पूर्व डीजीपी एवं राज्यसभा सांसद बृजलाल ने अखिलेश यादव के “बंधुराष्ट्र” वाले बयान पर फ़र्ज़ी नैरेटिव गढ़ने का लगाया आरोप
लखनऊ। पूर्व डीजीपी एवं राज्यसभा सांसद बृजलाल ने समाजवादी पार्टी के मुखिया पर आरोप लगाया कि अखिलेश यादव कोई न कोई फ़र्ज़ी नैरेटिव रोज़ गढ़ते है। मैंने आज ही समाचार पत्रों में पढ़ा की आप सत्ता में आने पर “बंधुराष्ट्र” बनायेंगे जिसमें सभी लोगों में भाई चारा होगा।बन्धुराष्ट्र के लिए पहली आवश्यकता है “राष्ट्र प्रथम”, बाक़ी पार्टी हित, अपना हित बाद में।आप की पार्टी के जो अबतक कार्यकलाप रहे है वह तो विशुद्ध तुष्टिकरण की राजनीति पर आधारित है।कुछ दृष्टांत इसकी पुष्टि करते हैं।
1-भारत में इस्लामिक आतंकवाद का अंतिम लक्ष्य है, देश को “गज़वा-ए-हिन्द” यानी भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना। आतंकवादी भारत और हम सभी के लिए सबसे बड़े दुश्मन है, जिनसे हम सभी को मिलकर लड़ना है जिससे उनके कुत्सित इरादे को ज़मीन में दफ़न किया जा सके।आप और आप की पार्टी,वोट-बैंक की राजनीति के लिए आतंकियों के साथ खड़ी नज़र आती है। याद दिला दूँ,मुख्यमंत्री बनते ही वर्ष 2013 में आप ने आतंकियों के 14 चार्ज-शीट वापस लेनें का आदेश किया था जो न्यायालयों में लम्बित थे। ये आतंकी घटनाएँ थी-!
1- 1जनवरी 2008 की बीती रात में सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर रामपुर हमला जिसमे सीआरपीएफ के 7 जवान शहीद हुए थे।यह हमला पाकिस्तानी आतंकी “लश्कर- ए-तैयबा” के सरगना हाफिज सयीद का था जिसमें उसका इंडिया कमांडर मोतिहारी बिहार निवासी सबाउद्दीन था।उसने रामपुर निवासी सुहेल अंसारी, मुरादाबाद का बाबा ख़ान थे। इमरान शहजाद गुंजरवाला पाकिस्तान और पीओके का मोहम्मद फ़ारूख़ शामिल थे।मैं उस समय उत्तरप्रदेश का एडीजी क़ानून व्यवस्था, एसटीएफ, एटीएस, अपराध का प्रभारी था। सभी आतंकी गिरफ्तार किए गये और चार्ज शीट कोर्ट में दाखिल की गई। मुक़दमा ट्रायल पर था जिसको अखिलेश ने वापस ले लिया, किंतु इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय ने अखिलेश जी के इरादों पर पानी फेर दिया। रामपुर अटैक के अलावा अन्य मुकदमे भी वापस नहीं हो पाये और आतंकियों को आजन्म कारावास से लेकर फाँसी की सजा हुई।
2-नवम्बर 23, 2007 को उत्तरप्रदेश की लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या की न्यायालयों में आतंकियों ने ब्लास्ट कराये जिसमें डेढ़ दर्जन वकील व अन्य लोग मारे गये।इसी तरह 22 मई 2007 को गोलघर ब्लास्ट भी इसी ग्रुप के आतंकियों ने किए थे।सभी आतंकी गिरफ्तार किए गए और चार्ज शीट लगी जिसको अखिलेश ने वापस लिए।
3- कचहरियों में हुए ब्लास्ट में 2 ख़ूँख़ार आतंकी ख़ालिद मुजाहिद और हकीम तारिक़ कासमी गिरफ़्तार किए गए जिनके विरुद्ध लगी चार्ज- शीट भी अखिलेश ने वापस लिए।
4- 18 मई 2013 को उपरोक्त दोनों आतंकी लखनऊ जेल से बज्रवाहन से भारी एस्कॉर्ट के साथ अयोध्या कोर्ट में पेशी के बाद लखनऊ वापस लाए जा रहे थे। रास्ते में खालिद मुजाहिद को “लू”(Sunstroke) लग गया जो बाराबंकी आते-आते मर गया। अखिलेश सरकार ने मेरे, सेवानिवृत्ति डीजीपी विक्रम सिंह,2 एसपी, डीएसपी सहित 38 पुलिसकर्मियों पर हत्या की साजिश का मुक़दमा 19 मई की सुबह बाराबंकी कोतवाली में कायम कराया।
अखिलेश ने दोनों आतंकियों की बाराबंकी में हुई गिरफ्तारी की मुकदमें को भी वापस लिया किंतु बाराबंकी न्यायालय के हस्तक्षेप के कारण मुकदमा वापस नहीं हो पाया और हकीम तारिक कासमी को आजन्म कारावास की सजा हो गई, ख़ालिद मुजाहिद को अपने कर्मों की सजा खुदा ने दे दी।आतंकी ख़ालिद मुजाहिद को समाजवादी पार्टी के लोगों ने अमर शहीद मौलाना खालिद मुजाहिद कह कर हम पुलिस कर्मियों के विरुद्ध आंदोलन किया गया।
5-वाराणसी के दशाश्वमेध घाट, संकट मोचन, कैंट रेलवे स्टेशन, शीतला घाट, श्रमजीवी ट्रेन ब्लास्ट के मुकदमों को भी अखिलेश सरकार ने वापस लिए जिनमे अन्ततः सजाएँ हुई।
6-केवल अखिलेश ही नहीं, इनके पिता श्री मुलायम सिंह यादव ने भी आतंकियों के कई मुकदमे वापस लिए।
7- जनवरी 26,1993 को मेरठ पशु चिकित्सालय के पास पीएसी कैम्प पर हमला हुवा जिसमें एक हेड कांस्टेबल शहीद हुए और कई गंभीर रूप से घायल हुए। मेरे नेतृत्व में इस आतंकी हमले की जाँच हुई और चार्ज- शीट लगाई गई।
मुलायम सिंह यादव ने 1993 में जब मुख्यमंत्री बने तो इस बम कांड के अलावा 1992 में भी मेरठ शहर में पीएसी कैम्प पर चाइनीज़ ग्रेनेड से हमला हुवा जिसमें एक हवलदार का एक पैर कट कर अलग हो गया। इन मुकदमों को मुलायम सिंह ने वापस लिया। मेरठ जिला जज ने मुकदमा वापसी रोक दी और आतंकियों को आजन्म कारावास की सजा हुई।
पूर्व डीजीपी एवं राज्यसभा सांसद बृजलाल ने कहा कि अखिलेश के भाई चारा पर कुछ बताना चाहता हूँ,26 अगस्त 2013 को मलिकपुरा शामली निवासी सचिन और गौरव कवाल गाँव गये थे जहाँ उनका शाहनवाज कुरैशी से झगड़ा हुवा। कहा जाता है किसचिन की बहन को वहाँ छेड़ा जाता था। 27 -8-2013 को कवाल में पुनः सचिन, गौरव का शाहनवाज से झगड़ा हुवा जिसमें शाहनवाज की चाकू लगने से मौत हुई। कवाल के कुछ मुसलमानों ने घेरकर सचिन और गौरव को लिंच करके हत्या कर दी। अपराधी पकड़े गए जिनको आज़म ख़ान ने छोड़वा दिया। यह मामला इतना बढ़ा की मुजफ्फरनगर में साम्प्रदायिक दंगा हो गया जिसमे 60 लोग मारे गए 50000 लोगों को कैंपों में रहना पड़ा।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी आदि केवल मुस्लिम कैम्प में गये, हिंदू कैम्प में न तो प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी गई और न ही अखिलेश यादव। अखिलेश यादव सैफ़ई महोत्सव में नाच देखने में व्यस्त रहे।अखिलेश ने अपने सरकारी आवास पर केवल मुसलमान नेताओं को स्टेट प्लेन से बुलाकर बात की, पीड़ित हिंदुओं की कोई सुधि नहीं ली गई।यह है अखिलेश यादव का भाई चारा।
पूर्व डीजीपी एवं राज्यसभा सांसद बृजलाल ने कहा कि अखिलेश यादव बीजेपी पर लोगो को बाटने का आरोप लगाते है, लेकिन इन्होंने अपने कृत्यों से हिंदुओं के साथ पूरी तरह भेदभाव करके उन्हें अलग थलग कर दिया, कुछ 6 नमूने इस प्रकार से हैं।
1- मुख्यमंत्री बनने पर मुस्लिम कब्रिस्तानों के बाउंड्री के लिए अलग बजट आवंटित,हिंदू श्मशान घाटों के लिए कुछ भी नहीं।
2- हमारी बेटी, उसका कल योजना- 10 वी पास मुस्लिम बेटियों के उच्च शिक्षा या विवाह के लिए एक मुस्त 30,000 रुपये बांटे गए, हिंदू बेटियों के लिए एक पैसा भी नहीं। पीडीए का पहाड़ा पढ़ने वाले अखिलेश जी को पिछड़ों और दलितों की बेटियों की कोई चिंता नहीं।
3- मुसलमानों को थोक में उर्दू अनुवादक बनाकर उपकृत किया गया, लेकिन संस्कृत के उत्थान के लिए कुछ भी नहीं।
4- मदरसों के आधुनिकीकरण के नाम पर पैसा पानी की तरह बहाया गया लेकिन अन्य स्कूलों को छोड़ दिया गया।योगी सरकार ने “काया कल्प” योजना के तहत स्कूलों के भवनों का कायाकल्प किया और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई।
5- सरकारी योजनाओं में मुसलमानों को 20% वरीयता, दलितों, पिछड़ों की कोई चिंता नहीं।
6- मुसलमानों के लिए लखनऊ और गाजियाबाद में हज हाउस का निर्माण, लेकिन हिंदू तीर्थयात्रियों के लिए काशी, मथुरा, अयोध्या, विंध्याचल, चित्रकूट एवं बुद्धिस्ट तीर्थों की अनदेखी की गई।
उन्होंने कहा कि यह है अखिलेश यादव का भाई चारा। अब अखिलेश यादव 2027 की विधानसभा के आसन्न चुनाव को देखते हुए रोजाना फर्जी नैरेटिव गढ़ कर प्रदेशवासियों को भ्रमित कर रहे है, लेकिन इनका एक ही लक्ष्य है, तुष्टिकरण करके परिवार की सरकार बनाना यानी पीडीए (परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी) का निर्माण। परिवारवादी सरकार अब नहीं बनेगी जिसकी बानगी बिहार, बंगाल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में दिख चुकी है। यह राज्य सभा सांसद के अपने व्यक्तिगत विचार हैं।
“वंदे मातरम”
Brij Lal IPS Retd,Ex-DGP UP
Member of a parliament (Rajya Sabha) New Delhi 09 September 2026.

