राज्य सभा सांसद बृजलाल ने भगवान बुद्ध के अवशेषों की नीलामी रोकवाने पर पीएम मोदी का जताया आभार
सांसद के एक पत्र ने पवित्र बुद्ध अवशेषों को बचाने में कैसे की मदद
पूर्व डीजीपी के आपातकालीन संदेश से बुद्ध अवशेषों की कैसे हुई वापसी
सिद्धार्थनगर से News17 india संपादक विजय कुमार मिश्र की रिपोर्ट।
सिद्धार्थनगर: उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी/राज्य सभा सांसद बृजलाल कहा कि मुझे बहुत प्रसन्नता है कि भगवान बुद्ध के अवशेषों की 7 मई 2025 को हांगकांग में होने वाली नीलामी को रोक दिया गया है। यह वे अवशेष है जिसे बुद्धकालीन काला नमक चावल एवं नील की खेती करने वाले ब्रिटिश जमींदार एचडब्लू कार्लसन पेपे ने 1898 में भगवान बुद्ध के पिपरहवा स्थित स्तूप से निकलावा था।
पेपे ने 1848 में बुद्धकालीन कालानमक चावल खाया था। पेपे को यह चावल इतना पसंद आया कि उसने तत्कालीन गोरखपुर,गोंडा के तराई क्षेत्रों में काला नमक चावल की खेती खुद करवाई। 1865 गोरखपुर से काट कर जिला बस्ती बना। अब यह काला नमक के क्षेत्र जिला सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, बलरामपुर जिलों में है जिसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिद्धार्थनगर के लिए एक जिला, एक उत्पाद में शामिल किया। पेपे की नजर बुद्ध के स्तूप पिपरहवा पर पड़ी। उड़ने सुरंग बनाकर स्तूप के आधार से सोप-स्टोन के बाक्स से भगवान बुद्ध से संबंधित रत्न, अन्य पवित्र वस्तुएं एवं अवशेष निकाल लिए जिसको वह लंदन ले गया जिसको उसके परिवारजन हांगकांग में 7 मई को नीलामी कराकर धन कमाना चाहते थे।
राज्य सभा सांसद बृजलाल ने बताया कि मुझे जैसे जानकारी हुई, मैंने 5 मई को तुरंत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कल्चर मिनिस्टर गजेंद्र सिंह शेखावत एवं विदेशमंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर ई-मेल के माध्यम से भेज दिया। भारत सरकार ने तुरंत कार्यवाही की और भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की नीलामी रोकवा दी। कहा कि मैं सिद्धार्थनगर का रहने वाला हूँ मेरे गाँव गुजरौलिया खालसा से पिपरहवा (अब कपिलवस्तु) मात्र 15 से 20 किलोमीटर है। कपिलवस्तु भगवान बुद्ध की जन्मस्थली है जहाँ 1972 में भारतीय पुरातत्व विभाग ने डा. केएम श्रीवास्तव के नेतृत्व में उत्खनन कराई जहाँ महाराजा शुद्धोधन का महल निकला। वहाँ
07 मई को हांगकांग में नीलामी होने वाली थी। राज्यसभा सांसद बृजलाल की अपील पर पीएम मोदी ने आपरेशन सिंदूर की व्यस्तता के बावजूद भी नीलामी रोकवाई। पिपरहवा स्थित कपिलवस्तु स्तूप से भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियाँ मिली जो इस समय दिल्ली में रखी है। पिपरहवा (अब कपिलवस्तु) एक पवित्र बुद्ध तीर्थस्थल है। भगवान बुद्ध के अवशेषों न केवल भारत अपितु विश्व विशेषकर दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के बुद्धिष्ठों की आस्था जुड़ी है। अवशेषों की नीलामी रोकने से दुनिया में बुद्ध भगवान के अनुवाइयों में खुशी की लहर है, विशेषकर सिद्धार्थनगर के निवासियों में जो भगवान बुद्ध से आत्मिक रूम से जुड़े है। उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभारी हूँ जिन्होंने आपरेशन सिंदूर में अति व्यस्तता के बावजूद भी भगवान बुद्ध की पवित्र अवशेषों की नीलामी रुकवाई और अब ये अवशेष भारत अवश्य लाए जाएँगे।

