अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका के समीक्षक मंडल में डॉ. भास्कर शर्मा का चयन
डॉ. भास्कर शर्मा को अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ने प्रदान किया ‘समीक्षक सम्मान प्रमाण-पत्र’
सिद्धार्थनगर, इटवा बाजार। चिकित्सा,शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में कार्य कर रहे डॉ. भास्कर शर्मा को अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका अंतरराष्ट्रीय बहुविषयक अनुसंधान एवं समीक्षा पत्रिका के समीक्षक मंडल में सम्मिलित किया गया है। इस अवसर पर पत्रिका की ओर से उन्हें समीक्षक सम्मान प्रनाण-पत्र प्रदान किया गया। प्रनाण-पत्र पर जारी करने की तिथि 25 सितंबर 2026 अंकित है। डॉ. भास्कर शर्मा बीएचएमएस, एम.डी. (होम्योपैथी) एवं पीएच.डी. (होम्योपैथी) हैं तथा शर्मा होम्योपैथिक चिकित्सालय एंड रिसर्च सेंटर, इटवा बाजार, सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश के के कंसल्टेंट होम्योपैथी हैं। अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका के समीक्षक मंडल में उनका वयन शोध एवं अकादमिक क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और अनुभव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध-समीक्षा की प्रक्रिया से जोड़ने वाला अवसर है। शोध पत्रों की गुणवत्ता परखने की मिलेगी जिम्मेदारी किसी भी शोध-पत्र के प्रकाशन से पहले उसकी विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है। इस प्रक्रिया में शोध की विषय-वस्तु, शोध-पद्धति, प्रस्तुत तथ्य, निष्कर्ष, संदर्भ तथा वैज्ञानिक आधार का सूक्ष्म परीक्षण किया जाता है। विशेषज्ञ समीक्षक अपने अध्ययन और अनुभव के आधार पर शोध-पत्र में आवश्यक सुधार के संबंध में सुझाव देते हैं। समीक्षक मंडल में शामिल होने के बाद डॉ. भास्कर शर्मा भी संबंधित शोध-पत्रों की विशेषज्ञ समीक्षा की प्रक्रिया में अपना योगदान दे सकेंगे।
इससे शोध की गुणवत्ता, वैज्ञानिकता और विश्वसनीयता को बनाए रखने में सहयोग मिलेगा। प्रमाण-पत्र में दर्ज है विशिष्ट पहचान क्रमांक पत्रिका की ओर से जारी सम्मान प्रमाण-पत्र में डॉ. भास्कर शर्मा का समीक्षक पहचान क्रमांक आई जेएमआरआर-89- 240926 तथा क्रम संख्या 89 अंकित है। प्रमाण-पत्र पर पत्रिका का अंतरराष्ट्रीय मानक क्रमांक 2945- 3135 भी दर्ज है। प्रमाण-पत्र पर पत्रिका के प्रधान संपादक धारधोतिया दिन्का के हस्ताक्षर भी अंकित हैं। प्रमाण-पत्र में डॉ. शर्मा के ज्ञान एवं विशेषज्ञता के माध्यम से शोध-पत्रों की गुणवत्ता और वैज्ञानिक अखंडता बनाए रखने में सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की गई है। शोध एवं चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ा दायित्व डॉ. भास्कर शर्मा का कहना है कि शोध-समीक्षक के रूप में जिम्मेदारी मिलना उनके लिए सम्मान के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण दायित्व भी है। उनके अनुसार, शोध के क्षेत्र में केवल नए निष्कर्ष प्रस्तुत करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शोध की वैज्ञानिक पद्धति, प्रमाणिकता और गुणवत्ता को सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शोध मंच से जुड़कर शोध-पत्रों की समीक्षा प्रक्रिया में योगदान देने का अवसर उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण को और मजबूत करने तथा शोध की गुणवत्ता में अपना योगदान देने के लिए प्रेरित करता है।

