नई दिल्ली: दिनांक 12 फरवरी 2026
संसद में गूंजी सिद्धार्थनगर के लाल की आवाज! सांसद पाल ने सदन में उठाया श्रम सुधारों और ककरहवा बॉर्डर का मुद्दा
नई दिल्ली: आज लोकसभा में डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल ने दो अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों को मजबूती से उठाया। एक ओर श्रम सुधारों से जुड़ा Industrial Relations Code (Amendment) Bill, 2026 पर उनका विस्तृत वक्तव्य, और दूसरी ओर नियम 377 के तहत उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर स्थित ककरहवा सीमा चौकी से जुड़ा जनहित का मुद्दा। सांसद पाल ने सदन में इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड अमेंडमेंट बिल (Industrial Relations Code Amendment Bill ) 2026 का समर्थन करते हुए कहा कि यह केवल तकनीकी संशोधन नहीं, बल्कि भारत के श्रम कानूनों की स्पष्टता, स्थिरता और भरोसे को मजबूत करने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन यह सुनिश्चित करता है कि पुराने श्रम कानूनों का निरसन संसद द्वारा बनाए गए कानून से हुआ है, जिससे भविष्य की कानूनी अनिश्चितता समाप्त होती है और श्रम सुधारों की नींव और मजबूत होती है,उन्होंने अपने भाषण में श्रमिक आंदोलनों के वैश्विक इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में श्रम संहिताओं के माध्यम से हो रहे सुधार आने वाले समय में श्रमिक हित में एक संतुलित और आधुनिक परिवर्तन के रूप में देखे जाएंगे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि चार श्रम संहिताओं के माध्यम से 29 पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों को एक आधुनिक, सरल और एकीकृत ढांचे में बदला गया, जिससे श्रमिक सुरक्षा, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को नई दिशा मिली।
सांसद पाल ने कहा कि नवंबर 2025 से श्रम संहिताओं के प्रभावी होने के बाद रोजगार संरचना में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। टियर-II, III और IV शहरों में जॉब पोस्टिंग में लगभग 56% तक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि इन शहरों में रोजगार वृद्धि दर 12–15% रही है, जो राष्ट्रीय औसत 8.4% और मेट्रो शहरों के 6.6% से अधिक है। उन्होंने महिला रोजगार में लगभग 10% वृद्धि को भी श्रम सुधारों का सकारात्मक परिणाम बताया।उन्होंने नियम 377 के तहत उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद स्थित ककरहवा सीमा चौकी से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यह सीमा चौकी कस्टम संचालन के लिए खुली है, लेकिन यहां अभी तक इमिग्रेशन सुविधा शुरू नहीं की गई है। साथ ही, इस सीमा से भारी वाहनों विशेष रूप से यात्री बसों और वाणिज्यिक मालवाहक वाहनों के आवागमन की अनुमति नहीं है, जिससे क्षेत्र की संभावित आर्थिक गतिविधियां सीमित हो रही हैं।
सांसद पाल ने सदन में मांग किया कि ककरहवा सीमा चौकी को पूर्ण इमिग्रेशन एंट्री प्वाइंट के रूप में विकसित किया जाए और यहां से भारी वाहनों के आवागमन की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि इससे नेपाल के लुंबिनी आने वाले अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटकों, यात्रियों और व्यापारियों को भारत में प्रवेश के लिए अधिक तेज और सुविधाजनक मार्ग मिलेगा। इससे पर्यटन, सीमा पार व्यापार, स्थानीय व्यवसाय और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सिद्धार्थनगर एक आकांक्षी जिला है और इस सुविधा विस्तार से क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिल सकती है।उन्होंने केंद्र सरकार से इन दोनों महत्वपूर्ण मुद्दों—श्रम सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन और ककरहवा सीमा चौकी पर सुविधाओं के विस्तार पर शीघ्र और सकारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया।

