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राष्ट्रीय हिंदू वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष के0 के0 पांडे ने महामहिम राष्ट्रपति भारत गणराज्य को लिखा पत्र

राष्ट्रीय हिंदू वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष के0 के0 पांडे ने महामहिम राष्ट्रपति भारत गणराज्य को लिखा पत्र

देश के समस्त कार्यरत प्राथमिक विद्यालयों में तत्कालीन पारित किए गए कानून को शिक्षकों को टेट परीक्षा से मुक्ति दिलाने हेतु एक अध्यादेश जारी किया जाए-के0 के0 पांडे

लखनऊ: 31 मार्च 2026

लखनऊ: राष्ट्रीय हिंदू वाहिनी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कौशल किशोर पांडे ने महामहिम राष्ट्रपति भारत गणराज्य नई दिल्ली को पत्र लिखकर मांग किया है कि तत्कालीन पारित किए गए कानून को देश के समस्त कार्यरत प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को टेट परीक्षा से मुक्ति दिलाने हेतु एक अध्यादेश जारी करने हेतु प्रधानमंत्री भारत सरकार को आपके तरफ से सार्थक प्रयास करने की कृपा करें।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मा0.सुप्रीम कोर्ट का हम आदर व सम्मान करते है, लेकिन हम सब दया, अनुकम्पा तथा नैसर्गिक न्याय पर भी भरोसा रखते है। उन्होंने कहा कि न्याय का भी भारत की परम्परा में अपना एक अलग महत्व होता है,भारत में इसकी मान्यता रही है। प्राइमरी के अध्यापक सरकारों द्वारा निर्धारित तत्कालीन अर्हताओं को पालन करते हुये अपनी योग्यता के अनुसार तत्कालीन विपरित किये गये नियमों के अन्तर्गत नियुक्त किये गये है। ऐसा सभी अन्य कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ भी हुआ है। कृपया अन्यथा न लिया जाये इन्जीनियर डॉक्टर जज, आईएएस, आईपीएस व राज्यस्तरीय तमाम अफसरों को अपने कार्य में महारत हासिल है। ये सभी सम्मानित लोग अपना-अपना दायित्व बखूबी निभा रहे हैं, हम इनकी भूरि- भूरि प्रशंसा करते है। किन्तु क्या ये सब अपनी चयन परीक्षा आज के स्तर के अनुसार उसी प्रतिशत से दुबारा उत्तीर्ण कर सकेंगे! यह यक्ष प्रश्न है,उन्होंने कहा कि प्राइमरी के शिक्षक बच्चे के प्रथम गुरु होते हैं, इनका सम्मान सर्वेपिरि है। ऐसे में सरकार को समाज व न्यायपालिका की रक्षा करनी चाहिये।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि विश्व भर में अनुभव “का अपना बहुत महत्व है। अनुभव व्यक्ति को अपने कार्य में दक्ष व निपुण बना देता है,पर विना वजह संशय करना कतई न्यायोचित नहीं होगा। भारत एक अत्यन्त प्राचीन परंपरा वाला देश है। तथा भारत में लोग अनुभव के आधार पर योग्यता हासिल करते थे,तथा विश्व गुरु कह लाते थे। ऐसे ही गुरु वशिष्ठ, बाल्मीक. धौम्यजी,ऋषि विश्वामित्र, वेदव्यासजी संदीपन जी. वैशम्पायनजी, द्रोणाचार्य जी, कपिल मुनि जी जादि अनुभव से ही महान गुरु बने है। जिन्होंने भारत को शिक्षा दी है। इसी लिए अनुभव के आधार पर आदर,स्थायित्वव व सम्मान मिलना ही चाहिये।उन्होंने कहा कि 60 से 70 के दशक में विद्या विनोदनी” एक परीक्षा होती थी।उन्होंने कहा कि पहली कक्षा 5 से लेकर कक्षा 8 तक शिक्षा प्राप्त पढ़े लोग परीक्षा दिया करते थे। उसके बाद विद्या-विनोदनी पास करके प्राइमरी के शिक्षक बन जाते थे। बचपन में हमें यह जानकारी थी कि उसकी तुलना में वर्तमान प्राइमरी शिक्षक कई कई गुना योग्य व अनुभवी है। विद्या विनोदनी पास प्राइमरी शिक्षको के पढ़‌ाये बच्चे उस जमाने में भी जज, डाक्टर, कलेक्टर, पुलिस कप्तान आदि बने है।

प्रदेश अध्यक्ष पांडे ने महामहिम राष्ट्रपति महोदया को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि इसमें सुप्रीम कोर्ट को कृपा करके संज्ञान लेना चाहिये, क्योंकि प्राइमरी शिक्षक लगभग 32 एप से होकर गुजारे जाते है। तमाम गैर विभागीय व अतिरिक्त कार्य करते हैं,जो सर्वविदित है। शिक्षक 18-18 घन्टे काम करते हैं,ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को इस पर भी दया व कृपा की नजर रखने के लिये अनुरोध करते है। उन्होंने बताया कि इससे पहले हमारी पार्लियामेंट ने ऐसे तमाम फैसले को पलटे है। उदाहरण के लिए शाहबानों प्रकरण से लेकर अब तक तमाम ऐसे उदाहरण है। इसीलिए आप से अनुरोध है कि देश के समस्त प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को टेट परीक्षा से मुक्ति दिलाने हेतु अध्यादेश जारी कर प्रधानमंत्री भारत सरकार के संज्ञान में लाने की कृपा करें। क्योकि 50 वर्ष पार करने के बाद किसी पर भी बहुत अधिक जिम्मेदारी ज्यादा हो जाती है,ऐसे में उपरोक्त विषय पर विचार करें! क्योंकि यह मानवता व द‌या का विषय है। कृपया कृत कार्यवाही से संगठन को भी अवगत कराने की कृपा करे।

भवदीय: कौशल किशोर पान्डेय,प्रदेश अध्यक्ष,राष्ट्रीय हिन्दू वाहिनी संगठन (उत्तर प्रदेश)

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