हनुमान जन्मोत्सव चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को,आइए जाने इनका महात्म्य…
चारों युग प्रताप तुम्हारा।
है प्रसिद्ध जगत उजियारा ।।
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकन्दन राम दुलारे ।।
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता।
अस वर दीन्हीं जानकी माता ।।
जय जय जय हनुमान गोसाई……..
पंडित सुधांशु तिवारी(श्रीराम कथा प्रवक्ता)
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस साल यह पर्व 16 अप्रैल, शनिवार के मनाया रहा है जिसकी तैयारियां जोरों शोरों से चल रही हैं। हिंदू धर्म में हनुमान जन्मोत्सव का काफी अधिक महत्व है। इस दिन भगवान बजरंगबली की विधि-विधान से पूजा करने से हर कष्ट से छुटकारा मिलता है और भगवान सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। हनुमान जी की पूजा बड़े ही सतर्कता के साथ करनी चाहिए। जरा सी भूल आपके पूरी पूजा को बेकार कर सकती है। हनुमान जन्मोत्सव के दिन काफी भक्तगण व्रत भी रखते हैं। हनुमान जी की पूजा के नियम थोड़े कठिन जरूर है। लेकिन इनका पालन करके व्यक्ति भगवान को प्रसन्न कर सकता है। जानिए हनुमान जन्मोत्सव के दिन कौन से काम करने की है मनाही।
*हनुमान जन्मोत्सव के दिन बिल्कुल भी न करें ये काम*
हनुमान जन्मोत्सव के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दिन हनुमान जी का ध्यान करें। इसके साथ ही दिनभर बिल्कुल भी न सोएं। इस दिन मांस-मदिरा से दूरी बनाने के साथ ही हर किसी से अच्छा व्यवहार करना चाहिए। अगर आपके घर में हनुमान जी की टूटी मूर्ति या तस्वीर है तो तुरंत ही उसे आदर सत्कार के साथ पानी में प्रवाहित कर दें। कभी भी टूटी हुई मूर्ति की पूजा नहीं करना चाहिए। क्योंकि खंडित मूर्ति की पूजा का फल नहीं मिलता है। भगवान हनुमान जी की पूजा करते समय लाल, भगवा या फिर पीले रंग के ही वस्त्र पहनें। कभी भी सफेद या फिर काले रंग के कपड़े पहनकर पूजा न करें। अगर आपके घर परिवार में किसी का देहांत हो गया है और सूतक चल रहा है तो हनुमान जन्मोत्सव के दिन व्रत या फिर पूजा नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही मंदिर भी न जाएं। क्योंकि सूतक के समय आप अशुद्ध होते हैं। इसलिए 13 दिनों तक किसी भी पूजा-पाठ पर भाग न लें। भगवान बजरंगबली को कभी भी चरणामृत का भोग न लगाएं। इससे वह रुष्ट हो जाते हैं। इसके बदले आप चने की दाल, गुड़ के अलावा बूंदी के लड्डू, इमरती आदि का भोग लगा सकते हैं। हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं। इसलिए अगर कोई महिला इस दिन भगवान हनुमान की पूजा कर रही हैं तो उन्हें स्पर्श न करें। दूर से ही पूजा पाठ कर लें।
*हनुमान जी के जन्मोत्सव को जयंती कहना उचित है या अनुचित, आप भी जान लें*
हनुमान भक्तों के लिए 16 अप्रैल का दिन विशेष है. इस दिन को हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं. पौराणिक मान्यता और शास्त्रों के अनुसार चैत्र मास की पूर्णिमा की तिथि को मनाया जाता है. राम भक्त हनुमान जी का जन्मोत्सव देशभर में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है. हनुमान भक्त इस दिन का पूरे वर्ष इंतजार करते हैं.
*हनुमान जयंती या हनुमान जन्मोत्सव*
इस बात की चर्चा हो रही है कि हनुमान जी के जन्म दिन को जयंती कहा जाए या फिर जन्मोत्सव. जानकारों का मानना है कि इस दिन को जयंती नहीं बल्कि जन्मोत्सव ही कहना उचित होगा. इसके पीछे इन जानकारों का तर्क है कि जयंती और जन्मोत्सव में अंतर होता है. क्योंकि जयंती शब्द का इस्तेमाल उस व्यक्ति के लिए किया जाता है जो इस संसार में नहीं है. ये बात हनुमानजी पर लागू नहीं होती है. क्योंकि हनुमान जी कलयुग के जीवित व जागृत देवता माने गए हैं. तुलसीदासजी ने भी कलियुग में हनुमानजी की मौजूदगी का उल्लेख किया है. माना जाता है कि भगवान राम से अमरता का वरदान पाने के बाद हनुमान जी ने गंधमादन पर्वत पर निवास बनाया है. कहा जाता है कि इसी स्थान पर कलियुग में धर्म के रक्षक हनुमान जी निवास करते हैं. इसलिए इस दिन को जयंती नहीं जन्मोत्सव कहना ही उचित है.
*गंधमादन पर्वत कहां है?*
शास्त्रों के मुताबिक गंधमादन पर्वत कैलास पर्वत के उत्तर में मौजूद है. इस पर्वत पर महर्षि कश्यप ने तपस्या की थी. इस पर्वत पर गंधर्व, किन्नरों, अप्सराओं और सिद्घ ऋषियों का निवास बताया गया है.
*शिव के अवतार है हनुमान जी*
एक पौराणिक कथा के अनुसार हनुमान जी माता का नाम अंजना है. एक श्राप के कारण उन्होने पृथ्वी पर जन्म लिया, ये श्राप तभी समाप्त हो सकता था जब वे एक संतान को जन्म दें. वाल्मीकि रामायण के अनुसार केसरी श्री को हनुमान जी के पिता बताया गया है. जो सुमेरू राज्य के राजा थे. केसरी देव गुरु बृहस्पति के पुत्र थे. माता अंजना ने संतान प्राप्ति के लिए 12 वर्षों की भगवान शिव की घोर तपस्या की और परिणाम स्वरूप संतान के रूप में हनुमानजी ने जन्म लिया. शास्त्रो में हनुमानजी भगवान शिव का अवतार बताया गया है.
*हनुमान जयंती पर बनने वाला शुभ योग*
16 अप्रैल को सुबह 05 बजकर 34 मिनट से हर्षण योग शुरू होगा, जो कि 17 अप्रैल 2022 को देर रात 02 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगा।
*हर्षण योग का महत्व-*
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि हर्ष का अर्थ खुशी व प्रसन्नता होती है। ज्योतिष के अनुसार, इस योग में किए गए कार्य खुशी प्रदान करते हैं। हालांकि इस योग में पितरों को मानने वाले कर्म नहीं करने चाहिए।
*कितने बजे से शुरू होगी चैत्र पूर्णिमा 2022-*
हिंदू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 16 अप्रैल 2022, शनिवार को देर रात 02 बजकर 26 मिनट से शुरू होगी,जो कि 17 अप्रैल 2022, रविवार को सुबह 12 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी।
*हनुमान जी के मंत्र-*
श्री हनुमंते नम:
हनुमान जी का मूल मंत्र:- ओम ह्रां ह्रीं ह्रं ह्रैं ह्रौं ह्रः॥ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।
*हनुमान जयंती से जुड़ी पौराणिक कथा-*
पौराणिक कथाओं के अनुसार, अंजना एक अप्सरा थीं, हालांकि उन्होंने श्राप के कारण पृथ्वी पर जन्म लिया और यह श्राप उनपर तभी हट सकता था जब वे एक संतान को जन्म देतीं। वाल्मीकि रामायण के अनुसार केसरी श्री हनुमान जी के पिता थे। वे सुमेरू के राजा थे और केसरी बृहस्पति के पुत्र थे। अंजना ने संतान प्राप्ति के लिए 12 वर्षों की भगवान शिव की घोर तपस्या की और परिणाम स्वरूप उन्होंने संतान के रूप में हनुमानजी को प्राप्त किया। ऐसा विश्वास है कि हनुमान जी भगवान शिव के ही अवतार हैं।