर पायें, और बच्चे या भविष्य चौपट हो जाये। कृपया संज्ञान लेने की कृपा करें।जो अत्यन्त निर्धन है,तथा शिक्षा के प्रति अति उदासीन है। मात्र खानापूर्ति करते है। उनके बच्चे ही अध्यापकों की प्रेरणा से सरकारी स्कूलों में जाते हैं।
लेकिन बच्चे तो बच्चे होते है। चाहे अमीर के हो, होना चाहिये। यह उत्तर दायित्व सरकार का है। बेहतर शिक्षा पर तो सबका अधिकार बराबर के चलते हैसियत से अधिक खर्च करने वाले अभिभावकों को सरकारी शिक्षा की बेहतरी का विश्वास दिलाना होगा। यह जिम्मेदारी लोकप्रिय सरकार की है। कृपया इसके लिये निम्न 19 सूत्रीय ज्ञापन आपकी सेवा में प्रस्तुत हैं। कृपया स्वीकार कर क्रियान्वित कराने की कृ‌पा करें।

1) प्रत्येक गल्ली-मुहल्ले,गाँव, कस्बों तथा शहरों के निजी
पाये जाने पैसे वाले स्कूलों की सघनतम जांच की जाये। मानक के अनुरूप अध्यापक, प्रधानाध्यापक की शैक्षिक योग्यता,वेतन-फीस, वातावरण, मूल भूत सुविधायें आदि का सख्ती से मूल्यांकन हो। तथा कुछ भी अन्यथा पाये जाने पर उनकी मान्यता समाप्त कर दी जाये। तथा उन भवनों का सरकारी उपयोग कर लिया जाये। ताकि अभिभावकों को वस्तुस्थित का ठीक से अन्दाजा हो सके।

2) सरकारी स्कूलों तथा भवन, वाउन्ड्री,नोट आदि भव्य व आकर्षक हो। ताकि बच्चे का स्कूल जाने में पूरी तरह से मन लगे।

3) बेसिक शिक्षा के स्कूल हरे-भरे हो इसके लिये माली की व्यवस्था की जाए।

4) स्कूलों में इलेक्‌ट्रॉनिक उपकरणों पानी के साधनों आदि के सतत संचालन हेतु सौर उर्जा की व्यवस्था की जाये।

5) स्कूलों के प्रधानाधापकों के निर्णय व अनुशासन से संबंधित अधिकार विना हस्तक्षेप के और बढ़‌ाये जाये ताकि सब कुछ अनुशासित तथा ठीक रहे।

6) प्रत्येक स्कूल के लिये गेटकीपर रनर की नियुक्ति की जाये।

7) प्रत्येक स्कूल में लिपिक को नियुक्ति की जाये।

8) तमाम अन्य विभागों से सम्बधित कार्य स्कूल स्टाफ से कार्यालय में शिक्षण के दौरान न लिये जाये,अनावश्यक प्रवेश विद्यालय में रोक दिये जायें।

9) विद्यालय (स्कूल) की किसी तरह की भी जाँच या किसी भी अन्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी का प्रवेश स्कूल में शिक्षण के दौरान में न हो।

10) अध्यापकों व प्रधानाध्यापकों के सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाये। किसी भी दशा में किसी भी प्रकार का कोई अपमान जनक रवैये या भाषा का इस्तेमाल न हो।

11) जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को नियमावली पर स्वतः निर्णय लेने के अधिकार दिये जाये। ताकि निर्णय लेने में विवश न होना पड़े,ताकि विलम्ब न हो।

12) शुरुआत से ही बच्चे को तकनीकी व रोजगार-परक
जानकारी भी दी जाये।

13) स्कूलों में अतिरिक्त परिसरों के होने की दशा में पार्क व वगीचा की स्थापना की जाये।

14) प्रधानाध्यापक को स्थानीय परिस्थतियों के अनुसार पूर्व की भांति एक दिन या आधे दिन का अवकाश स्व:विवेकानुसार करने का अधिकार हो।

15) बच्चों को दी जाने वाली समस्त निःशुल्क सुविधा तथा अनुदान स्कूल के माध्यम से ही दी जाये! ताकि वह बच्चों को मिल सकें, उसका दुरुपयोग न हो।

16) M.D.M. भोजन को और अधिक गुणवत्ता पूर्ण पौष्टिक आकर्षक तथा पोषण युक्त बनाया जाये,क्योंकि इसके लिये अभिभावक बच्चों को घर से भूखा ही भेज देते है! क्योंकि दोपहर का भोजन बच्चों का स्कूल में ही होता है।पर्याप्त खाद्यान्न तथा पोषण मंहगाई के सापेक्ष धन उपलब्ध कराया जाये।

17) M.D.M. में खिचड़ी आदि न बनवाकर सब्जी, चावल,रोटी, दाल आदि भोजन दिया जाये, खिचड़ी” शब्द से M.D.M. का उपहास भी उड़ाया जाता है। अध्यापकों के वेतन को लेकर बार-बार 70 हजार तथा 80 हजार कहकर तंज न कसा जाये,ये विद्यालय के सम्मानित प्रथम गुरु हैं। इससे अध्यापकों का मनोबल टूटता है।कृपया संज्ञान लेने का कष्ट करे। इतना वेतन उन्ही अध्यापकों को मिल पाता है। जो सेवा-निवृत्ति अवधि के करीब होते हैं,यह कोई भी उपलब्धि नहीं है। अपितु अध्यापकों के वेतन तथा सुविधाये और अधिक से अधिक सुविधाएं दी जाये। प्रधानाध्यापक तथा उनके सहायको की सहमती के बिना स्थानान्तरण न हो।

18) अध्यापक का कार्य केवल पूरे मनोयोग से विना किसी तनाव के केवल वच्चों को पढ़ाना है, अध्यापक, डॉक्टर,कारीगर तथा वकील को तनाव देकर कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता।

19) कृपया इस पर भी ध्यान दिया जाये, कि जो अभिभावक निजी स्कूलों की मेहगी फीस, किताबे, यूनीफार्म, वाहन पॉकेट मनी आदि खर्च बहन नहीं कर सकते है। क्या वे सरकारी अनुदान, फ्री राशन,आदि के आधीकारी है? क्या यह सब दिया जाना चाहिये ?

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कृपया उपरोक्त 19 सूत्रीय विन्दुवार सघनतम अवलोकन कर स्वीकार करने को कृपा करें तथा विन्दुवार क्रियान्वित कराने की कृपा करें

आपसे विनम्र अनुरोध है कि कृत कार्यवाही से संगठन को पत्र के द्वारा अवगत कराने की कृपा करें।

सादर: कौशल किशोर पान्डेय,प्रदेश अध्यक्ष राष्ट्रीय हिन्दू वाहिनी संगठन उ0प्र0।

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