पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे पर जिले में बनेंगे 40 अंडरपास,आधुनिक मशीनों द्वारा की जा रही है मिट्टी की जांच
निर्माण प्रक्रिया ने पकड़ी रफ्तार, इंजीनियरों की देखरेख में मशीनों से हो रही मिट्टी की जांच
प्रारंभिक जांच के बाद दोबारा परीक्षण की रिपोर्ट पर निर्माण स्थल को दिया जाएगा अंतिम रूप
राप्ती नदी पर बनेगा 10 पिलर वाला लंबा पुल, दो माह में प्रथम चरण का कार्य पूरा करने का लक्ष्य
इटवा,सिद्धार्थनगर। पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण की प्रारंभिक प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। इस आधुनिक मार्ग पर निर्बाध और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए जगह-जगह अंडरपास बनाए जाएंगे। इसके लिए प्रस्तावित स्थलों पर मशीनों से मिट्टी की जांच शुरू हो गई है। इंजीनियर जमीन की भार वहन क्षमता और संरचना का आकलन कर रहे हैं, जिससे निर्माण के लिए उपयुक्त स्थान निर्धारित किया जा सके। पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे सिद्धार्थनगर जिले के बांसी, इटवा और डुमरियागंज क्षेत्र से होकर गुजरेगा।
पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे पर जिले में कुल 40 अंडरपास बनाए जाने प्रस्तावित हैं। इनमें 20 छोटे और 20 बड़े अंडरपास शामिल हैं, इसके अतिरिक्त दो इंटरचेंज भी प्रस्तावित हैं। राप्ती नदी पर 10 पिलर वाला लंबा पुल बनाया जाएगा। इटवा तहसील क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर 13 अंडरपास का निर्माण प्रस्तावित है।परियोजना के प्रथम चरण के तहत प्रस्तावित अंडरपास स्थलों पर भूगर्भीय जांच शुरू कर दी गई है। इंजीनियर आधुनिक मशीनों की सहायता से करीब 50 फीट गहराई तक मिट्टी के नमूने लेकर उसकी गुणवत्ता और क्षमता की जांच कर रहे हैं। इससे यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित स्थान की भूमि पिलर और अन्य भारी संरचनाओं के निर्माण के लिए कितनी उपयुक्त है। प्रारंभिक जांच के बाद दोबारा परीक्षण किया जाएगा और उसके आधार पर निर्माण स्थल को अंतिम रूप दिया जाएगा।माउंट जियो कंपनी के इंजीनियर विशाल प्रजापति ने बताया कि मिट्टी की जांच और इससे संबंधित प्रक्रिया डेढ़ से दो माह के भीतर पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। तय समय सीमा में कार्य पूरा कर विस्तृत रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंपी जाएगी।
एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा होने के बाद क्षेत्र में आवागमन सुगम होने के साथ लंबी दूरी की यात्रा में लगने वाला समय भी कम होगा। शनिवार को इटवा तहसील क्षेत्र के महुआ पाठक गांव के उत्तर तरफ प्रस्तावित अंडरपास स्थल पर मशीन से मिट्टी के नमूने लिए जा रहे थे। इंजीनियरों के अनुसार अंडरपास बनने से एक्सप्रेसवे के दोनों और स्थित गांवों का आपसी संपर्क बना रहेगा। किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने में भी परेशानी नहीं होगी। स्थानीय आवागमन को बाधित होने से बचाने के लिए आवश्यकता के अनुसार अंडरपास का निर्माण प्रस्तावित किया गया है। सोर्स विज्ञप्ति।

