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विकलांग गुड्डू ने अपने बुलंद हौसले व लगन के दम पर दिव्यांगता को दी मात

  • गोला/गोरखपुर-15-06-020

विकलांग गुड्डू ने अपने बुलंद हौसले व लगन के दम पर दिव्यांगता को दी मात

गोला/गोरखपुर पंख से कुछ नहीं होता,हौसले से उड़ान होती है,मंजिल उन्ही को मिलती है जिनके सपने में जान होती है…किसी शायर द्वारा कही गई ये पंक्तियाँ दिव्यांग गुड्डू पासवान पर सटीक बैठती है।दोनों पैरों से दिव्यांग इस युवक ने दिव्यांगता को कभी भी अपनी मज़बूरी न बनने दी और न ही किसी के सामने हाथ ही फैलाया। हौसले की बदौलत के दम पर वह अपना व परिवार का पेट पाल रहा है।
गोला ब्लॉक के ग्राम सभा परसा उर्फ अगलहवा का मूल निवासी गुड्डू पासवान उम्र 35 वर्ष पुत्र स्व. रामसेवक के पास दिव्यांगता सर्टिफिकेट नही है।और न तो सरकारी किसी योजना का लाभ ही मिलता है। इनके दोनो पैर पोलियो से ग्रस्त है।वर्ष 2008 में माँ की मृत्यु हो गई। बीते दो वर्ष पूर्व पिता भी साथ छोड़ कर चले गए ।गुड्डू बताते हैं कि पिता जी रेलवे में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी थे। तीन भाइयो में सबसे बड़े गुड्डू पासवान के सामने परिवार का भरण पोषण के लिए संकट उत्पन्न हो गया था।अत्यधिक समस्याओं के बावजूद उन्होंने हार नही मानी और पंजाब जाकर आटो ( टैम्पो) मैकेनिक का काम सिखना शुरू किया।वर्ष 2007 में वापस घर आ गए व चिलवां पुल के पास दूबौली स्थित एक व्यक्ति जो चाय बेचने का कार्य करता था उसी की पुत्री से आखे चार हो गई दोनो ने भाग कर कोर्ट मैरिज कर ली और कुछ वर्ष तक के लिए पत्नी को लेकर गुजरात चला गया। इसी बीच इनको एक पुत्री पैदा हूई। इन सब के बावजूद गुड्डू ने कभी हार नहीं मानी।वर्तमान में यह डड़वापार चौराहे पर एक आटो की दूकान पर आटो मेकैनिक का कार्य करता है। गरीबी रेखा के नीचे का राशन कार्ड पूर्व प्रधान स्व0 खालीक ने बनवा दिया था। इनके पास तीन भाइयों मे तीन बीघा जमीन है।वह भी उसर जमीन होने के कारण अनुपजाऊ ही है।दोनों भाई भी अब इनसे अलग रहते हैं। गुड्डू इस समय तीन बच्चों का बाप है। इनके तीनो बच्चे गांव के प्रा0 विद्यालय में पढ़ते हैं।गुड्डू पढ़े लिखे नही है।आज तक न तो इनका दिव्यांगता सर्टिफिकेट बन पाया है और न तो इनको कोई सरकारी लाभ ही मिल पाता है। वर्तमान कमाई का जरिया आटो बनाना ही है। जिससे परिवार को पालना अब चने चबाने जैसा है।गुड्डू बताते है कि भला हो पूर्व प्रधान का जो राशन कार्ड बनवा दिए जिससे परिवार को भोजन की व्यवस्था किसी तरह हो जाती है।

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