एफडीआर तकनीक से बन रही सड़कों में निर्धारित मानकों के अनुसार ही सामग्रियों का प्रयोग किया जाये -सचिव शैलेश कुमार सिंह, ग्रामीण विकास मंत्रालय
एफडीआर तकनीक के माध्यम से रू0 6000 करोड़ की लागत से होगा सड़क निर्माण–सचिव ग्रामीण विकास मंत्रालय
समाज को पूर्ण रूप से विकसित करने के लिए सड़कों का होना जरुरी–सचिव ग्रामीण विकास मंत्रालय
एफडीआर तकनीक पर्यावरण प्रदूषण एवं कार्बन फुड प्रिंट को कम करने में सहायक है–सचिव ग्रामीण विकास मंत्रालय
दिनाँक-13 जनवरी, 2023
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव शैलेश कुमार सिंह व उप महानिदेशक गया प्रसाद तथा आशीष श्रीवास्तव संयुक्त निदेशक द्वारा शुक्रवार को जनपद सीतापुर, ब्लॉक-पहला में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत नयी तकनीक एफ0डी0आर0 ( Full Depth Reclamation ) के तहत निर्मित हो रही सड़क टी-01 बिस्वां सरैया, महमूदाबाद चांदपुर रोड का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान सचिव शैलेश सिंह ने बताया की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में ग्रामीण सड़कों को पहली बार नयी तकनीक (एफ0डी0आर0) के माध्यम से 6000.00 करोड़ की धनराशि से 5400.00 किमी0 का निर्माण कराया जा रहा है। इस तकनीक से कम लागत में सड़कों का निर्माण हो रहा है तथा सड़के मजबूत होने के साथ ही पर्यावरण के अनुकूल होंगी l उन्होंने कहा कि समाज को पूर्ण रूप से विकसित करने के लिए सड़कों का होना जरुरी है l पीएमजीएसवाई के माध्यम से पूरे देश में तेजी से सड़कें बनाई जा रही हैं।
उन्होंने निरीक्षण के दौरान अभियंताओं को निर्धारित मानकों के अनुसार पूरी पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ सड़क बनाने का निर्देश दिया। सचिव शैलेश सिंह अपने सामने सड़क के कुछ भाग के निर्माण कार्य की प्रक्रिया को देखा तथा एफडीआर तकनीक की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने मार्ग की गुणवत्ता परखने के लिए कोर क़टर मशीन द्वारा कोर निकलवाया तथा प्रयुक्त हो रहे सामग्रियों की जाँच कराकर गुणवत्ता परखे,उन्होंने निर्माण कार्य की सराहना करते हुए मजबूत सड़क बनाने हेतु निर्धारित एसओपी के अनुसार ही सीमेंट व एडिटिव को निर्धारित मात्रा में मिलाते हुए सड़क का निर्माण करने का निर्देश दिया l उन्होंने कहा कि समय-समय पर होने वाले परीक्षणों पर विशेष ध्यान रखा जाये । उन्होंने अभियंताओं को अपनी उपस्थिति में ही समस्त परीक्षण कराने के निर्देश दिया।
उन्होंने अभियन्ताओं तथा फर्म के प्रोजेक्ट मैनेजरों को निर्मित हो रहे मार्गों पर नियमानुसार सैम्पल एकत्रित कर परीक्षण करने के निर्देश दिये, सचिव शैलेश सिंह एफडीआर तकनीक से निर्मित सड़कों के लिए प्रयोग की जाने वाली विशिष्ट मशीनों रिसाइकिलर, आटोमेटिक सीमेंट स्प्रेडर, 20 टन पैट फुट रोलर, टैण्डम रोलर, मोटर ग्रेडर एवं पीटीआर रोलर से अपने समक्ष कार्य कराकर मशीनों की क्षमता को परखे ।
मुख्य अभियंता ने बताया कि नयी तकनीक पर आधारित मार्गों के निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित किये जाने हेतु एक पीएमयू का गठन किया गया है। मार्गो के निर्माण में गुणवत्ता की साइट पर ही जॉच किये जाने हेतु सुसज्जित लैब स्थापित हैं। इस तकनीक से मार्गों के निर्माण में बहुत कम समय लगता है। यहां तक की व्यस्थानुसार दो दिन में एक किमी0 सड़क का निर्माण किया जा सकता है।
एफ0डी0आर0 तकनीक से निर्माण कराने पर अत्यधिक गिट्टी की बचत होगी तथा पर्यावरण प्रदूषण एवं कार्बन फुट प्रिंट में कमी आएगी,उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में नयी तकनीक के माध्यम से रू0 6000.00 करोड़ की लागत से 5400 किमी0 सड़क का निर्माण होगा । इस तकनीक के निर्माण में नये पत्थर की गिट्टी का प्रयोग नहीं किया जाता है। सड़क पर मौजूद पूरानी गिट्टी को सीमेंट एवं एडिटिव तथा मिट्टी से बड़़ी मशीनों के द्वारा मिलाकर निर्माण किया जाता है। उत्तर प्रदेश में पी0एम0जी0एस0वाई0 में नयी तकनीक से सड़के बनाये जाने की स्थिति को देखते हुए अन्य प्रदेशों में भी इस तकनीक को लागू किया जा रहा है।
निरीक्षण के दौरान आयुक्त ग्राम्य विकास जीएस प्रियदर्शी के साथ यूपीआरआरडीए के मुख्य अभियंता राज कुमार चौधरी, निदेशक ग्रामीण अभियंत्रण विभाग सहित अन्य अधिकारी व अभियंतागण उपस्थित थे।
(डॉ0 मनोज कुमार)
सूचनाधिकारी, ग्राम्य विकास

