एडीएम न्यायिक द्वारा ग्राम सोनौरा में रूकी चकबन्दी प्रक्रिया को अग्रसर करने के लिए ग्रामीणों के साथ बैठक की गई
ग्रामीणों ने बैठक में बताया कि प्रथम चक्र की चकबंदी से हम समस्त ग्रामवासी संतुष्ट हैं
अपर जिलाधिकारी के अनुसार बैठक में नवीन चकबंदी को लेकर ग्रामीणों में आशंका की वजह से असहमति थी
अपर जिलाधिकारी न्यायिक उप संचालक चकबन्दी डॉ0 ज्ञान प्रकाश के द्वारा ग्राम सोनौरा तप्पा नादेपार परगना व तहसील नौगढ, जनपद सिद्धार्थनगर में रूकी चकबन्दी प्रक्रिया को अग्रसर करने का प्रयास किया गया
सिद्धार्थनगर। जनपद के ग्राम सोनौरा तप्पा नादेपार परगना व तहसील नौगढ़ में रुकी हुई चकबंदी प्रक्रिया को दोबारा शुरू कराने के लिए प्रशासन और ग्रामीणों के बीच एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक बैठक संपन्न हुई।
अपर जिलाधिकारी न्यायिक उप- संचालक चकबन्दी डॉ० ज्ञान प्रकाश की अध्यक्षता में ग्राम के प्राथमिक पाठशाला बैठक आयोजित किया गया। इस बैठक में चकबन्दी अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद यादव, सहायक चकबन्दी अधिकारी राजेश मिश्रा सहित ग्राम प्रधान श्रीमती रीता और चकबंदी समिति के सदस्य व भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
बैठक में ग्रामीणों ने अवगत कराया कि गांव में वर्तमान में चकरोड, सेक्टर मार्ग और आंगनबाड़ी केंद्र, प्राथमिक विद्यालय व पंचायत भवन जैसी सार्वजनिक संपत्तियां पर्याप्त मात्रा में सुचारू रूप से उपलब्ध हैं और वे प्रथम चक्र की चकबंदी से संतुष्ट हैं, जिसके कारण उनके मन में नवीन चकबंदी को लेकर कुछ आशंकाएं और विरोध था।
उप संचालक चकबन्दी डॉ० ज्ञान प्रकाश ने ग्रामीणों की शंकाओं का समाधान करते हुए स्पष्ट किया कि द्वितीय चक्र की चकबंदी में जमीनों से मात्र नाम मात्र की कटौतियां की जाएंगी, जिसका उपयोग केवल गांव की नई सार्वजनिक आवश्यकताओं और संशोधनों के लिए होगा। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि इस बार शासन द्वारा ड्रोन, रोवर और एआई (AI) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे जमीनों के नक्शे और रिकॉर्ड पूरी तरह त्रुटिरहित और डिजिटल बनेंगे। इस प्रक्रिया से पुरानी सीमाओं व रास्तों (चकरोड, नाली) का सटीक पुनर्निर्धारण होने से अवैध कब्जे हमेशा के लिए खत्म होंगे और खेतों का आकार बड़ा होने से किसानों की फसल पैदावार व आय में बढ़ोतरी होगी।
प्रशासन की इस समझाइश के बाद ग्रामीणों के बीच चकबंदी को लेकर उत्सुकता और आकर्षण तो बढ़ा है, लेकिन पुरानी व्यवस्था से संतुष्टि के कारण अभी उन्होंने एकमत होकर अंतिम सहमति व्यक्त नहीं की है। किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए अपर जिलाधिकारी न्यायिक ने ग्रामीणों को इस योजना के दूरगामी लाभों पर पुनः विचार करने का समय दिया है। साथ ही, उन्होंने मौके पर ही चकबंदी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे ग्राम में दोबारा बैठकें और चौपालें आयोजित करें, ताकि किसानों से निरंतर संवाद कर पूर्ण आम सहमति के साथ इस आधुनिक चकबंदी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।

