डीजल की कमी से परेशान किसानों ने जिलाधिकारी से लगाई गुहार, समय से डीजल उपलब्ध कराए सरकार
किसानों को तेल ना मिलने के कारण खेती करना हुआ मुश्किल, कैसे होगा नर्सरी तैयार,और डीजल बिना कैसे चलेगा इंजन, कैसे होगी धान की रोपाई
सिद्धार्थनगर। बढ़ती कृषि लागत और डीजल की किल्लत से परेशान क्षेत्र के किसानों ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर राहत की गुहार लगाई है। किसानों का कहना है कि वर्तमान समय में संपूर्ण कृषि कार्य पूरी तरह से मशीनों पर आधारित हो चुका है। पारंपरिक खेती के साधन लगभग समाप्त हो चुके है, जिससे किसानों की निर्भरता पूरी तरह डीजल चलित मशीनों पर बढ़ गई है। किसानों ने अपनी समस्या साझा करते हुए बताया कि अब न तो ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में बैल बचे हैं और न ही खेतों में पारंपरिक तरीके से काम करने के लिए मजदूर उपलब्ध हो पा रहे हैं। ऐसे में जो और बड़े, सभी वर्ग के किसान जुताई से लेकर बुआई तक के कार्यों के लिए ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरणों पर आश्रित हैं।
पेट्रोल पंप पर डीजल की कमी और बढ़ती कीमतों ने अन्नदाता की कमर तोड़ दी है। संकट के समाधान के लिए किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि किसानों के भूमि रकबे (जोत) के अनुसार प्रति बीघा कम से कम 5 लीटर डीजल रियायती या सुनिश्चित दर पर उपलब्ध कराया जाए, इससे खेतों की समय पर जुताई, बेहन (नर्सरी) डालने और अन्य आवश्यक कृषि कार्य बिना किसी बाधा के पूरे हो सकेंगे।
किसानों ने कहा कि यदि समय रहते डीजल की सुचारू रूप व्यवस्था नहीं की गई, तो धान की रोपाई के सीजन में खेती का कार्य बुरी तरह प्रभावित होगा। कृषि उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। जिसका सीधा असर देश की खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

