कांशीराम आवासीय कालोनी के जर्जर भवनों व जलभराव के वीच दहशत में जीवन बिता रहे लोग! बोले जाएं कहां
सिद्धार्थनगर। कभी गरीब को सुरक्षित आसियाना देने के उद्देश्य से बनाई गई कांशीराम आवासीय कालोनी आज अपने ही निवासियों के लिए डर का दूसरा नाम बन चुकी है। ब्लाक नंबर 43 और 41 को छत भर-भराकर गिरने के बाद कालोनी के हर परिवार की रातें बेचैनी में गुजर रही हैं। लोग जानते है कि उनके सिर पर खड़ी इमारतें अब सुरक्षित नहीं रहीं,फिर भी मजबूरी ऐसी है कि इन्हीं जर्जर मकानों में जीवन काटना पड़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर ये आवास रहने योग्य नहीं हैं तो आखिर कालोनी के लोग जाएं कहां?
वही कालोनी की गलियों में कदम रखते ही भवनों की बदहाली साफ दिखाई देती है। जगह-जगह प्लास्टर उखड़ चुका है, दीवारों में दरारें हैं और कई मकानों की छतों से सीमेंट झड़ रहा है। बारिश के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है। जलभराव के कारण भवनों में खेलन बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि लगातार नमी से भवन और कमजोर होते जा रहे हैं। ऐसे में हर बारिश के साथ किसी नए हादसे का डर भी बढ़ जाता है।
यह कालोनी पहले भी एक बड़ी त्रासदी देख चुकी है। दो मई को कालोनी परिसर में बनी पानी की टंकी की सीढ़ी अचानक टूट गई थी। सीढ़ी पर मौजूद तीन किशोर नीचे गिर गए थे। इस हादसे में एक किशोर की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य घायल हुए थे। उस घटना ने भवनों और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे, लेकिन इसके बाद भी कालोनी की स्थिति सुधारने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। वहीं छत गिरने की ताजा घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों का लगातार निरी क्षण जारी है। भवनों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है और लोगों से जानकारी ली जा रही है। लेकिन आवास में रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें केबल सर्वे या जांच नहीं, बल्कि इसका स्थाई समाधान चाहिए।
काशीराम आवास में रहने वाले लोगों का कहना है कि रात में नींद नहीं आती। हर आवाज पर लगता है कि कहीं हमारी छत भी न गिर जाए,जांच अधिकारी खुद मान रहे हैं कि कई आवास जर्जर हैं लेकिन अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई।सब जानते हैं कि मकान सुरक्षित नहीं हैं, लेकिन यहां से निकलकर जाएं तो जाएं कहां? हमारे पास दूसरा कोई और ठिकाना नहीं है। कालोनी में रहने वाले लोगों का कहना है कि नालियां गंदगी से भरी रहती हैं, सड़कें टूट चुकी हैं और जलभराव के कारण मकानों में सीलन बढ़ती जा रही है। अब हर परिवार डर के साये में जी रहा है।
काशीराम आवास में रहने वाले लोगों का आरोप है कि वर्षों से कालोनी की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। नालियों की नियमित सफाई नहीं होती, जल निकासी की व्यवस्था बदहाल है और बारिश के दौरान कालोनी के कई हिस्सों में पानी भर जाता है। इससे भवनों की नींव और दीवारों पर लगातार प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि अगर समय रहते मरम्मत,पुनर्निर्माण या वैकल्पिक आवास की व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में बड़े हादसे होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
वहीं नगर पालिका के अधिशाशी अधिकारी अजय सिंह ने बताया कि आवास रहने योग्य हैं या नहीं, इसको तकनीकी जांच कराई गई है। एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट प्राप्त जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद जिल प्रशासन जो निर्णय लेगा, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।सोर्स विज्ञप्ति।

