2017 के बाद बदला यूपी की परीक्षा व्यवस्था का चेहरा! पूर्व डीजीपी बृज लाल का दावा
सपा सरकार के शासनकाल के दौरान नकल,पेपर लीक और भर्ती विवाद बढ़े- बृज लाल
सपा सरकार में नकल माफिया का नेटवर्क मजबूत हुआ था, और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हुई थी- बृज लाल
यह लेख पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं राज्यसभा सांसद बृज लाल की है।
लखनऊ।उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृज लाल ने उत्तर प्रदेश की परीक्षा और भर्ती व्यवस्था पर दावा किया है कि प्रदेश में नकल संस्कृति की जड़ें समाजवादी पार्टी के शासनकाल में मजबूत हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में नकल माफिया और भर्ती सिंडिकेट को बढ़ावा मिला, जबकि 2017 के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार ने सख्त कानून और तकनीकी निगरानी के जरिए इस व्यवस्था पर लगाम लगाने का प्रयास किया। पूर्व डीजीपी बृजलाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लाखों युवाओं का भविष्य प्रतियोगी परीक्षाओं पर निर्भर करता है। ऐसे में पेपर लीक और भर्ती में गड़बड़ियां केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय हैं। उनके मुताबिक, पिछले तीन दशकों में प्रदेश ने परीक्षा व्यवस्था के दो अलग-अलग दौर देखे हैं।
पूर्व डीजीपी बृजलाल ने दावा किया कि 1992 में लागू नकल विरोधी कानून के बाद सत्ता परिवर्तन के साथ इसकी प्रभावशीलता कमजोर हुई और सेल्फ सेंटर व्यवस्था जारी रहने से संगठित नकल को बढ़ावा मिला। इसी दौर में नकल माफिया का नेटवर्क मजबूत हुआ था और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हुई थी,पूर्व डीजीपी ने 2012 से 2017 के बीच कई भर्ती परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक तथा अनियमितताओं का जिक्र किया। उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा, लोक सेवा आयोग की परीक्षा और ग्राम विकास अधिकारी भर्ती समेत कई मामलों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस समय भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
पूर्व डीजीपी यूपी एवं राज्यसभा सांसद बृज लाल ने यह भी कहा कि 2017 के बाद योगी सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार को प्राथमिकता दी। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश लोक सेवा (प्रतियोगी परीक्षा) अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम लागू कर पेपर लीक और संगठित नकल के खिलाफ सख्त दंड का प्रावधान किया गया। साथ ही परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और तकनीक आधारित मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं।उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य की प्रगति उसकी परीक्षा और भर्ती व्यवस्था की निष्पक्षता पर निर्भर करती है। उनका कहना है कि युवाओं का भरोसा तभी मजबूत होगा, जब उनकी मेहनत का मूल्यांकन पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ किया जाएगा।

