45 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा भव्य लेहड़ा देवी कॉरिडोर,डीपीआर तैयार कर शासन को भेजने की तैयारी
नक्काशीदार पत्थरों से सजेंगी दीवारें व बनेगा भव्य द्वार,कॉरिडोर के तहत मंदिर का स्वरूप होगा अर्धचंद्राकार
महराज जनपद के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल लेहड़ा देवी मंदिर के अब बहुरने वाले हैं दिन,30 एकड़ क्षेत्रफल में फैले लेहड़ा देवी मंदिर परिसर का होगा कायाकल्प
महराजगंज। जनपद के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल लेहड़ा देवी मंदिर के दिन अब बहुरने वाले हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इस ऐतिहासिक स्थल को भव्य पर्यटन केंद्र के रूप में में विकसित करने के लिए 45 करोड़ रुपये की लागत से लेहड़ा देवी कॉरिडोर निर्माण की तैयारी शुरू हो गई है। इसका डीपीआर तैयार कर लिया गया है। जल्द ही इसे प्रमुख सचिव पर्यटन को भेजा जाएगा,30 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस पूरे मंदिर परिसर को फसाड लाइटिंग व आधुनिक संसाधनों से लैस कर इसका कायाकल्प किया जाएगा।नक्काशीदार पत्थरों से सजेंगी दीवारें व बनेगा भव्य द्वारः कॉरिडोर के तहत मंदिर का स्वरूप अर्धचंद्राकार होगा। परिसर में एक भव्य प्रवेश द्वार।कायाकल्प के बाद इस तरह मंदिर का स्वरूप बनाया जाएगा।
लेहड़ा देवी मंदिर की ऐतिहासिक व आध्यात्मिक महत्ता को देखते हुए 45 करोड़ रुपये की लागत से भव्य कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। डीपीआर स्वीकृति के लिए प्रमुख सचिव पर्यटन को भेजा जाएगा। इस परियोजना से जहां स्थानीय पर्यटन व रोजगार को बढ़ावा मिलेगा, वहीं श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। जिसके दोनों ओर हाईटेक सुरक्षा कक्ष प्रसाद कक्ष, श्रद्धालु विश्राम कक्ष, फस्र्ट एड कक्ष, यूटिलिटी रूम व जूता-चप्पल स्टैंड सहित विभिन्न जनसुविधाएं विकसित की जाएंगी।
मंदिर की बाउंड्री पर देवी देवताओं व मंदिर से जुड़ी प्राचीन समय की मूर्तियां स्थापित की जाएंगी व दीवारों पर बेहतरीन धार्मिक व आध्यात्मिक नक्काशी की जाएगी। उन्होंने कहा कि घाट लाल बलुआ पत्थरों व हरित पट्टियों से सुसज्जित होगा। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए परिसर में 24 कमरों का सर्वसुविधायुक्त निवास स्थान भी बनाया जाएगा।
नैनो बबल तकनीकी से सरोवर की सफाई व लाइट एंड साउंड शोः इस महापरियोजना के तहत मंदिर के सरोवर व घाटों का व्यापक सुंदरीकरण होगा। जलाशयों को स्वच्छ रखने के लिए आधुनिक नैनो बबल तकनीकी से सफाई कराई जाएगी व यहां आने वाले पर्यटकों के लिए लाइट एंड साउंड शो स्थापित होगा। इसके अलावा, पुराने घाटों के जीर्णोद्धार के साथ लाल बलुआ पत्थर से नए घाट, आधुनिक हवनकुंड व यज्ञशाला का निर्माण कराया जाएगा।
परिसर में कड़ाही चढ़ाने की पौराणिक प्रथा के लिए एक डेडिकेटेड एरिया व वाहनों के लिए डेडीकेटेड पार्किंग बनेगी। स्थानीय दुकानों को व्यवस्थित कर उनके अग्रभाग को सुंदर बनाया जाएगा व दुकानों के बीच सड़कों के ऊपर आधुनिक शेड डाले जाएंगे।

