रिश्वत लेने के मामले में एसडीएम इटवा की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने भेजी कार्रवाई की संस्तुति
सिद्धार्थनगर: फरियादी से रिश्वत लेने के आरोपों में प्रशासन ने एक नायब तहसीलदार पर सख्त रुख अपनाया है। डीएम शिवशरणप्पा जीएन ने उपजिलाधिकारी इटवा की जांच रिपोर्ट के आधार पर बांसी तहसील के खेसरहा में तैनात नायब तहसीलदार माधुर्य यादव के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर दी है। जांच में उनकी कार्यशैली प्रथमदृष्टया संदिग्ध पाई गई है।
मामला ग्राम टीकुर निवासी ओम प्रकाश चौधरी की शिकायत से जुड़ा है। गाटा संख्या 421/0.371 हेक्टेयर से संबंधित वरासत वाद उन्होंने पांच मार्च 2020 को दाखिल किया था, जबकि 27 मई 2022 को नया वाद संख्या 202217630202990 न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जो अब तक लंबित है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस वाद के निस्तारण के नाम पर उनसे तीन किश्तों में कुल 30 हजार रुपये वसूले गए। उन्होंने बताया कि करीब सात माह पूर्व 12 हजार रुपये दिए गए, जबकि वर्ष 2026 में होली के समय अतिरिक्त धन की मांग पर 18 हजार रुपये की व्यवस्था पत्नी के गहने और गेहूं बेचकर की गई। इसके बाद भी वाद का निस्तारण नहीं हुआ और पुनः 15 हजार रुपये की मांग की गई, जिससे आहत होकर उन्होंने 20 दिन पूर्व शिकायत दर्ज कराई।
जांच के लिए नामित एसडीएम इटवा कुणाल ने 10 अप्रैल को दोनों पक्षों को नोटिस जारी किया और 13 अप्रैल 2026 को तहसील बांसी में बयान दर्ज किए। नायब तहसीलदार ने आरोपों से इंकार किया, लेकिन जांच में शिकायतकर्ता और कथित मुंशी के बीच लगातार संपर्क की पुष्टि काल डिटेल से हुई। साथ ही संबंधित अधिवक्ता का वाद से कोई संबंध न होना भी सामने आया। जांच अधिकारी ने पाया कि 27 मई 2022 से लंबित वाद के निस्तारण में देरी का कोई ठोस कारण नहीं है। 11 अप्रैल को स्थल निरीक्षण और 16 अप्रैल को आदेश नियत होने के बावजूद मामला लंबित रहा। जांच रिपोर्ट में नायब तहसीलदार और कथित मुंशी की भूमिका संदिग्ध मानते हुए विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है, जिसे डीएम ने अग्रसारित कर दिया है।

