सिद्धार्थनगर: 11 अगस्त 2025
बौद्ध पर्यटन को बढ़ावा के लिए सांसद जगदंबिका पाल ने सदन में प्रश्नकाल के दौरान चर्चा किया
सिद्धार्थनगर संवाददाता: सांसद जगदंबिकापाल ने आज संसद में प्रश्नकाल के माध्यम से सिद्धार्थनगर ज़िले के पिपरहवा सहित बौद्ध सांस्कृतिक और विरासत स्थलों के विकास का मुद्दा उठाया। जो पर्यटन को बढ़ावा देने, बुनियादी ढाँचे के विकास और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी से जुड़ा था। पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने इसका उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है।सिद्धार्थनगर ज़िले के पिपरहवा जैसे ऐतिहासिक स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता दिलाने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं।
पर्यटन आँकड़े: पिछले पाँच वर्षों (2020–2024) में सिद्धार्थनगर ज़िले में 15,92,176 घरेलू पर्यटक और 34,466 विदेशी पर्यटक आए, कुल 16,26,642 आगंतुक। वर्ष 2024 में 1,00,595 घरेलू और 17,546 विदेशी पर्यटक आए।
कनेक्टिविटी व बुनियादी ढाँचा: लुम्बिनी (नेपाल) को सिद्धार्थनगर से एनएच-233 से जोड़ा गया।जिसके कारण कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा से सीधे अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्रियों की पहुँच संभव हुई।
बोधगया, वैशाली, राजगीर, नालंदा जैसे प्रमुख बौद्ध स्थलों को राष्ट्रीय राजमार्गों के नेटवर्क से जोड़ा गया। रेलवे द्वारा थीम-आधारित बौद्ध पर्यटन सर्किट ट्रेनें चलाई जा रही हैं, जो बोधगया, राजगीर, नालंदा, सारनाथ, कुशीनगर, लुम्बिनी और श्रावस्ती को जोड़ती हैं।
मुख्य परियोजनाएँ सिद्धार्थनगर और आसपास “स्वदेश दर्शन योजना” (2016-17) श्रावस्ती, कुशीनगर और कपिलवस्तु विकास – ₹87.89 करोड़ SASCI योजना (2024-25) “इंटीग्रेटेड बौद्ध टूरिज़्म डेवलपमेंट इन श्रावस्ती” ₹80.24 करोड़।
सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा हेतु अभी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्र सरकार के समन्वित प्रयासों और संस्कृति मंत्री की सक्रिय पहल से पिपरहवा के पवित्र रत्न अवशेषों को हांगकांग में नीलामी से बचाया गया और सुरक्षित रूप से भारत लाया गया। यह समय पर उठाया गया कदम भारत की सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा का उदाहरण है। और विश्व समुदाय में हमारी प्रतिबद्धता का संदेश देता है। इससे सिद्धार्थनगर और पूरे बौद्ध सर्किट में पर्यटन, आर्थिक गतिविधियों और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

