उ0प्र0,लखनऊ: 22 जून 2025
प्रदेश अध्यक्ष के0के0 पांडे ने वृक्षारोपण हेतु वॉलन्टियर कार्यक्रम की तरह साधन प्रदान करके क्रियान्वयन कराए जाने के लिए मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
लखनऊ: राष्ट्रीय पंचायती राज प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर पांडे ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ को पत्र लिखकर आग्रह पूर्वक निवेदन किया है कि वृक्षारोपण कार्यक्रम को वॉलन्टियर कार्यक्रम की तरह क्रियान्वयन करवाया जाए। प्रदेश अध्यक्ष ने आग्रह पूर्वक “सादर अनुरोध किया है कि सन् 1952 से लेकर आज तक कि सरकारें वृक्षरोपण अभियान चला रही है, नतीजन हमारे बीहड़-जंगल “विलायती बबूल (को-बकूल) से भर गये। देशी बवूल धरातल से गायब हो गये। वृक्षारोपण कार्यक्रम गिनीज बुक में लिख गया। लेकिन अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि उसमे से अधिकांश पौधों का धरती से अस्तित्व विहीन हो गया है। स्थित ज्यों की त्यों है प्रदेश सरकार के द्वारा वृहद पैमाने पर हर साल वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन होता है,लेकिन समस्या ज्यों की त्यों है। अब तक सरकार द्वारा जितने पौधों का पौधरोपण कराए गए हैं प्रदेश की अधिकांश धरती जंगल में परिवर्तित हो जाता।
आज जो वृक्ष दिखाई दे रहे है। वह सब लगभग कुछ वन विभाग द्वारा कुछ स्वेक्षा की भावना से लगाये गये थे। सन् 1985 के आस पास मै युवक मंगल दल का कार्यकर्ता था। मैने राज्य युवक समिति के प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर लम्बे समय तक कार्य किया। तब वॉलन्टियर भावना से वृक्षारोपण किया जाता था। वन विभाग अपना अलग वृक्षारोपण करता था। हमारे देश में विलायती-बबूल नहीं थे। मात्र देशी बवूल,रिमुँज आदि कांटेदार पेड़ थे। इसके आलावा देशी फलदार वृक्ष,आम,महुवा, इमली
खिरनी, शीशम, नीम,पीपल, बरगद,बेर आदि वृक्ष होते थे। विलायती बबूल आ गया यह कालान्तर में शोध का विषय वन गया है। नतीजा यह हुआ विलायती बबूल के काटों से गद्दीदार पंजों के जानवर मर गये,नील गाय (पाड़ा) की समस्या पैदा हो गयी। आपसे सादर निवेदन है, कि बृक्षारोपण आज उतना आवश्यक है जितना वायुमंडल में आक्सीजन जरूरी है। किंतु चकवन्दी से लेकर राज मार्गो हाइवे, एक्सप्रेसवे तथा अन्य निर्माण कार्यों में जितनी बड़े-बड़े वृक्षों की क्षति हुई है उसकी आंशिक क्षतिपूर्ति भी नहीं हुई है। बिडम्वना तो यह है, कि सरकारी अभियान के चलते प्रति वर्ष विना ट्री गाईस के, विना पानी के साधन के, विना देखभाल के, विना मृदा परीक्षण के, विना कम्पोस्ट खाद के, विना अच्छी किस्म के पौधों के तथा विना इच्छाशक्ति के वृक्षारोपण होता है। जिसके कारण स्थानीय स्तर पर एक-डेढ़ फुट ऊँचे पौधे लगाने के वाद या तो वह सूख जाते है या बकरी भैंस गाय आदि जानवर चर जाती है। नतीजा सिफर (शून्य) ही रहता है।
कृपया दुःख तो इस बात का है कि हमारे बाप-दादा-परदादा ने जो वृक्ष व बाग लगाये थे। हम उन्हें भी जीवित नहीं रख पाये। कहाँ गये वे 100-100 वीधे के आम जामुन, इमली, कैथा, महुआ आदि के बाग होते थे।हमें आज पूरी शिद्दत से वॉलन्टियर भावना से वृक्षारोपण अभियान चलाना होगा। प्रधान, युवक मंगल दल.नेहरू युवा केन्द्र, कालेज, N.C.C.सरकारी विभाग सभी वृक्षारोपण के महा अभियान में युद्ध स्तर पर लग जाये,नहरों, तालाब के किनारे भी वृक्षारोपण कराए जाएं,प्रत्येक घर इसमें सक्रिय सहयोग करे।
प्रदेश अध्यक्ष के0के0 पांडे ने कहा कि उदाहरण स्वरुप हम अपने घर में” बृक्षारोपण ” के नाम पर गुल्लक रखवा देते है साल भर उसमे यथाशक्ति पैसा डालते हैं वह गुल्लक 15 जुलाई को तोड़ी जाती है। जितना पैसा निकलता है। उसके पौधे खरीदकर उपर्युक्त पात्रों’ को दे दिये जाते हैं। यह कार्य उत्तर प्रदेश का प्रत्येक घर कर सकता है। सरकारी धन, C.S.R. निधि, सांसद, विधायक निधि, दान आदि के द्वारा वृक्षारोपण के उपरोक्त संसाधन जुटाये जा सकते है। बस आवश्यकता जन जागरण द्वारा प्रेरित करने की है।
प्रदेश अध्यक्ष के0के0 पांडे ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से सादर अनुरोध किया है कि बृक्षारोपण कार्यक्रम को वृहद रूप से प्रचुर मात्रा में प्रदान करने वाला कार्यक्रम बनाने की कृपा करे। कृपया कृत कार्यवाही से लिखित में पत्र द्वारा संगठन को भी अवगत कराने की कृपा करे।
भवदीय: कौशल किशोर पाडे प्रदेश अध्यक्ष ग्राम प्रधान संगठन उत्तर प्रदेश।

