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750 किमी लंबे गोरखपुर-शामली हाईस्पीड कॉरिडोर एक्सप्रेसवे के लिए थ्रीडी सर्वे शुरू

750 किमी लंबे गोरखपुर-शामली हाईस्पीड कॉरिडोर एक्सप्रेसवे के लिए थ्रीडी सर्वे शुरू

बांसी,इटवा व डुमरियागंज तहसील के 88 गांवों से होकर गुजरेगा यह एक्सप्रेसवे! बिजली टावर, पोल, मकान व खेत किए जा रहे चिह्नित

सिद्धार्थनगर। शामली-गोरखपुर हाईस्पीड कॉरिडोर (एक्सप्रेसवे) परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत थ्रीडी सर्वे शुरू हो गया है। इसके तहत यह तय होना है कि किस गाटे में कितना रकबा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए शामिल किया जाएगा।एनएचएआई और राजस्व टीम द्वारा किए जा सर्वे प्रक्रिया में बिजली टॉवर, पोल, भवन का अंश, पेड़ व खाली स्थान भी चिह्नित किए जा रहे है। इन्हें एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए चिह्नित करने के बाद हटाने और ध्वस्त किए जाने की प्रक्रिया शुरू होगी। सर्वे के बाद एक्सप्रेसवे में शामिल हो रहे क्षेत्र का प्रकाशन कर आपत्ति मांगी जाएगी। उसके निस्तारण के बाद किसानों से भूमि अधिग्रहीत की जाएगी।

750 किमी लंबे शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे का 45.164 किमी हिस्सा शहर से होकर गुजरेगा। इसके लिए बांसी, डुमरियागंज और इटवा तहसीलों के 88 गांवों में दो हजार किसानों की करीब 541 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के लिए चिह्नित की गई है। प्राथमिक सर्वे के अनुसार एलाइनमेंट तय कर लिया गया है,इसमें एनएचएआई कार्यालय अयोध्या में बांसी तहसील के 19, डुमरियागंज 28 और इटवा के 15 गांव शामिल है। जबकि एनएचएआई गोरखपुर से बांसी तहसील के 26 गांव शामिल हैं। भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना में अधिग्रहीत किए जाने वाले गाटों की संख्या और रकबा भी शामिल है।वहीं इससे पहले एडीएम ने तीनों तहसीलों में पत्र भेजकर संबंधित गांवों के आवागमन के साथ ही बढ़ेगी व्यावसायिक गतिविधि को बढ़ावा मिलेगा।

एनएचएआई ने बांसी तहसील के 45, इटवा के 15 व डुमरियागंज तहसील के 28 गांवों में 70 मीटर चौड़ाई में भूमि का चिह्नांकन किया है। प्राथमिक सर्वे कर इन गांवों के खेतों में झंडी लगाई गई थी। झंडी वाले स्थल से दोनों तरफ 35-35 मीटर भूमि एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहीत की जानी है। एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए चिह्नित भूमि में कृषि योग्य भूमि, चकमार्ग, खलिहान, नहर, नाली, सड़क, कब्रिस्तान, तालाब, होलिका दहन स्थल, भीटा आदि भूमि शामिल है। इनमें निजी व कृषि समेत मकान और बाग आदि के अधिग्रहण के लिए भू-स्वामी को नियमानुसार मुआवजा वितरण किया जाएगा।इसमें भूमि विक्री, निर्माण, भू-उपयोग परिवर्तन नहीं करने के निर्देश दिए हैं। एनएचएआई अयोध्या के साइट इंजीनियर जितेंद्र कुमार ने बताया कि सर्वे के तहत एक्सप्रेसवे में पड़ रहे बिजली टॉवर पोल, मकान के अंश, पेड़, खेत आदि का चिह्नांकन किया जा रहा है।

एडीएम गौरव श्रीवास्तव ने बताया कि संयुक्त टीम द्वारा भूमि का श्रीडी सर्वे किया जा रहा है, इसके बाद संबंधित किसानों से आपत्ति मांगी जाएगी। एक्सप्रेसवे के लिए बांसी तहसील के कोल्हुआ, तुगलकपुर, अमघटी, कोल्हुई बुजुर्ग, भैंसठ, बिमौआ खुर्द, खदरा, सिंगिया, जाल्हेखोर, मिठवल बुजुर्ग में सर्वे किया जा रहा है। वहीं, डुमरियागंज तहसील के महतिनिया बुजुर्ग, अकोलिहा, खम्हरिया, पिपरा कानूनगो, पुरैना और इटवा तहसील के बहादुरपुर आदि गांव में सर्वे किया जाना है। जिले में एक्सप्रेसवे के निर्माण से आवागमन के साथ यहां उद्योग लगाने व निर्यात में सहूलियत होगी। वहीं एक्सप्रेसवे किनारे की भूमि की कीमत और उपयोगिता भी बढ़ जाएगी, जिससे परिवहन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही जिले में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के बनने से बेहतर होगी कनेक्टिविटी:सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से कुशीनगर में जुड़ेगा, जिससे जिले के लोगों का पूर्वोत्तर भारत तक आवागमन सुगम हो जाएगा। वहीं, शामली तक पहुंच होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली व हरियाणा के कई जिलों के साथ जुड़ जाएगा। एक्सप्रेसवे यूपी के 21 जिलों कुशीनगर, गोरखपुर, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखनऊ, सीतापुर, हरदोई,शाहजहांपुर, बदायूं, रामपुर, बरेली, संभल, अमरोहा, मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली से गुजरेगा।गोरखपुर शामली एक्सप्रेसवे से क्षेत्र के विकास की दिशा बदल सकता है। इससे आवागमन तेज होगा, निवेश बढ़ेगा और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।किसान की भूमि के गाटे के हिस्से का चिह्नांकन किया जा रहा।

शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के बारे में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने बताया कि एक्सप्रेसवे संपर्क मार्ग बन जाने से जिले में व्यापार को नई गति मिलेगी। माल ढुलाई आसान और सस्ती होगी,जिससे स्थानीय कारोबारियों को लाभ मिलेगा,उन्होंने बताया कि किसानों को समय पर उचित मुआवजा मिलना भी उतना ही जरूरी है।सर्वे और चिह्नांकन के बाद किसानों को मुआवजा वितरण करने के बाद भूमि अधिग्रहण कर एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य शुरू होगा। इसके निर्माण से जिले के लोगों को प्रदेश व देश के अन्य स्थानों तक आवागमन की बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।

स्रोत-विज्ञप्ति।

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