किसानों का जीवन संवार रही मचान विधि की पारंपरिक खेती- विमलकांत जिला उद्यान अधिकारी
जनपद के कई किसान लौकी, तोरई, करेला,खीरा,सेम जैसी बेल वाली हल्की सब्जियों का रहे हैं उत्पादन! लोटन क्षेत्र के किसान करते हैं सीजन के हिसाब से खेती- विमलकांत जिला उद्यान अधिकारी
सिद्धार्थनगर। जनपद के सब्जी उत्पादन किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ मचान विधि को अपनाकार उत्पादन और आय दोनों बढ़ा रहे हैं। उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में जनपद के कई किसानों ने लौकी, तोरई, करेला, खीरा, सेम और अन्य बेल वाली सब्जियों की खेती मचान पर शुरु की है। इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ उत्पादन में भी वृद्धि देखेने को मिल रही है।
किसानों के लिए मचान विधि फायदेमंद साबित हुई है। इसे सहारा पद्धति या बेलदार सब्जियों की खेती भी कहा जाता है। इसके लिए खेत में मजबूत खम्भों और तारों अथवा बांस के सहारे जाल तैयार किया जाता है। बेल वाली फसलें जमीन पर फैलने के बजाय ऊपर बढ़ती है। इससे पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, रोगों को प्रकोप कम होता है और सब्जियां दाग धब्बे रहित एवं गुणवत्ता युक्त होती है।कई सालों से इस विधि को अपना रहे जनपद के किसान सच्चिदानन्द, श्रीमती निर्मला, ज्ञानदास व गोवर्धन ने बताया कि इस तकनीक से खेत का बेहतर उपयोग होता है और फसल की देखभाल, सिचाई और तुडाई भी आसान हो जाती है। जमीन पर फल न लगने से उनके सड़ने और खराब होने की सम्भावना भी कम रहती है।
जिला उद्यान अधिकारी विमल कान्त ने बताया कि किसानों को प्रशिक्षण देकर इस तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। चूँकि जनपद में ज्यादातर भूमि में जलभराव होने के कारण मचान विधि को अपनाने से सब्जियों की उपज में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि सम्भव है, जिससे किसानों की आमदनी में भी इजाफा हो रहा है। उन्होने किसानों से इस विधि का प्रयोग कर अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है।

