सौ साल के लिए बने काशीराम आवास की हालत खराब! 15 वर्ष में जर्जर हुआ भवन
डीएम ने गठित की जांच टीम!एक सप्ताह में आएगी रिपोर्ट: खामी पर तय होगी कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी
सिद्धार्थनगर : गरीब परिवारों को सौ वर्ष तक सुरक्षित आशियाना उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आवंटित कांशीराम शहरी आवास डेढ़ दशक के भीतर ही अपनी मजबूती को लेकर परीक्षा देने लगे हैं। करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस कालोनी के दो ब्लाक प्रारंभिक जांच में रहने योग्य नहीं पाए गए हैं, जबकि कई अन्य भवनों से प्लास्टर टूटने और जर्जर होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अब सभी 84 ब्लाकों में बने 1008 आवासों की विस्तृत तकनीकी जांच कराने का निर्णय लिया है।
जिलाधिकारी द्वारा इसके लिए चार सदस्यीय तकनीकी समिति गठित की गई है, जिसे एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है,आपको बता दें कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने नौ अक्टूबर 2008 को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास किया था। करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना दिसंबर 2011 में पूरी हुई, जिसके बाद पात्र परिवारों को आवास आवंटित किए गए।आवंटन की अवधि सौ वर्ष निर्धारित की गई थी, लेकिन 15 वर्ष पूरे होने से पहले ही भवनों की मजबूती सवालों के घेरे में आ गई है। इससे न केवल निर्माण की गुणवत्ता, बल्कि उस समय हुई निगरानी और तकनीकी परीक्षण की प्रक्रिया पर भी प्रश्न उठने लगे हैं।
शुक्रवार रात करीब तीन बजे ब्लाक संख्या 40 और 41 के दो फ्लैटों की छत का हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया था। संयोग रहा कि दो कमरे और एक रसोई वाले दोनों फ्लैटों में रहने वाले परिवार घटना के समय दूसरे कमरों में सो रहे थे, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। घटना के बाद लोक निर्माण विभाग से दोनों ब्लाकों की प्रारंभिक जांच कराई गई। जांच में दोनों भवनों को रहने योग्य नहीं पाए जाने के बाद प्रशासन ने पूरी कालौनी की तकनीकी पड़ताल कराने का निर्णय लिया।
जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन चार सदस्यीय तकनीकी समिति गठित की है। प्रांतीय खंड लोक क निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को समिति का अध्यक्ष क बनाया गया है। परियोजना र अधिकारी डूडा, आवास विकास परिषद बस्ती के सहायक अभियंता और नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। समिति सभी 84 ब्लाकों की संरचनात्मक मजबूती, निर्माण की गुणवत्ता और वर्तमान स्थिति की जांच करेगी। साथ ही यह भी स्पष्ट करेगी कि कौन से ब्लाक रहने योग्य हैं, किन भवनों में मरम्मत की आवश्यकता है और किन्हें सुरक्षा की दृष्टि से खाली कराया जाना जरूरी है। लगातार जलभराव का भवनों की नींव और संरचना पर क्या प्रभाव पड़ा है, यह भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है। सवाल यह है कि सौ वर्ष के लिए आवंटित आवास यदि 15 वर्ष के भीतर ही असुरक्षित होने लगें तो निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर हुई थी।

