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75 वर्ष के वरिष्ठ सांसद जगदंबिका पाल

75 वर्ष के वरिष्ठ सांसद जगदंबिका पाल

सिद्धार्थनगर:75 वर्ष के वरिष्ठ सांसद जगदंबिका पाल अपने राजनीतिक कैरियर: पूर्वांचल के एक छोटे से गांव से निकलकर संसद की दहलीज़ तक पहुँचने वाले जगदम्बिका पाल भारतीय राजनीति के उन नायकों में से हैं जो अपने व्यक्तित्व की सादगी, संवाद की संस्कृति और जनता के प्रति अथाह समर्पण के लिए जाने जाते हैं! 75 वर्ष की उम्र में भी उनकी सामाजिक सक्रियता, संसद में उपस्थिति और चुनाव क्षेत्र का समग्र विकास यह दिखाता है कि राजनीति उनके लिए पेशा नहीं बल्कि जनसेवा का माध्यम है।

जगदम्बिका पाल सफर में हों या घर पर, मदद के लिए आने वालों लोगों को कभी निराश नहीं करते, उनकी प्राथमिकता होती है कि जैसे भी हो जरूरतमंद की मदद हो जाए,वंचित,शोषित, पीड़ित को उसका अधिकार मिल जाए, बीमार का उपचार हो जाए,और समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति की समस्या का समाधान हो जाए। किसी मरीज के लिए डॉक्टरों से समय लेना हो, किसी प्रताड़ित के लिए थाना कचहरी के मामलात सुलझाने हों,किसी गरीब व्यक्ति को प्रशासनिक योजनाओं का लाभ दिलवाना हो, सांसद जगदंबिका पाल कभी पीछे नहीं रहते! जाड़े की ठंडी रातों में अपनी गाड़ी में भरकर कंबल बांटना हो, तीज त्योहारों पर महिलाओं को साड़ी या उपहार देना हो, नौजवानों के प्रोत्साहन के लिए खेल-कूद की प्रतियोगिताओं का आयोजन करवाना हो! गरीबों के लिए राशन की उपलब्धता, स्कूलों में प्रवेश, मौसम को मार से फसल की बांदी हो या फिर कोई भी प्राकृतिक आपदा हो! वह जाति, धर्म और वर्ग भेदभाव किए पीड़ित की मदद जरूर करते हैं।

सांसद जगदंबिका पाल कहते हैं जब समाज में कोई दुखी है तो मेरा हृदय द्रवित हो जाता है! ऐसे में उसकी समस्याएँ कैसे न सुनें, उसका समाधान कैसे न करें, ऐसे में मुझे मुझे नींद नहीं आती। यही कारण है कि एक-दो बजे रात तक क्षेत्र में चलता रहता हूं,जब तक कि उनकी आँखें न बंद होने लगे, जनता से मिलना, उनकी समस्याएं सुनना और अगले ही रोज सुबह पांच बजे उठ जाना उनकी प्रतिदिन के दिनचर्या का हिस्सा है! 1982 में उत्तर प्रदेश विधान परिषद से राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले जगदंबिकापाल तीन बार विधायक और चार बार सांसद हैं।

जगदबिका पाल ने वक्फ (संशोधन) विधेयक की संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष के रूप में अपनी नेतृत्व क्षमता का उदाहरण प्रस्तुत किया। इसके अलावा ऊर्जा, आवास और शहरी मामलों तथा सार्वजनिक उपक्रम की स्थाई समितियों के अध्यक्ष अथवा सदस्य के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई। संसदीय समितियों की बैठकों के लिए उनकी तैयारी बेहद खास होती है। इस चीच वह उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे,उन्होंने हमेशा संवैधानिक मर्यादाओं को सम्मान और समर्पण दिया।

जब 21 फरवरी 1998 की रात में जगदम्बिका पाल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली,तब पूरे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सियासी हलचल अपने चरम पर थी और जगदम्बिका पाल के प्रयास से उनको समर्थन भी मिल रहा था। लेकिन अगले ही दिन जब अदालत के आदेश आने के बाद! वह मुस्कुराते हुए राजभवन पहुँचे और बिना किसी कटुता के पद त्याग दिया। उन्होंने कहा था यह राजनीति है, यहाँ पद से नहीं, सेवा से पहचान चनती है। यही उनकी राजनीति का असली चेहरा है गरिमा, संयम और लोकतांत्रिक मर्यादा से परिपूर्ण।

सांसद जगदंबिका पाल की पहचान सिर्फ एक अनुभवी राजनेता के रूप में नहीं है,वह ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में है जो अपने मतदाताओं से आत्मीय रिश्ता रखते हैं। स्थानीय उत्सवों, शादी-विवाह और दुःख-सुख में उनके साथ शामिल होते हैं। सिद्धार्थनगर और बस्ती की गलियों में उनका नाम सिर्फ सांसद नहीं बल्कि अभिभावक’ के तौर पर लिया जाता है। उनको सरलता, विनम्रता और संवाद की शालीनता उन्हें विरोधी दलों के बीच से आदर दिलाती है। संसद में लगभग 100 उपस्थिति और 1046 से अधिक प्रश्न वर्ष 2009-2025 तक पूछे जाने का रिकॉर्ड उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। सांसद जगदंबिका पाल कभी बिना तैयारी के संसद नहीं जाते और देर रात तक अपने सहयोगियों के साथ भाषण तैयार करते हैं। राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव से लेकर सभी विधेयकों की चर्चाओं में भाग लेना और प्रश्न पूछना, जिसमें देश के सीमाओं की रक्षा, वित्तीय और बैंकिंग सुधार, हिमालयी राज्यों का विकास, एआई के सदुपयोग, महिलाओं की सुरक्षा, आशा बहुओं और संविदा शिक्षकों का मानदेय बढ़ाने की मांग, बाढ़-आपदा के प्रबंधन, गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान, रेल, सड़क और विमानन संबंधित मुद्दे शामिल हैं। सांसद पाल वर्तमान सत्र 2024 से स्पीकर पैनल के सदस्य है और समय समय पर लोकसभा का संचालन एवं अध्यक्षता भी करते हैं।

उन्होंने वक्फ (संशोधन) विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष के रूप में अपनी नेतृत्व क्षमता का उदाहरण प्रस्तुत किया। इसके अलावा उर्जा, आवास और शहरी मामलों तथा सार्वजनिक उपक्रम की स्थाई समितियों के अध्यक्ष अथवा सदस्य के रूप में अपनी दक्षता को साबित किया! संसदीय समितियों की बैठकों के लिए उनकी तैयारी बेहद खास होती है। वे इस संबंध में अक्सर कहते हैं कि अगर में किसी संसदीय समिति का अध्यक्ष या सदस्य हूं!अगर उस विभाग का प्रशासक कोई आईएएस अधिकारी है तो जाहिर है उसके पास ज्यादा जानकारी होगी,तो हमारी तैयारी उससे भी अधिक होनी चाहिए तब मैं उससे कोई सवाल कर सकूँगा।

जनपद सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज संसदीय क्षेत्र का विकास में शिक्षा,सड़क,स्वास्थ्य और सिंचाई योजनाओं को आगे बढ़ाने में उनका उल्लेखनीय योगदान है,उनके विकास कार्यों में माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज, पीएमश्री केंद्रीय विद्यालय,नर्सिंग इंस्टिट्यूट,पासपोर्ट ऑफिस जनरल पोस्ट ऑफिस,बस्ती से ककरहवा एनएच 28 जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल है। इस दौरान 5 हज़ार करोड़ की लागत से बहुप्रतीक्षित 240 किमी खलीलाबाद-बहराइच रेल लाइन, 1000 करोड़ की लागत से गोरखपुर-गोडा मीटर गेज से बॉड गेज और नेपाल बॉर्डर से वाराणसी तक बुद्धिस्ट सर्किट नेशनल हाईवे 233 और 730 का निर्माण कार्य शामिल हैं। साथ ही गांव-गांव तक बिजली, हर घर-घर तक पानी पीने का नल। इसके अतिरिक्त बाढ़ पीड़ितों को राहत, किसानों के मुआवजे और ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण में उन्होंने निरंतर काम किया है।

सांसद जगदंबिका पाल ने अपने लंबे राजनीतिक सफर में के दौरान कठिन परिस्थितियों में भी! कर्तृतव्य पथ से कभी डगमगाये नहीं,75 वर्ष की उम्र में भी उनका जोश, ईमानदारी और कर्मठता साबित करने के लिए काफी है! राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का माध्यम भी हो सकती है! वे पूर्वाचल ही नहीं, पूरे देश की राजनीति में संतुलन,संयम और सेवा के प्रतीक हैं। सांसद पाल के जन्मदिन पर ईश्वर से उनकी लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की मंगल कामना करते हैं।

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