सीएम योगी ने कांग्रेस और सपा पर साधा निशाना,चाकू गलत हाथों में रहेगा तो डाका ही पड़ेगा
रामपुर के शाहबाद क्षेत्र में मंगलवार को जनसभा संबोधित करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
रामपुर,बरेलीः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को रामपुर और बरेली में जनसभाओं को संबोधित करते हुए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। रामपुर से लेकर बरेली में पंडित राधेश्याम कथावाचक की प्रतिमा अनावरण तक, मुख्यमंत्री पूरी तरह चुनावी और सांस्कृतिक तेवर में नजर आए। एक तरफ जहां उन्होंने रामपुर के प्रसिद्ध चाकू का उदाहरण देकर पिछली सरकारों की कानून-व्यवस्था पर तंज कसा, वहीं दूसरी तरफ बरेली में ‘सियावर रामचंद्र की जय’ के उद्घोष के साथ सनातन धर्म को भारत की आत्मा बताया।
रामपुर के शाहबाद क्षेत्र में मंगलवार को जनसभा संबोधित करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: आसमान में छाए बादलों के बीच रामपुर पहुंचे मुख्यमंत्री ने मौसम के मिजाज को देखकर चुटकी लेते हुए कहा, “जब रामपुर आता हूं तो यहां का मौसम शिमला जैसा हो जाता है।” सीएम ने रामपुरी चाकू का संदर्भ देकर कहा कि चाकू गलत हाथों में रहेगा तो डाका ही पड़ेगा। अब भाजपा की डबल इंजन सरकार में यही चाकू जनता की सुरक्षा के काम आ रहा है। उन्होंने 690 करोड़ की 102 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास भी किया।
सीएम योगी ने कहा कि पहले कोई सरकारी भर्ती का विज्ञापन निकलता था तो चाचा भतीजे की जोड़ी लूटने निकल पड़ती थी। इतनी धांधली होती थी कि न्यायालय को उसपर रोक लगानी पड़ती थी। आजम खां को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि पहले या सैफई परिवार का विकास होता था या फिर रामपुर के एक परिवार का। अब पूरे प्रदेश में बिना किसी भेदभाव विकास की बयार है।
रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाले कर रहे रामभक्ति की बात: सीएम योगी ने कांग्रेस-सपा पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग पहले भगवान राम और कृष्ण के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे, वे आज रामलला के दर्शन के लिए होड़ कर रहे हैं। रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाले भी आज लोकतंत्र की ताकत के आगे रामभक्ति की बात करने को मजबूर हैं। मुख्यमंत्री ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का ऐलान करते हुए कहा कि नया ‘गोरखपुर-शामली कारिडोर’ रामपुर से होकर गुजरेगा, जो पूर्वी यूपी को पश्चिमी यूपी और पानीपत से जोड़ेगा।
पंडित राधेश्याम की प्रतिमा का अनावरण बरेली में पंडित राधेश्याम कथावाचक की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद मुख्यमंत्री राममय नजर आए। उन्होंने श्रीराम की महिमा बताई कि जटायु हों या हनुमानजी…, जिसने भी भक्ति की, उसका उद्धार हो गया। जिसने बैर लिया, उसकी दुर्गति तय है। त्रेता युग में रावण इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। श्रीराम हर भारतीय के रोम-रोम में बसे हैं। सोते-जागते, दुख-सुख, सम-विषम में सिर्फ श्रीराम का ही नाम प्रकट होता है, जो भारतीयों के संस्कार का हिस्सा है। सनातन धर्म के बिना भारत की कल्पना भी नहीं की जा सकती।पंडित राधेश्याम कथावाचक का जन्म 25 नवंबर 1890 को बिहारीपुर मुहल्ले में पंडित बांकेलाल शर्मा के घर में हुआ था। उन्होंने 17 वर्ष की आयु में खड़ी बोली और लोकनाट्य शैली में रामायण लिखी, जिसे 25 खंडों में पद्यबद्ध किया। उनके जीवनकाल में 1.75 करोड़ प्रतियां विक्रय हुईं थीं। कई अन्य नाटक एवं पुस्तकें भी लिखीं। वर्ष 1963 में उनका निधन हो गया।

