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पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर अटेवा पेंशन बचाओ मंच के नेतृत्व में निकली तिरंगा यात्रा

पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर अटेवा पेंशन बचाओ मंच के नेतृत्व में निकली तिरंगा यात्रा

पुरानी पेंशन योजना बहाली की मांग को लेकर बृजेश दिवेदी की अगुवाई में कलेक्ट्रेट पहुंचे कर्मचारी ने भरी हुंकार

सिद्धार्थनगर। पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली की मांग को लेकर शुक्रवार को अटेवा पेंशन बचाओ मंच के नेतृत्व में तिरंगा यात्रा निकाली गई। यह यात्रा जय किसान इंटर कॉलेज सनई से शुरू होकर कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची, जहां कर्मचारियों और शिक्षकों ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। यात्रा का उद्देश्य नई पेंशन योजना (एनपीएस) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) का विरोध था। यात्रा में शामिल कर्मचारी हाथों में तिरंगा झंडे और एनपीएस यूपीएस विरोधी तख्तियां लिए हुए थे। इस दौरान भारत माता की जय, वंदे मातरम हमारी मांग पुरानी पेंशन और जय अटेवा जैसे नारे लगाए गए।

प्रदेश संयुक्त मंत्री जनार्दन शुक्ला ने कहा कि सरकार को हर हाल में ओपीएस बहाल करना पड़ेगा। यह हमारा हक है इसे लेकर ही दम लेंगे।
मंडल अध्यक्ष बलवंत चौधरी ने कहा कि पुरानी पेंशन बुढ़ापे की लाठी है। इसे किसी भी कीमत पर लेकर ही मानना है। जिलाध्यक्ष बृजेश द्विवेदी ने कहा कि पुरानी पेंशन के लिए यह आंदोलन पूरे देश में चल रहा है। एनपीएस कर्मचारियों के साथ छलावा है। यह स्वीकार्य नहीं है। पेंशन की बहाली होने तक हमे एकजुट रहना होगा।

जिला कोषाध्यक्ष श्रीकृष्ण चौधरी व मीडिया प्रभारी गौरव शुक्ला ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों के जीवन-मरण का सवाल है। पुरानी पेंशन बहाली तक लाखों कर्मचारी सड़क से संसद तक संघर्ष करेंगे।जब जनप्रतिनिधियों को पुरानी पेंशन का लाभ मिलता है, तो कर्मचारियों को भी यह सुविधा मिलनी चाहिए। जिला महामंत्री संजय कर पाठक ने जोर देकर कहा कि कर्मचारियों की एकमात्र मांग पुरानी पेंशन की बहाली है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि सरकार एनपीएस को यूपीएस में बदल सकती है, तो वह ओपीएस को भी बहाल कर सकती है। वन नेशन, वन पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग की।

कार्यक्रम मे अटेवा के जिलाध्यक्ष बरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रमोद त्रिपाठी जिला प्रवक्ता आनंद शुक्ला जिला मंत्री दधीच कुमार सभी ब्लॉक अध्यक्ष मंत्री व बिभिन्न संगठनों के अध्यक्ष मंत्री ने भी पुरानी पेंशन को कर्मचारियों का अधिकार बताया। विभिन्न कर्मचारी और शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने इस यात्रा को अपना समर्थन देते हुए आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया

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