बेंगलुरु में पांच दिवसीय वर्ल्ड एथलेटिक्स कोर्स मेज़रमेंट वर्कशॉप का आयोजन
वर्कशॉप में देशभर से चुने गए 14 प्रतिभागी हुए शामिल!
भारत में बढ़ेगी रोड रेस की विश्वसनीयता
लखनऊ से खुर्शीद आलम की रिपोर्ट…
लखनऊ। एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल मैराथन एंड डिस्टेंस रेसेज (एआईएमएस) और वर्ल्ड एथलेटिक्स के सहयोग से 20 से 24 अप्रैल तक बेंगलुरु में पांच दिवसीय कोर्स मेज़रमेंट वर्कशॉप का आयोजन किया गया है। इसका उद्देश्य भारत में रोड रेस की दूरी मापने की तकनीकी विशेषज्ञता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मजबूत करना है। इस विशेष आमंत्रण-आधारित वर्कशॉप में देशभर से चुने गए 14 प्रतिभागी शामिल हैं। ये सभी विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त कोर्स मेज़रमेंट मानकों में गहन प्रशिक्षण ले रहे हैं।
इन प्रतिभागियों ने मिलकर लद्दाख से कोच्चि और अहमदाबाद से तवांग तक लगभग 90 रेस में भागीदारी की है, जिनमें कुल पांच लाख धावक शामिल हुए। कोर्स मेज़रमेंट डिस्टेंस रनिंग का अहम हिस्सा है। इससे रेस की दूरी सटीक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रहती है, जिससे रिकॉर्ड और एथलीटों के प्रदर्शन को वैश्विक मान्यता मिलती है।
वर्कशॉप में सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें साइकिल कैलिब्रेशन, ग्राउंड मेज़रमेंट, डेटा विश्लेषण और रिपोर्टिंग शामिल हैं। प्रमाण पत्र मूल्यांकन और वैध मेज़रमेंट रिपोर्ट के आधार पर दिए जाएंगे। वर्कशॉप का संचालन 1982 लंदन मैराथन विजेता और एआईएमएस के सचिव ह्यू जोन्स कर रहे हैं। ह्यू जोन्स लंदन ओलंपिक और टाटा मुंबई मैराथन जैसी प्रसिद्ध रेस के कोर्स मेज़र कर चुके हैं।
उन्होंने कहा, सटीक कोर्स मेज़रमेंट खेल की अखंडता के लिए बुनियादी है। भारत की रेस को अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना होगा ताकि भारत रोड रेस का पसंदीदा केंद्र बन सके।एआईएमएस-इण्डिया के बोर्ड सदस्य राजेश वेचा ने बताया, भारत में करीब 1100 टाइम्ड रेस होती हैं। रोड रनिंग सबसे तेज बढ़ता खेल है। ऐसे में कोर्स मेज़रमेंट विश्वसनीयता की नींव है। भारत में अभी केवल तीन सर्टिफाइड कोर्स मेज़रर हैं। इस वर्कशॉप से प्रशिक्षित मेज़ररों का नया समूह तैयार होगा, जिससे देशभर में रोड रेस की गुणवत्ता और वैश्विक पहचान मजबूत होगी।

