ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाना सही नहीं- हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पंचायत चुनाव की टाइमलाइन मांगी
यूपी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को टालने और ग्राम प्रधानों को छह महीने के लिए प्रशासक नियुक्त करने को सही नहीं माना है। इस संबंध में पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि जब पंचायत राज अधिनियम के संबंधित प्रावधान 12 (3-A) को अदालत ने असंवैधानिक करार दे रखा है तो इसके तहत कैसे आदेश पारित किया जा सकता है। प्रशासक नियुक्त करना डिवीजन बेंच के आदेश का उल्लंघन है। यह अवमानना की श्रेणी में आता है।जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की कोर्ट में सहारनपुर के अरविंद राठौर की बाचिका पर सुनवाई हुई। राज्य सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने को चुनाव में देरी का कारण बताया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद आयेग अब तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सका है। हाई कोर्ट ने कहा कि प्रधानों को प्रशासक के रूप में बने रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती। पंचायत चुनाव टालना असंवैधानिक है। कोर्ट ने सरकार से ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट के साथ स्पष्ट टाइमलाइन मांगी है। हालांकि, कोर्ट ने अभी किसी तरह की कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है। मालूम हो कि यूपी में पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया है।जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने कहा कि जब पंचायत राज अधिनियम के संबंधित प्रावधान 12(3-A) को हाई कोर्ट की डिवीजन वेंच ने असंवैधानिक करार दे रखा है तो इसके तहत कैसे आदेश पारित किया जा सकता है, यह सीधी तरह कोर्ट की अवमानना है।
वहीं राज्य सरकार ने 26 मई 2026 को कार्यकाल समाप्त होने से पहले 25 मई 2026ः शासन ने अधिसूचना जारी की, अगले पंचायत चुनाव तक वर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक बनाया जाएगा 26 मई 2026: यूपी की 57,695 ग्राम पंचायतो के प्रधानो का कार्यकाल खत्म हुआ है।हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अतिम अवसर के रूप में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लाने के लिए विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकार ने कोई आयोग गठित किया है तो उसकी जानकारी और अन्य विवरण कोर्ट में दाखिल करे। इससे पहले, राज्य निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया कि मतदाता सूची 10 जून 2026 को प्रकाशित की जा चुकी है। आयोग चुनाव कराने के लिए तैयार है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से आवश्यक प्रशासनिक और लॉजिस्टिक सहयोग उपलब्ध नही कराया गया है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। 25 मई को सरकार ने आदेश जारी कर ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया है। याचिका में प्रशासकों को हटाकर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जाने की मांग की गई है।
पंचायतराज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि ने कहा कि कोर्ट में मजबूती से सरकार का पक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश का अध्ययन कर उस पर विधिक राय ली जाएगी। विभाग अदालत में अगली सुनवाई पर मजबूती के साथ अपना पक्ष रखेगा। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की तरह ही उत्तर प्रदेश में भी प्रधानो को शर्तों के साथ प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई है। आगे पंचायत चुनाव को लेकर कोर्ट का जो आदेश आएगा, उसका पालन किया जाएगा। हाई कोर्ट ने प्रधानों को प्रशासक बनाने को नियमो के खिलाफ बताया है और सरकार से पंचायत चुनाव पर विस्तृत हलफनामा मांगा है।
(इनपुटःIANS)

