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राष्ट्रीय हिंदू वाहिनी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष के के पांडे ने पर्यावरण सुरक्षा हेतु मुख्य सचिव उ0प्र0 को लिखा 13 बिंदुओं का पत्र

लखनऊ: 05 जून 2025

राष्ट्रीय हिंदू वाहिनी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष के के पांडे ने पर्यावरण सुरक्षा हेतु मुख्य सचिव उ0प्र0 को लिखा 13 बिंदुओं का पत्र

राष्ट्रीय हिंदू वाहिनी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर पांडे ने मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ को पत्र लिखकर पर्यावरण के सम्बध में सादर अनुरोध एवं निवेदन किया है, कि गंगा दशहरा एवम् पर्यावरण दिवस की बधाई स्वीकार करने का कष्ट करें।
आगामी 05 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पूरा प्रदेश मना रहा है। राष्ट्रीय हिन्दू वाहिनी संगठन भी पूरे प्रदेश के प्रत्येक जनपद में ही नहीं अपितु समूचे देश में पर्यावरण दिवस मना रहा है एवं यथाशक्ति पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में वृक्षारोपण
कर रहा है और आगे भी पर्यावरण के सुरक्षा हेतु करता रहेगा। संगठन पर्यावरण के सम्बन्ध में निम्न निवेदन कर रहा है। जिसको कृपया स्वीकार कर क्रियान्वित कराने का कष्ट करें..

1) पर्यावरण बहुआयामी विषय है। जो धूल, धुंआ,स्वच्छता सफाई वाटर रिचार्ज सिस्टम, जल संरक्षण वृक्षारोपण वन्यजीव संरक्षण ईको सिस्टम संरक्षण, प्लॉस्टिक विहीन व्यवस्था के अंतर्गत पॉलीथीन प्रयोग निषेध, पराली जलाने पर पूर्ण रोक आदि से सम्बन्धित है। कृपया इन सब पर एक साथ
काम करने की महती आवश्यकता है। राष्ट्रीय हिन्दू वाहिनी संगठन इन विषयों पर अत्यन्त गम्भीर प्रयासरत है। शासकीय स्तर पर भी युद्ध स्तर पर कार्यवाही कराने का कृपया कष्ट करें।

2) जल संरक्षण तथा वाटर रिचार्ज सिस्टम के प्राचीन साधन झील, तालाब, पोखर आदि है। जहाँ नये तालाबों के सृजन की वहुत बड़ी आवश्यकता है। वहीं सन 1952 से पहले के सभी तालाबों (दर्ज एवं गैर पर्ज), झीलों, पोखरों, वावरियों को उनके पूर्व स्वरूप में’ लाना तथा उनके इन लेट, आउटलेट बनवाना, तथा हर दशा में अतिक्रमण मुक्त कराना परमावश्यक है। यद्यपि शासन इस दिशा में कार्यरत है फिर भी शत प्रतिशत परिणाम अभी नहीं हो पाया है। कृपया समस्त नगरों तथा ग्रामीण फ्लेम के तालाबों, को उनका पूर्व स्वरूप (सन् 1952 से पहले का) प्रदान करने हेतु समस्त मन्डलायुक्त तथा जिलाधिकारि को स्पष्ट एवं प्रभावी रूप से कहकर लाने की कृपा करें। राष्ट्रीय हिंदू वाहिनी संगठन शासन के साथ है। समय समय पर इसकी समीक्षा भी शासन द्वारा की जा रही है। कृपया प्रत्येक तालाब का रकवा तथा उसका नाम का स्थायी वोर्ड प्रत्येक तालाव के किनारे लगवाने का निर्देश देने की कृ‌पा करे। यदि लालाब का कोई नाम न हो, तो शहीदों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम से नामकरण कराने का कष्ट करे।

3) कृपया तमाम तालाबों में “जलकुम्भी” फैल गयी है। कृपया जल कुम्भी नष्ट कराकर तालाब स्वच्छ कराने का कष्ट करे।

4) छोटी-छोटी समस्त नदियों की सिल्ट सफाई कराने का कष्ट करें। तथा तटबांधों की रक्षा के लिये किनारे कटाव रोकने हेतु नरकट, बाँस आदि के पौधे लगवाने का कष्ट करें।

05) पराली जलाने को रोक के लिये हारवेस्टर मशीन को विना
“स्ट्रारोपर वाइडिंग” के किसी भी दशा में मे न चलने दिया जाए, इसके लिये समस्त मन्डलायुक्त एवं जिलाधिकारियों को स्पष्ट एवं प्रभावी निर्देश देने का कष्ट करे।

06) धूल और धूऐं को कम करने हेतु यथा सम्भव मानव एवम बैल का प्रयोग करने की व्यवस्था कराने का कष्ट करें।अभी मात्र 300-400 वर्ष पहले तक पशुबल तथा मानवबल द्वारा बहुत बड़े-बड़े कार्य हुये है। जो आज असम्भव से है। इससे डीजल-पेट्रोल की बचत होगी। तथा वेरोजगारी व मँहगाई भी कम होगी।

7) इको सिस्टम व्यवस्था करने के लिये बनों का संरक्षण व सृजन की महती आवश्यकता है। चारागाहों को अतिक्रमण मुक्त कराने की महती आवश्यकता है। कृपया इस दिशा में विचार करने में सम्यक प्रयास कराने हेतु समस्त मन्डलायुक्त तथा जिलाधिकारियों को कहने की कृपा करें।

8) पालीथीन के सभी प्रकार के प्रयोग पर रोक लगाई जाए,चाहे वह कारखानों में उत्पाद के लिये हो रहे हो या प्लास्टिष्य का प्रयोग पैकिंग आदि के लिये हो रहा हो, या दुकानों के सामान लाने, ले जाने के लिये या खाने-पीने के सामान के लिये हो रहा हो, पूरी शक्ति व सख्ती से बन्द कराने की व्यवस्था करने का कष्ट करें। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार का भी सृजन होगा।

9)”भूमिगत जल दोहन पर यथा सम्भव रोक लगाई जाये, कोई नीति निर्धारित की जाये। लिफ्ट कैनाल आदि तथा नावों पर इंजन रखकर लिफ्ट सिचाई” द्वारा नदियों के जल का अधिक तम उपयोग सिचाई के लिये किया जाये, ताकि भूमिगत जल का कम से कम उपयोग हो। इसकी सारी योजनायें निशुल्ब्य हो ताकि किसानों पर बोझ न आये। कृपया यह व्यवस्था करने का कष्ट करें।

10) मकानों तथा बहु आयामी प्रयोग के लिये बनाई जा रही विल्डिंगस में ईट. सीमेन्ट, गिट्टी, मोरंग, पानी आदि के रूप में पर्यावरण का दोहन होता है। कृपया लागत पर निर्माणि हेतु पर्यावरण टैक्स लगाने की व्यवस्था करने की कृ‌पा करे। ताकि यह घन पर्यावरण संरक्षण” में काम आये।

11) कृपया पंक्षियों के संरक्षण की व्यवस्था करने का कष्ट करें ताकि मांसाहारी लोग पाक्षियों की हत्या न कर सके।

12) नेशनल हाइवे तथा एक्सप्रेस वे के निर्माणों के दौरान तथा सड़क निर्माण के दौरान काटे गये वृक्षों की भरपाई कराने की कृपा करे। काटे गये वृक्षों की संख्या में दोगने फलदार वृक्ष हर दशा में लगाये जायें, कृपया इसको व्यवस्था करने का कष्ट करे। ताकि पर्यावरण के नुकसान की भरपाई हो सके।

13) पर्यावरण सन्तुलन व संरक्षण से जुड़ा, “वृक्षारोपण सबसे गम्भीर विषय है। आजादी के बाद देश में केन्द्रीय व प्रान्तीय सरकारे द्वारा जितना भी वृक्षारोपण कराया गया है। यदि उसका 50% भी जीवित रहता, तो आज वृक्षारोपण अभियान चलाने की आवश्यकता नहीं होती। बेदना तो इस बात की है, कि वृक्षारोपण के नाम पर विलायती बबूल लग गये जिससे हमारे जंगलों का स्वरूप ही नष्ट सा हो गया जिससे गद्‌द‌ीदार जानवर,, “तेन्दुआ, चीता, बाध शेर आदि प्रायः नष्ट हो गये। तथा मैदानों में भी नीलगाय (पाड़ा) जैसे जानवरों की समस्या उत्पन्न हो गयी है। किसान परेशान है। कृपया इसका उपाय करने की कृपा करें। कृपया बरसात आने वाली है। गत वर्षों की मौति इस बार भी वृक्षारोपण अभियान चलाया जायेगा वन विभाग द्वारा जो पौधे दिये जाते है। वे बहुत छोटे होते है। जिन्हें लगाने के तुरन्त बाद ही बकरियाँ चर जाती है। विना ट्री गार्डस के तथा समुचित देखभाल व सुरक्षा के एक भी पौधा लगाना व्यर्थ है। समय तथा धन दोनों का दुरुपयोग है। वृक्षारोपण वेशकीमती अभियान है। इसे हर कीमत के साथ चलाया जाये तथा कृपया संज्ञान लेने का कट करे। देशी आम जामुन, कैथा, वेल, खिली (खिश्नी) आदि के आधकांश वृक्ष नष्ट हो गये है। महुआ के बाग भी बहुत कम रह गये है। देशी बबूल की जगह विलायती बबूल ने ले ली है। इन सबका पुनः होना अतिआवश्यक है। अतः अनुरोध है कि अधिकतम देशी फलदार वृक्ष लगाये जाये। तथा प्रत्येक पौधे की सुरक्षा, सिचाई व वे देखभाल की पूरी व्यवस्था हो, तथा समुचित संरक्षण हो, ताकि 90% पौधे जीवित रहें। प्रतिवर्ष वृक्षारोपण अभियान “चलाने की आवश्यकता न पड़े।

कृपया उपरोक्त 13 विन्दुओं का क्रियान्वयन करने का व्यवस्था करने का कष्ट करें।

भवदीय: कौशल किशोर पांडे
राष्ट्रीय हिंदू वाहिनी संगठन प्रदेश अध्यक्ष

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