सिद्धार्थनगर: 21 अगस्त 2025
जिला प्रशासन ने सात सागरों की दशा संवारने के लिए भेजा प्रस्ताव,जल्द मिल सकती है स्वीकृति
सिद्धार्थनगर: नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर जिले का सागर माला सर्किट अब पर्यटन के क्षेत्र में जिले की नई पहचान बनने जा रहा है। शासन ने इस परियोजना का संज्ञान लिया है और पर्यटन विभाग इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करा रहा है। जिला प्रशासन को उम्मीद है कि डीपीआर बनने के बाद इस महत्वाकांक्षी योजना को जल्द स्वीकृति मिल जाएगी।
सिद्धार्थनगर प्रदेश का इकलौता जिला है, जहां नेपाल सीमा के पास ब्रिटिश कालीन 10 बड़े जलाशय स्थित हैं। स्थानीय लोग इन्हें सागर के नाम से जानते हैं। यह भगवान बुद्ध की क्रीड़ास्थली के पास स्थित हैं। कालानमक धान की खेती में इन सागरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन समय के साथ ये गाद और उपेक्षा से भरते चले गए। जिला प्रशासन ने इन्हीं सागरों की श्रृंखला को नया जीवन देने के लिए इसे ‘सागर माला सर्किट’ का नाम दिया है और इको पर्यटन के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है।महानिदेशक पर्यटन को भेजा सागरों के कायाकल्प का प्रस्तावः जिला प्रशासन ने सागरों के कायाकल्प के लिए 65 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। यह प्रस्ताव 12 नवंबर को महानिदेशक पर्यटन को भेजा गया। इस योजना में सात प्रमुख सागरों को शामिल किया गया है- बजहा, मोती, मसई, सेमरा, सिसवा, मझौली और शिवपति सागर। इन पर चरणबद्ध तरीके से विकास कार्य होंगे।
परियोजना में कुल 16 कार्य शामिल हैं। इसके अंतर्गत सागरों के किनारे वेंडिंग जोन, सिटिंग जोन, ग्रीन जोन, लकड़ी के बने काटेज, ऊंचे प्रकाश स्तंभ, बैठने की बेंच और अन्य सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। स्थानीय व्यापारियों को भी अवसर दिया जाएगा कि वे यहां जिले की विशेष वस्तुएं जैसे कालानमक चावल, डिडई का लड्डू और बर्डपुर की रामकटोरी सहित अन्य उत्पाद बेच सकें। इस तरह यह क्षेत्र न केवल प्राकृतिक सौंदर्य बल्कि स्थानीय संस्कृति और स्वाद का भी केंद्र बनेगा। सागरों की सफाई और गाद निकालकर नौकायन की व्यवस्था की जाएगी। किनारे-किनारे शौचालय, कूड़ेदान और सड़क प्रकाश व्यवस्था होगी। लोगों को सागर की भौगोलिक स्थिति और ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराने के लिए सूचना पट्ट लगाए जाएंगे। प्रवेश द्वार से लेकर वेंडिंग जोन तक सुंदर रास्ते बनेंगे। सागरों के पास जल मंच (वाटर जेट्टी) और प्रकाश व ध्वनि कार्यक्रम (लेजर शो) की भी व्यवस्था होगी।
इतिहास और आस्था से जुड़ावः इन सागरों में से बजहा, मझौली और सिसवा सागर भगवान बुद्ध की क्रीड़ास्थली कपिलवस्तु से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर हैं। हर वर्ष आठ से नौ हजार देशी-विदेशी पर्यटक कपिलवस्तु आते हैं, लेकिन इन सागरों तक न के बराबर पहुंचते हैं। जिला प्रशासन का मानना है कि जब इनका कायाकल्प होगा तो पर्यटक कपिलवस्तु के साथ सागर माला सर्किट के माध्यम से सिद्धार्थनगर को पर्यटन का नया आयाम मिलेगा। यह योजना न केवल बौद्ध आस्था से जुड़े कपिलवस्तु क्षेत्र को मजबूती देगी बल्कि स्थानीय लोगों को भी रोजगार और व्यापार के अवसर उपलब्ध कराएगी। हमें विश्वास है कि डीपीआर बनने के बाद शासन से शीघ्र स्वीकृति मिल जाएगी,इन सागरो को लोग देखने आएंगे और जिले में रुकने की अवधि बढ़ेगी,इससे होटल,भोजनालय, परिवहन और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
परियोजना में सात सागरों पर अलग-अलग धनराशि खर्च की जाएगी। बजहा सागर पर 18.50 करोड़, मोती सागर पर 7.83 करोड़, मसई सागर पर 7.04 करोड़, सेमरा सागर पर 6.38 करोड़, सिसवा सागर पर 6.98 करोड़, मझौली सागर पर 5.09 करोड़ और शिवपति सागर पर 9.01 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

