दिनांक: 12 मार्च 2026
लोकसभा में द्वितीय अनुपूरक अनुदान मांगों पर सांसद जगदम्बिका पाल का वक्तव्य
सांसद पाल ने आर्थिक स्थिरता,किसान सुरक्षा और गरीब कल्याण पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई
नई दिल्ली: लोकसभा में वर्ष 2025-26 के द्वितीय बैच की Supplementary Demands for Grants पर चर्चा के दौरान सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि यह प्रस्ताव सरकार की दूरदर्शी आर्थिक नीति और संकट प्रबंधन क्षमता का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने बताया कि इस द्वितीय अनुपूरक अनुदान का कुल आकार ₹2.81 लाख करोड़ है, जिसमें लगभग ₹2 लाख करोड़ का शुद्ध नकद व्यय शामिल है, जबकि शेष राशि मंत्रालयों की बचत और बढ़ी हुई प्राप्तियों से पूरी की जाएगी।
सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि पश्चिम एशिया में ईरान-इज़राइल संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतों में $65-70 प्रति बैरल से बढ़कर $88-119 प्रति बैरल तक अस्थिरता आई, जिससे उर्वरक गैस, खाद्यान्न परिवहन और निर्यात पर दबाव पड़ा। ऐसी स्थिति में सरकार ने ₹1 लाख करोड़ के Economic Stabilisation Fund के माध्यम से भविष्य के भू-राजनीतिक झटकों से अर्थव्यवस्था को सुरक्षित करने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
पाल ने कहा कि 2014 से पहले भारत की अर्थव्यवस्था को अक्सर “fragile” कहा जाता था, जबकि आज भारत की नॉमिनल जीडीपी लगभग तीन गुना बढ़कर ₹357 लाख करोड़ हो चुकी है और विदेशी मुद्रा भंडार $686 अरब तक पहुँच गया है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक स्थिरता और नीति-निर्णय की स्पष्ट दिशा का परिणाम बताया।
कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए सांसद ने कहा कि उर्वरक सब्सिडी को बढ़ाकर ₹1.86 लाख करोड़ किया गया है ताकि 14 करोड़ किसानों को महँगे इनपुट के प्रभाव से बचाया जा सके। साथ ही ₹19,230 करोड़ की अतिरिक्त राशि Nutrient Based Subsidy और Urea Subsidy योजनाओं के माध्यम से किसानों को राहत देने के लिए दी जा रही है।
सांसद पाल ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि आज 81 करोड़ लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम मुफ्त अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत हुई है,उन्होंने कहा कि ₹38,585 करोड़ का राज्यों को हस्तांतरण सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करता है और पंचायतों, शहरी निकायों, स्वास्थ्य सेवाओं तथा आपदा प्रबंधन क्षमता को सुदृढ़ बनाता है।
अपने वक्तव्य के अंत में सांसद पाल ने कहा कि यह अनुपूरक अनुदान केवल वित्तीय प्रावधान नहीं है, बल्कि “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की ओर बढ़ते भारत की आर्थिक स्थिरता, किसान सशक्तिकरण और गरीब कल्याण की नीति का स्पष्ट संकेत है।

