“दिमागी नक्सलवाद” से देश को सतर्क रहने की जरूरत- बृजलाल
“दिमागी नक्सलवाद” केवल जंगलों में बीहड़ों में हथियार उठाने से नहीं फैलता! बल्कि शहरों में रहकर देश को अस्थिर करने के प्रयास से फैलता है- बृजलाल
देश के अंदर बैठे “दिमाग़ी नक्सली” आजकल युवाओं को भ्रमित करके हिंसात्मक वामपंथी विचारधारा के तरफ़ आकर्षित कर रहे है- बृजलाल
लखनऊ। पूर्व डीजीपी उत्तर प्रदेश एवं राज्य सभा सांसद बृजलाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश को “दिमागी नक्सल ” के खतरे से सावधान किया था। यह चेतावनी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि नक्सलवाद केवल जंगलों में हथियार उठाने से नहीं फैलता, बल्कि देश को अस्थिर करने वाली ऐसी विचारधारा से फैलता है जो युवाओं के मन में राष्ट्र, लोकतंत्र, सुरक्षा बलों, न्यायपालिका, सरकार, संविधान और हमारी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने का प्रयास करते है। यह दिमागी नक्सली जंगलों, बीहड़ों, ग्रामीण अंचलों में न रहकर शहरों में रहते हैं। वे विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर,बुद्धिजीवी बनकर,लेखक, पत्रकार, एनजीओ संचालक, कलाकार, दलित-ओबीसी -आदिवासी चिंतक का लबादा ओढ़कर शहरों में रहते है, सेमिनार करते है, नक्सलियों के लिए फण्ड इकट्ठा करते है जिससे भारत में “रेड कॉरिडोर” का निर्माण हो सके।
पूर्व डीजीपी उत्तर प्रदेश एवं राज्य सभा सांसद बृजलाल ने कहा कि “दिमाग़ी नक्सली” युवाओं को भ्रमित करते है और हिंसात्मक वामपंथी विचारधारा के तरफ़ आकर्षित करते है। यह वही शहरी नक्सली है जो “टुकड़े-टुकड़े” गैंग में रहते है और “भारत तेरे टुकड़े होंगें, इंसाअल्ला इंसाअल्ला” का नारा जेएनयू में बुलंद करते है। यह वही नक्सली है जो फाँसी पर लटकाये गए आतंकी अफ़ज़ल गुरु के लिए “अफ़ज़ल हम शर्मिंदा है, तेरे क़ातिल ज़िंदा” का नारा लगाते है। ये वही लोग है जो आतंकी अफ़ज़ल गुरु और याकूब मेमन की फाँसी रुकवाने के लिए दबाव बनाकर आधी रात में सुप्रीम खुलवाते हैं। ये वही नक्सली है जो 25-11-2025 को दिल्ली के इंडिया-गेट पर प्रदूषण के ख़िलाफ़ विरोध प्रकट करने के लिए इकट्ठा होते है और सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए ख़ूँख़ार नक्सली मावी हिडमा के किए-“कितने हिडमा मारोगे,घर घर से हिडमा निकलेगा” का नारा लगाते है। हमारे सुरक्षा बलों की शहादत पर विश्वविद्यालय में जश्न मनाते है।
पूर्व डीजीपी एवं राज्य सभा सांसद ने कहा कि ये वही शहरी दिमागी नक्सली हैं जो हर आंदोलन में अवतरित हो जाते है, जिन्हे विदेशी “डीप स्टेट” से फंडिंग मिलती है। यही शहरी नक्सली, किसान आंदोलन, नागरिकता संशोधन आंदोलन, चुनाव आयोग के “एसआईआर” के ख़िलाफ़ आंदोलन, “ वक़्फ़ संशोधन विधेयक” आंदोलन, “नीट” आंदोलन- सभी जगह दिखाई पड़ते हैं। आज़ादी के बाद इन्हें कांग्रेस ने इन्हें सत्ता में भागीदारी दी तो इन्होंने इरफ़ान हबीब, रोमिल्ला थापर आदि वामपंथी साहित्यकारों से मिलकर देश का इतिहास ही बदल दिया, विदेशी आक्रमणकारी मुस्लिम शासकों को इतिहास में महान बना दिया। यह वही दिमागी नक्सलवाद हैं जिन्होंने देश के हिंदू शासकों, को स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले वीर सपूतों को इतिहास में जगह ही नहीं दी।
पूर्व डीजीपी एवं राज्य सभा सांसद ने कहा कि लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी का संदेश स्पष्ट है—कि भारत के युवाओं को भ्रम, नकारात्मकता और विध्वंस की मानसिकता से निकालकर शिक्षा, रोजगार, नवाचार, राष्ट्रनिर्माण और विकास की दिशा में आगे बढ़ाना है और देश को “दिमाग़ी नक्सली” से सावधान रहना है।
नोट:- यह विचार पूर्व डीजीपी उत्तर प्रदेश एवं राज्य सभा सांसद बृजलाल के अपने है।
वंदे मातरम्, भारत माता की जय।
Brij Lal IPS Retd,Ex-DGP UP
Member of Parliament(Rajya Sabha) Lucknow, Dated-16 August 2026.

