लखनऊ: दिनांक 16 दिसंबर 2025
खाद की कालाबाजारी करने वालों पर लगेगा एनएसए-मुख्य्मंत्री
मुख्यमंत्री कार्यालय से होगी हर जिले की निगरानी! अधिकारियों की कमी मिलने पर विजिलेंस टीम करेगी जांच
मुख्यमंत्री योगी बोले, किसानों को कोई समस्या हुई तो कोई भी दोषी नहीं बचेगा
लखनऊः खाद वितरण को लेकर प्रदेश भर से आ रहीं गड़बड़ी की शिकायतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। मंगलवार को समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने दो टूक लहजे में कहा कि मिलावटी या नकली खाद बेचने वालों और इसकी कालाबाजारी में संलिप्त लोगों के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। अन्नदाता किसान को यदि खाद को लेकर कोई भी समस्या हुई तो जवाबदेही तय होगी और दोषी चाहे किसी भी स्तर का हो, कार्रवाई से नहीं बचेगा।
बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में खाद की समुचित उपलब्धता और सुचारु वितरण के निर्देश दिए। कहा कि सहकारिता और कृषि मंत्री प्रतिदिन खाद की उपलब्धता और वितरण की स्थिति की समीक्षा करें।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय से हर जिले की सीधी निगरानी की जाएगी और खाद वितरण में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी कतई स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में बताया गया कि खरीफ सीजन से लेकर अब तक खाद की कालाबाजारी, ओवर रेटिंग, टैगिंग आदि रोकने के लिए कृषि विभाग द्वारा 27,315 छापे मारे जा चुके हैं,विभाग की ओर से अब तक 1005 खाद विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित और 1314 विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं। इनमें फुटकर विक्रेताओं को 155 नोटिस दिए गए, 1285 लाइसेंस निरस्त किए गए और 965 लाइसेंस निलंबित हुए हैं। वहीं 35 थोक विक्रेताओं को नोटिस दिए गए, 40 के लाइसेंस निलंबित किए और 29 के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं। पांच उर्वरक कंपनियों को भी नोटिस दिए गए हैं। इनके अलावा 62 दुकानों को सील किया गया और 200 प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को अपने आवास पर खाद के संबंध में बैठक करते हुए कहा कि उपजिलाधिकारी स्वयं खाद की दुकानों और समितियों का आकस्मिक निरीक्षण करें। ओवर रेटिंग किसी भी दशा में न हो और खाद समितियां निर्धारित अवधि के अनुसार अनिवार्य रूप से खुली रहें। डीएपी, यूरिया और पोटाश, किसानों को केवल तय सरकारी दरों पर सूचना विभाग पर ही उपलब्ध कराई जाएं। जहां भी गड़बड़ी पाई जाए,वहां तत्काल जवाब देही तय की जाए। फील्ड में तैनात अधिकारियों की गतिविधियों की निरंतर निगरानी की जाएगी। किसी स्तर पर मिलीभगत या लापरवाही मिली तो खुली विजिलेंस जांच कराई जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिया कि उपलब्धता के बावजूद किसी किसान को खाद के लिए भटकना न पड़े, यही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

