भगवान बुद्ध की धरती पर उपजने वाले ‘बुद्धा राइस’ कालानमक को मिलेगी वैश्विक बाजार में नई पहचान- जिलाधिकारी
राज्य स्तरीय समिति ने 15 दिन पहले दी सहमति! बर्डपुर में चार करोड़ रुपये लागत से बनेगा साझा सुविधा केंद्र- जिलाधिकारी
18,000 हेक्टेयर में होती है कालानमक की खेती,26,000 टन है वार्षिक कालानमक धान का उत्पादन – जिलाधिकारी
40,000 से अधिक किसान जुड़े हैं कालानमक की खेती से,साझा सुविधा केंद्र शुरू होने के बाद किसानों को अधिक लाभ का रास्ता खुलेगा- जिलाधिकारी
कालानमक धान का फाइल चित्र.
सिद्धार्थनगर :भगवान बुद्ध की धरती पर उपजने वाले कालानमक चावल को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। पखवारे भर पहले राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग समिति ने बर्डपुर विकास खंड में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से साझा सुविधा केंद्र (सीएफसी) की स्थापना के प्रस्ताव को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है। यह जिले की दूसरी सीएफसी होगी। केंद्र बनने के बाद कालानमक चावल को गुणवता सुधार, परीक्षण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी।उद्योग विभाग की योजना के तहत स्थापित होने वाले इस केंद्र में बीज संयंत्र, परीक्षण प्रयोगशाला और प्रसंस्करण इकाई स्थापित की जाएगी। यहां कालानमक चावल से सह उत्पाद कुकीज, चिप्स, पापड़, चिवड़ा, आटा सहित अन्य मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए जाएंगे। साथ ही एक प्रदर्शनी कक्ष भी बनाया जाएगा, जहां कालानमक चावल के इतिहास के बारे में उसकी विशेष सुगंध, पोषण गुण और भगवान बुद्ध से जुड़े “बुद्धा राइस” कलानमक के संबंध की जानकारी दी जाएगी।
जनपद में पहले से संचालित साझा सुविधा केंद्र से अलग यह केंद्र बीज सुधार, गुणवत्ता परीक्षण और मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण पर केंद्रित होगा। इससे किसानों को धान बेचने के बजाय तैयार उत्पादों के माध्यम से निर्यात के लिए गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पाद तैयार होने से कालानमक चावल की मांग बढ़ने की उम्मीद है। वर्तमान में जिले में लगभग 18 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में कालानमक की खेती हो रही है। प्रतिवर्ष 26 हजार टन कालानमक धान का उत्पादन होता है,40 हजार से अधिक किसान इसकी खेती से जुड़े हैं। साझा सुविधा केंद्र शुरू होने के बाद किसानों को गुणवत्ता सुधार, प्रसंस्करण और विपणन की आधुनिक सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी।18,000 हेक्टेयर में होती है कालानमक की खेती,26,000 टन है वार्षिक का उत्पादन कालानमक धान। 40,000 से अधिक किसान जुड़े हैं कालानमक की खेती से अधिक लाभ का रास्ता खुलेंगा। साझा सुविधा केंद्र शुरू होने के बाद किसानों को गुणवत्ता सुधार, प्रसंस्करण और विपणन की आधुनिक सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी।
साझा सुविधा केंद्र से कालानमक चावल की गुणवत्ता, प्रसंस्करण और विपणन को नई मजबूती मजबूती मिलेगी। मूल्य संवर्धित उत्पादों और निर्यात के अवसर बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि होगी तथा कालानमक को वैश्विक पहचान मिलेगी- जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन.श्रोत विज्ञप्ति।

