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बच्चों की सुरक्षा पर काम कर रहे संवाद सामाजिक संस्थान ने उत्तरप्रदेश के सभी जिले से “जबरन श्रम” बाल ट्रैफिकिंग खत्म करने का लिया संकल्प

बच्चों की सुरक्षा पर काम कर रहे संवाद सामाजिक संस्थान ने उत्तरप्रदेश के सभी जिले से “जबरन श्रम” बाल ट्रैफिकिंग खत्म करने का लिया संकल्प

विश्व मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस पर कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में शुक्रवार को नेशनल कैंपेन अगेंस्ट चाइल्ड ट्रैफिकिंग की शुरुआत की गई

लखनऊ। विश्व मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस पर नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में शुक्रवार को नेशनल कैंपेन अगेंस्ट चाइल्ड ट्रैफिकिंग की शुरुआत की गई। यह अभियान 2030 तक चलाया जाएगा। बाल अधिकारों के लिए कार्यरत 250 से अधिक संगठनों के नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के चार दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श इंश्योरिंग ए चाइल्ड राइट्स, पोटेंशियल एंड प्रास्पेरिटी में यह निर्णय लिया गया,परामर्श में देशभर के 782 जिलों से प्रतिनिधि शामिल हुए।

उत्तर प्रदेश में बच्चों की सुरक्षा पर काम कर रहे संवाद सामाजिक संस्थान ने अभियान के तहत जिले से जबरन श्रम किसी व्यक्ति को श्रम या सेवाओं के लिए भर्ती करना, आश्रय देना, परिवहन करना, उपलब्ध कराना या प्राप्त करना है, बल, धोखाधड़ी या दबाव के उपयोग के माध्यम से, अनैच्छिक दासता, बंधुआ मजदूरी, ऋण बंधन या गुलामी के अधीन करने के उद्देश्य से बाल ट्रैफिकिंग पूरी तरह रोकने का संकल्प लिया। संस्थान ने कहा कि सरकार, प्रशासन और आम नागरिकों के सहयोग से जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। ट्रैफिकरों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही हाशिये के परिवारों को चिन्हित कर उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि बच्चे पढ़ाई जारी रख सकें और ट्रैफिकिंग गिरोहों के चंगुल में न फंसें।

कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि किसी भी बच्चे की जिंदगी बचाना सबसे नेक काम है। ट्रैफिकिंग से मुक्त कराने वाले स्वयंसेवी किसी फरिश्ते से कम नहीं होते। संवाद सामाजिक संस्थान के निदेशक अतुल तिवारी ने चिंता जताते हुए कहा कि देश में रोजाना औसतन 6 बच्चों की ट्रैफिकिंग होती है और हर घंटे 11 बच्चे गुम हो जाते हैं। इनमें से अधिकांश ट्रैफिकिंग के शिकार बनते हैं। हथियारों और ड्रग्स के बाद ह्यूमन ट्रैफिकिंग दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध है। उन्होंने बताया कि जेआरसी के सहयोगी संगठनों के प्रयासों से अप्रैल 2023 से दिसंबर 2025 के बीच देशभर में 1,22,516 बच्चों को ट्रैफिकिंग से बचाया जा चुका है। इस दौरान संवाद सामाजिक संस्थान ने कहा कि आगे का फोकस ट्रैफिकिंग की रोकथाम, बच्चों का सुरक्षित बचाव और पुनर्वास पर रहेगा, ताकि वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक जीवन जी सकें।

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