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1000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य, विकास को गति देने की तैयारी-जिलाधिकारी

सिद्धार्थनगर: 16 नवंबर 2025

1000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य, विकास को गति देने की तैयारी- जिलाधिकारी

जीबीसी-5.0 के तहत जिले के सभी विभागों को आवंटित किया गया लक्ष्य- जिलाधिकारी

निवेश से आकांक्षी जिले को मिलेगा उद्योग,रोजगार और ढांचागत मजबूती का रास्ता- जिलाधिकारी

टुडे क्रांति संवाददाता,16 नवंबर 2025

सिद्धार्थनगरः राज्य सरकार की एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की योजना में आकांक्षी जिला सिद्धार्थनगर की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। प्रदेश में होने जा रहे ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी)-5.0 के लिए जिले को 1000 करोड़ रुपये निवेश का लक्ष्य सौंपा गया है। शासन से प्राप्त निर्देशों के अनुसार, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा ने सभी विभागों को जिम्मेदारी बांटते हुए निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप निवेश प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह प्रदेश सरकार का बड़ा अवसर है और जिले को हर हाल में इसका लाभ उठाना चाहिए। विभागों को लक्ष्य पूर्ति की स्पष्ट समय-सीमा दी गई है। सिद्धार्थनगर को लंबे समय से बड़े निवेश और औद्योगिक ढांचे का इंतजार था। यदि यह लक्ष्य पूरा होता है, तो जिला आने वाले वर्षों में विकास की नई रफ्तार से आगे बढ़ सकेगा।

उन्होंने कहा जिला प्रशासन का मानना है कि यह निवेश सिद्धार्थनगर के विकास की दिशा को बदल सकता है। स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, कृषि, उद्योग, पर्यटन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में नए पूंजी निवेश से जिले में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और युवाओं को स्थानीय स्तर पर कार्यस्थल मिलेगा। जिले के आकांक्षी होने के कारण अब तक यहां उद्योग और सेवा क्षेत्र का विस्तार सीमित रहा है, लेकिन बड़े निवेश के आने से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

डीएम कार्यालय की सूची के अनुसार, चिकित्सा शिक्षा विभाग को 175 करोड़, ऊर्जा विभाग को 200 करोड़, उच्च शिक्षा और पर्यटन विभाग को 100-100 करोड़, मत्स्य, पशुपालन और एमएसएमई विभाग को 50-100 करोड़ तक का लक्ष्य दिया गया है। वहीं, दुग्ध, कृषि, आयुष और खाद्य विभाग को छोटे लेकिन महत्वपूर्ण निवेश लक्ष्य सौंपे गए हैं। योजना के अनुसार, 25 नवंबर तक सभी विभागों को निवेश सारथी पोर्टल पर सहमति-पत्र (एमओयू) अपलोड करने होंगे। इसके बाद जिले के प्रस्ताव प्रदेश स्तरीय आयोजन में शामिल किए जाएंगे।
प्रशासन का कहना है कि निवेश बढ़ने से-स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाजार मिलेगा! कृषि-प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा मिलेगा पर्यटन और चिकित्सा क्षेत्र की सुविधाएं मजबूत होंगी युवाओं का पलायन कम होगा सूक्ष्म व लघु उद्योगों को नई ऊर्जा मिलेगी।जिले के विकास में वडा प्रभाव देखने को मिलेगा।

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