गोरखपुर शामली एक्सप्रेसवे हाईस्पीड कनेक्टिविटी से जुड़ेगा जनपद, 62 किमी से होकर गुजरेगी बहुप्रतीक्षित ग्रीनफील्ड रोड
आसान होगा लखनऊ एवं दिल्ली का सफर,शामली-गोरखपुर हाईस्पीड कारिडोर से बदलेगी जिले की तस्वीर
गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे (प्रस्तावित) यह राज्य का सबसे लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है। करीब 740 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे 22 जिलों से गुजरेगा यह दिल्ली एनसीआर से नेपाल (सोनौली बॉर्डर) तक की यात्रा को आसान बनाएगा।
गूगल सोर्स चित्र
सिद्धार्थनगर : नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर के लिए प्रस्तावित शामली-गोरखपुर हाईस्पीड कारिडोर विकास की नई धुरी बनने जा रहा है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद सिद्धार्थनगर का सीधा और तेज संपर्क उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) तथा उत्तराखंड से स्थापित होगा। इससे जिले के व्यापार, कृषि, पर्यटन और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। जिले में इस परियोजना के लिए 89 गांवों में भूमि चिल्लीकरण और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम की धारा ३ए के तहत अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। खेतों में सीमांकन के लिए पत्थर लगाए जा रहे हैं। जिले में प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 62 किलोमीटर होगी। प्रथम चरण में में बांसी तहसील के 26 गांवों से 149.979 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जाएगी। इस चरण में किमी 659.300 से 676.390 तक सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। दूसरे चरण में किमी 614.020 से 659.425 तक हाईस्पीड कारिडोर बनाया जाएगा। इसके लिए 403.9636 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। दूसरे चरण में 89 गांवों में 3ए की कार्रवाई शुरू की जाएगी,जिसमे 553.94 हेक्टेयर ली जाएगी भूमि।
कारिडोर से कालानमक चावल को मिलेगा बड़ा बाजार,06 राज्यों से तेज होगा संपर्क,62 किमी एक्स्प्रेसवे जनपद सिद्धार्थनगर से होकर गुजरेगा,72 गांव इस परियोजना में शामिल होंगे , 553.9426 हेक्टेयर भूमि का होगा अधिग्रहण,90 मीटर होगी सामान्य सड़क की चौड़ाई, शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए दुफेड़िया में लगाया गया पिलर माकरण,110 मीटर होगा टोल प्लाजा के पास सड़क की चौड़ाई, शामली-गोरखपुर हाई स्पीड कारिडोर जिले के विकास की दृष्टि से अत्यंत रही है। किसानों महत्वपूर्ण परियोजना है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया नियमानुसार कराई जा है। किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद व्यापार, पर्यटन, कृषि और निवेश के क्षेत्र में सिद्धार्थनगर को व्यापक लाभ मिलेगा तथा जिले की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
प्रथम चरण में बांसी तहसील के 20, डुमरियागंज के 28 तथा इटवा तहसील के 15 गांवों की भूमि अधिग्रहण की जद में आएगी। इस प्रकार दोनों चरणों में जिले के 89 गांवों की कुल 553.9426 हेक्टेयर भूमि परियोजना
में शामिल होगी। हाईस्पीड कारिडोर सामान्य रूप से 90 मीटर चौड़ा होगा, जबकि टोल प्लाजा के आसपास इसकी चौड़ाई 110 मीटर रखी जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर भूमि अधिग्रहण की उए अधिसूचना के तहत कार्रवाई चल रही है।विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह प्रक्रिया अक्टूबर तक पूरी करने का लक्ष्य था, लेकिन खेतों में खरीफ की फसल बोने के कारण सीमांकन और अन्य औपचारिकताओं में कुछ विलंब होने की संभावना है।
इन मार्गों से जुड़ेगा गोरखपुर शामली हाई स्पीड कॉरिडोर: आगे चलकर गोरखपुर के माध्यम से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे तथा विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ जाएगा। इससे सिद्धार्थनगर से लखनऊ, मेरठ, दिल्ली-एनसीआर, शामली, गोपालगंज, पूर्णिया, किशनगंज और सिलीगुड़ी तक की यात्रा पहले की तुलना में काफी कम समय में पूरी की जा सकेगी। वर्तमान में कई स्थानों पर कस्बाई यातायात और जाम के कारण लगने वाला अतिरिक्त समय भी बचेगा। उत्तर प्रदेश में यह कारिडोर संतकबीरनगर, गोरखपुर, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और सीतापुर जैसे जिलों को जोड़ते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ेगा। पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच माल परिवहन का नया गलियारा तैयार होगा।
गोरखपुर शामली एक्सप्रेसवे बनने से अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई दिशा: यह कारिडोर केवल सड़क परियोजना तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला मार्ग भी माना जा रहा है। सिद्धार्थनगर का एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) कालानमक चावल इस मार्ग से बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंच सकेगा। वर्तमान में परिवहन में अधिक समय और लागत लगने से उत्पादकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। कारिडोर बनने के बाद कालानमक चावल की खेप शामली, मेरठ, दिल्ली एनसीआर, लखनऊ, गोरखपुर, बिहार के प्रमुख शहरों तथा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक कम समय और कम लागत में भेजी जा सकेगी। इसके अलावा जिले के किसान धान, गेहूं, सब्जियां और फल उत्पाद भी बड़ी मंडियों तक जल्दी पहुंचा सकेंगे। बेहतर सड़क संपर्क मिलने से वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, लाजिस्टिक पार्क, परिवहन में नि उद्योगों पर्यटन की दृष्टि से देखा जाए तो पिपरहवा अलीगढ़वा,लुंबिनी तक पर्यटक भगवान बुद्ध के दर्शन करने के लिए आयेंगे। सोर्स विज्ञप्ति।

