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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के प्राणी व जंतु विज्ञान विभाग के शिक्षक मत्स्य पालकों को देंगे मछली पालन का प्रशिक्षण

सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के प्राणी व जंतु विज्ञान विभाग के शिक्षक मत्स्य पालकों को देंगे मछली पालन का प्रशिक्षण

चौपाल में विशेषज्ञ को भी कर रहे हैं आमंत्रित!विशेषज्ञ यह देखेंगे कि इस क्षेत्र के लिए कौन सी प्रजाति की मछली पालन के लिए अनुकूल है

मछली उत्पादक गांवों में जागरूकता चौपाल का आयोजन होगा! चौपाल में सि0वि0 के शिक्षकों के साथ मत्स्य और कृषि विभाग के अधिकारी भी चौपाल में रहेंगे मौजूद

सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के प्राणी व जंतु विज्ञान विभाग के शिक्षक मछली पालन के उत्थान के लिए काम कर रहे हैं। प्रशासन व प्राणी विज्ञान विभाग ने मिलकर कार्ययोजना तैयार की है। इसके लिए विशेषज्ञ को भी आमंत्रित कर रहे हैं। विशेषज्ञ यह देखेंगे कि इस क्षेत्र के लिए कौन सी प्रजाति की मछली का पालन अनुकूल है। मत्स्य पालकों की कार्यशाला भी आयोजित होगी। मछली उत्पादक गांवों में भी जागरूकता चौपाल का आयोजन होगा।चौपाल में सि0वि0 के शिक्षकों के साथ मत्स्य और कृषि विभाग के अधिकारी भी रहेंगे। किसानों को उन्नत विधि से मछली पालन की विधि बताई जाएगी। सिवि के प्राणी विज्ञान विभाग के शिक्षक किसानों को वैज्ञानिक विधि से मछली पालन के लिए प्रशिक्षित करेंगे।

सिद्धार्थ विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करके किसानों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। प्रशासन के मत्स्य विभाग की ओर से सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के पाणी विज्ञान विभाग में मत्स्य पालन पर चल रहे शोध से किसानों की सूची प्राणी विज्ञान विभाग को उपलब्ध कराई गई। मार्च में पहले चरण की कार्यशाला आयोजित हुई। जिसमें किसानों को उन्नत और वैज्ञानिक विधि से मत्स्य पालन की विधि बताई गई। अब दूसरे चरण की कार्यशाला के लिए प्रशासन से संपर्क किया गया है।

प्राणी विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डा. आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा कि मत्स्य पालन पर शोध हो रहा है। जनपद के जीडीपी में मत्स्य पालन की सहभागिता है। जल्द ही दूसरे चरण की कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें किसानों को वैज्ञानिक विधि से मत्स्य पालन की विधि की जानकारी देंगे।सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के प्राणी विज्ञान विभाग ने कार्ययोजना तैयार की है।बाहर के प्रशिक्षक बताएंगे मछली की प्रजाति के बारे में,मत्स्य विशेषज्ञ को यहां पर आमंत्रित किया जाएगा। वह यहां के जलवायु और भौगोलिक स्थिति को देखकर यह बताएंगे कि कौन सी प्रजाति को मछली का पालन लाभकारी होगा। इसके अलावा बाजार की संभावना को भी देखेंगे।श्रोत विज्ञप्ति।

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