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नीतिगत पंगुता के दौर से बाहर निकली उत्तर प्रदेश की नौकरशाही : सीएम योगी

नीतिगत पंगुता के दौर से बाहर निकली उत्तर प्रदेश की नौकरशाही : सीएम योगी

मुख्यमंत्री ने किया प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के नए भवन का लोकार्पण

22.5 एकड़ में तैयार परिसर को देश में सार्वजनिक नेतृत्व का अग्रणी संस्थान बनाने का लक्ष्य

सीजी सिटी में प्रशासनिक प्रशिक्षण के लिए निर्मित अत्याधुनिक नवीन परिसर प्रबंधन अकादमी में प्रशिक्षणार्थियों को ट्रेनिंग देने की है सुविधा

लखनऊः प्रदेश की नौकरशाही को नई कार्य संस्कृति, तकनीक और नेतृत्व का मंत्र देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश अब नीतिगत पंगुता के दौर से बाहर निकल चुका है। राजनीतिक नेतृत्व विजन देता है, लेकिन उसे धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी प्रशासनिक मशीनरी की होती है। उन्होंने राजधानी में 464 करोड़ रुपये की लागत से नवनिर्मित डा. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के नवीन परिसर का लोकार्पण करते हुए इसे देश में सार्वजनिक नेतृत्व का अग्रणी संस्थान बनाने का लक्ष्य रखा। अकादमी का शिलान्यास वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था।

सीजी सिटी में 22.5 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित किए गए नवीन परिसर का शुक्रवार को विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की नौकरशाही अब विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी गति से आगे बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश विकसित भारत की मजबूत आधारशिला बनेगा और इसके लिए गांव, कस्बों और शहरों को आत्मनिर्भर बनाना होगा। योगी ने ज्ञान से विकास, विकास से जनविश्वास और जनविश्वास से राष्ट्र निर्माण की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि यह संस्थान सुशासन की नई पीढ़ी तैयार करेगा।

सीएम योगी ने कहा कि टीमवर्क, सकारात्मक सोच और नवाचार ही सफल प्रशासन की पहचान है तथा अधिकारियों को लगातार सीखने और तकनीक आधारित प्रशासन अपनाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश की पहचान नकारात्मक हो चुकी थी और लोगों को लगता था कि यहां योजनाएं सफल नहीं हो सकतीं, लेकिन पिछले नौ वर्षों में प्रदेश ने अपनी नई पहचान बनाई है। आज प्रदेश देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और सुरक्षा, सुशासन, भीड़ प्रबंधन तथा तकनीक आधारित प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के मिशन कर्मयोगी के तहत आइ-गाट प्लेटफार्म पर क्षमता निर्माण में प्रदेश अब देश में पहले स्थान पर पहुंच चुका है। विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश विजन डाक्यूमेंट तैयार करने के लिए 98 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए।

मुख्यमंत्री ने तकनीक आधारित सुधारों को भ्रष्टाचार खत्म करने का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि ई-पास मशीनों से राशन वितरण पारदर्शी हुआ है, डीबीटी से योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है और गन्ना किसानों को अब मोबाइल फोन पर ही पूरी जानकारी मिल रही है। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और आमजन का सरकार पर विश्वास बढ़ा है। इस अवसर पर अकादमी के महानिदेशक एम. देवराज ने मुख्यमंत्री को स्मृति चिह्न भेंट किया। कार्यक्रम में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, मुख्य सचिव एसपी गोयल, पूर्व मुख्य सचिव आर रमणी, अतुल गुप्ता, आलोक रंजन, अनूप चंद्र पांडेय, दुर्गा शंकर मिश्र, मनोज कुमार सिंह आदि उपस्थित थे।

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