सिद्धार्थनगर 11 फरवरी 2026
मझौली सागर के विकसित होने से जैविक विविधता संरक्षण, जल संरक्षण व इकोट्यूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा- जिलाधिकारी
जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी एन द्वारा सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति महोदया प्रो० कविता शाह के सुझाव पर मझौली सागर को रामसर साइट के रूप में विकसित करने के लिए प्रभागीय वन अधिकरी, अधिशासी अभियन्ता ड्रेनेज खण्ड सिंचाई विभाग, पर्यटन विभाग, तहसीलदार नौगढ़, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष (डा० आशुतोष कुमार वर्मा) के साथ मझौली सागर का निरीक्षण किया गया। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष द्वारा अवगत कराया गया कि प्रारम्भिक अध्ययन इस परियोजना के लिए पूर्ण कर लिया गया है, जिसमें 143 वनस्पति प्रजातियां और 30 पक्षी प्रजातियों को सूचीबद्ध किया गया है। अध्ययन में यह भी बताया गया कि मझौली सागर को रामसर साइट कटेगरी बी के तहत सूचीबद्ध किया जा सकता है, जिस हेतु और अब गहन अध्ययन की आवश्यकता है। इस संदर्भ में जिलाधिकारी द्वारा संबन्धित विभाग को आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया। मझौली सागर के निरीक्षण के दौरान अधिशासी अभियन्ता ड्रेनेज खण्ड द्वारा अवगत कराया गया कि सागर की संचयन क्षमता बढ़ाये जाने हेतु डि-सिल्टिंग की परियोजना बनाई जा रही है।
मझौली सागर के रामसर साइट में सूचीबद्ध होने से जैविक विविधता संरक्षण, जल संरक्षण व इकोट्यूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही साथ गौतमबुद्ध की कीड़ा स्थली को अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर नई पहचान मिलेगी। जल संरक्षण होने से सिंचाई की सुविधा होगी। गौतम बुद्ध की कीड़ा स्थली अलीगढ़वा को चार चांद लगेगा। भारत नेपाल सीमा पर स्थित होने के कारण दोनों देशों को पर्यटकों के आवगमन में वृद्धि होगी।

