पेपर लीक के मुद्दे पर राज्यसभा में तीखे प्रहार-बृजलाल
राज्यसभा सांसद बृजलाल ने कहा पैलेट गन का प्रयोग नहीं हुआ
नई दिल्ली, एजेंसी। पेपर लीक के मामले रोकने से जुड़े विधेयक पर गुरुवार को राज्यसभा में चर्चा के दौरान सियासी पारा चढ़ा नजर आया। लोकसभा की तरह ही राज्यसभा में भी कई मौके आए जब सत्तापक्ष और विपक्ष में टकराव बढ़ा। सदन में विपक्ष की ओर से कहा गया कि नीट का पर्चा लीक होने से आहत छात्रों की पीडा पर मरहम लगाने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से यह दावा किया गया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया था।
भाजपा सांसद बृजलाल ने गुरुवार को राज्यसभा में कहा कि कानून-व्यवस्था को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं और मजिस्ट्रेट स्थिति का आकलन करने के बाद कार्रवाई के संबंध में फैसला करता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस झूठी बातें फैलाने में माहिर है।उच्च सदन में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान बृजलाल ने कहा कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर पहले प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी जाती है और यहां भी चेतावनी दी गई थी। राज्य सभा सांसद बृजलाल ने कहा कि सरकार ने छात्रों से वार्ता की थी और उसने असामाजिक तत्वों से बातचीत नहीं की। उन्होंने प्रस्तावित कानून का जिक्र करते हुए कहा कि यह 2024 के मूल कानून में परिवर्तन के लिए यह विधेयक लाया गया है और इस सरकार की नीति साफ है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून में प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं, वहीं राज्यों को अधिकार दिए गए हैं। भाजपा सांसद ने यूपी की पूर्ववर्ती सपा सरकारों पर निशाना साधा, कहा, उसने नकल और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया, जिससे एक समय यूपी नकल माफिया की राजधानी बन गया था।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने बिल के प्रावधानों की चर्चा करते हुए कहा कि इसके प्रावधान पेपर लीक करने वालों के इरादों को जमींदोज करने वाले हैं। उन्होंने टास्क फोर्स के एक सदस्य को गोमूत्र विशेषज्ञ बताकर टिप्पणी करने पर भी ऐतराज जताया।
आपातकाल का मुद्दा भी उठा: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि वामपंथी पूरे देश में आंदोलन चाहते हैं पर उन्हें बताना चाहिए कि देश में जब आंदोलन हो रहे थे तो उसे दबाने के लिए आपातकाल लगाया जाना ठीक था या छात्र आंदोलन में उठाए गए मुद्दे के समाधान के लिए सरकार द्वारा यह विधेयक लाया जाना सही है।
पेपर लीक के मुद्दे पर गुरुवार को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के संबोधन के दौरान जब गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग की गई तो सत्तापक्ष ने ऐतराज किया। वहीं, आप ने जब प्रधानमंत्री का नाम लेकर सीधे आरोप लगाए तो पुरजोर विरोध किया गया।
राजद के नेता मनोज कुमार झा ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि नीट का पर्चा लीक होने से आहत छात्रों की पीड़ा पर मरहम लगाने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया। यह कैसी व्यवस्था है? छात्र कहां जाएंगे? उन्होंने कहा कि एनटीए को खत्म कर देना चाहिए।
बलप्रयोग की निंदा : आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने कहा कि सरकार ने कहा था कि नीट पेपर लीक से 22.80 लाख बच्चे प्रभावित हुए। लेकिन पुनर्पपरीक्षा में 22 लाख बच्चे ही शामिल हुए। बाकी बच्चों ने परीक्षा नहीं दी। इसके लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक अदालतों में बेहिसाब मामले लंबित हैं, ये अदालतें कैसे जल्दी सुनवाई कर पाएंगी।
राज्यों को सौंपें मेडिकल परीक्षा का जिम्माः सपा के रामगोपाल यादव ने कहा कि दंड बढ़ाने से अपराध कम नहीं होता। पहले परीक्षाओं की जिम्मेदारी राज्य सरकारों के पास थी तब इस तरह प्रश्नपत्र लीक के मामले नहीं हैं। होते थे। आज पेपर ही 13 भाषा में होते उन्होंने सलाह दी कि पहले की तरह ही नीट खत्म कर मेडिकल परीक्षा की जिम्मेदारी राज्यों को सौंपनी चाहिए।
पैलेट गन पर चुप्पी क्योंः शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने कहा कि सदन में कुछ नेताओं ने शुरुआत ही छात्र आंदोलन से की पर इस आंदोलन के प्रति वे इतने बेपरवाह कैसे रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों पर लाठी, पैलेट गन चलाई गई, पर सरकार ने कुछ नहीं कहा। उधर, एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल ने कहा पेपर लीक के मामले और उसके बाद हुए घटनाक्रम से छात्र ही परेशान नहीं हुए सरकार को भी पीड़ा हुई है। सोर्स विज्ञप्ति एक्स डीजीपी बृजलाल।

