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नई दिल्ली में सिद्धार्थनगर की विरासत पर जुड़ी दो पुस्तकों का हुआ विमोचन: कुछ सपने सिर्फ देखे नहीं जाते…उन्हें शब्दों में जिया जाता है

नई दिल्ली: 30 अगस्त 2026

नई दिल्ली में सिद्धार्थनगर की विरासत पर जुड़ी दो पुस्तकों का हुआ विमोचन: कुछ सपने सिर्फ देखे नहीं जाते…उन्हें शब्दों में जिया जाता है

‘सिद्धार्थनगर : इतिहास के पन्नों से वर्तमान तक’ और ‘बुद्धपथ : विरासत से वर्तमान तक’ पुस्तकों के माध्यम से इतिहास, संस्कृति और बौद्ध विरासत को प्रस्तुत करने का प्रयास कुछ सपने सिर्फ देखे नहीं जाते… उन्हें शब्दों में जिया जाता है। आज हमारे शब्दों ने एक नया सफर शुरू किया है। सिद्धार्थनगर की विरासत को शब्दों में सहेजने का एक विनम्र प्रयास है डॉ ज्ञान प्रकाश और अलका पांडे ने नई दिल्ली के(NDMC Convention Centre) एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में रविवार को लेखिका एवं शिक्षाविद अलका पांडेय तथा उत्तर प्रदेश सिविल सेवा के अधिकारी एव नोडल अधिकारी धर्मार्थ कार्य विभाग/प्रभारी अधिकारी पर्यटन डॉ. ज्ञान प्रकाश द्वारा लिखित दो महत्वपूर्ण पुस्तकों ‘सिद्धार्थनगर : इतिहास के पन्नों से वर्तमान तक’ एवं ‘बुद्धपथ : विरासत से वर्तमान तक’ का भव्य विमोचन समारोह स्वामी चक्रपाणि महाराजजी, राष्ट्रीय अध्यक्ष,हिन्दू महासभा,उषा प्रियदर्शिनी, अध्यक्ष, हरियाणा राज्य महिला आयोग,कविता सुरेंद्र कुमार जैन, पूर्व विधायक, सोनीपत एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री, हरियाणा सरकार, सुश्री सुधा रानी रेलंगीजी, केंद्रीय सूचना आयुक्त, श्रीयोगेश्वर दत्त, पूर्व भारतीय पहलवान एवं ओलंपियन, श्री श्री श्री 1008 जगतगुरु लामा घ्याछो रिनपोछे, बौद्ध धार्मिक गुरु द्वारा किया गया। विमोचन के इस अवसर पर देवेंद्र पाठक अध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार ब्यूरो संगठन, आर्या वोरा प्रसिद्ध अभिनेत्री एवं ब्लॉगर, सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

सिद्धार्थनगर : इतिहास के पन्नों से वर्तमान तक पुस्तक के विषय में बताते हुए डॉ ज्ञान प्रकाश अपर जिलाधिकारी एव नोडल अधिकारी धर्मार्थ कार्य विभाग ने बताया इस पुस्तक में सिद्धार्थनगर जनपद की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं भौगोलिक यात्रा को व्यापक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है।इस पुस्तक में क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर, बौद्ध विरासत, सांस्कृतिक विविधता, कृषि, समाज, शिक्षा, उद्योग, पर्यटन तथा विकास जैसे विभिन्न पहलुओं को समाहित किया गया है। इसमें काला नमक चावल, पिपरा हवा स्तूप, म्युजियम आदि के वारे में बताया गया है ।पुस्तक के माध्यम से सिद्धार्थनगर की उस पहचान को सामने लाने का प्रयास किया गया है, जहां इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं और भगवान बुद्ध की ज्ञान एवं करुणा की परंपरा के साथ-साथ वर्तमान समय में विकास की नई संभावनाएं भी दिखाई देती हैं। यह पुस्तक केवल गौरवशाली अतीत का दस्तावेज नहीं है, बल्कि सिद्धार्थनगर के वर्तमान स्वरूप और भविष्य की संभावनाओं को समझने का एक प्रयास भी है।

जानी मानी शिक्षिका एव यू ट्यूब चैनल ज्ञानस्थली क्लासेस के माध्यम से यूजीसी नेट छात्रों को मार्गदर्शन देने वाली अलका पांडे ने डॉ ज्ञान प्रकाश के साथ लिखित पुस्तक ‘बुद्धपथ : विरासत से वर्तमान तक’ के विषय में बताया कि यह पुस्तक भगवान बुद्ध के करुणा, शांति और धम्म के संदेश को केंद्र में रखते हुए सिद्धार्थनगर की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को प्रस्तुत करती है। पुस्तक में सिद्धार्थनगर से जुड़े ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलों, बौद्ध विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं को एक व्यापक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य बुद्ध की विचारधारा तथा उससे जुड़ी विरासत को वर्तमान पीढ़ी के लिए सरल और प्रभावी रूप में सामने लाना है। “हमारा प्रयास है कि सिद्धार्थनगर की कहानी केवल दस्तावेजों और इतिहास के पन्नों तक सीमित न रहे, बल्कि लोगों तक पहुंचे, पढ़ी जाए, समझी जाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे। यदि इन पुस्तकों के माध्यम से सिद्धार्थनगर की विरासत के प्रति किसी एक पाठक में भी जिज्ञासा और जुड़ाव पैदा होता है, तो हम अपने प्रयास को सार्थक मानेंगे।”

लेखकों की लेखकीय पहल अलका पांडेय जानी-मानी लेखिका एवं शिक्षिका हैं। शिक्षा, संस्कृति, इतिहास और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर उनका लेखन निरंतर सक्रिय रहा है। वहीं डॉ. ज्ञान प्रकाश उत्तर प्रदेश सिविल सेवा के अधिकारी हैं और प्रशासनिक अनुभव के साथ सामाजिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विषयों में भी उनकी विशेष रुचि रही है। उन्हें विभिन्न मंचों से सम्मानित किया गया है जिसमें ग्लोबल इन्डिया बिजनेस फोरम द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया है। दोनों लेखकों ने इन पुस्तकों के माध्यम से सिद्धार्थनगर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास किया है।

सुश्री सुधा रानी रेलंगीजी, केंद्रीय सूचना आयुक्त ने दोनों पुस्तकों की विषयवस्तु, शोधपरक दृष्टिकोण और सिद्धार्थनगर की विरासत को सामने लाने के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थनगर की धरती इतिहास, संस्कृति और भगवान बुद्ध की विरासत की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र की अनेक ऐतिहासिक धरोहरें, पुरातात्विक स्थल, बौद्ध परंपराएं और सांस्कृतिक विशेषताएं आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचना आवश्यक है। इसी भावना से दोनों पुस्तकों के माध्यम से सिद्धार्थनगर के अतीत को वर्तमान से जोड़ने और उसकी विरासत को पुस्तक के रूप में संकलित कर पाठकों के सामने रखने का प्रयास किया गया है जो एक अत्यंत सराहनीय प्रयास है इस कार्य हेतु लेखकगण बधाई के पात्र हैं।

श्री श्री श्री 1008 जगतगुरु लामा घ्याछो रिनपोछेजी, बौद्ध धार्मिक गुरु ने कहा नेपाल एव भारत सिद्धार्थ की साँझा विरासत है उसको इन पुस्तकों के माध्यम से प्रस्तुत करने का लेखक का प्रयास सराहनीय है उनका उद्देश्य केवल अतीत का वर्णन करना नहीं, बल्कि सिद्धार्थनगर की वर्तमान पहचान, पर्यटन की संभावनाओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसकी विरासत को संरक्षित करने की आवश्यकता पर भी ध्यान आकर्षित करना है।

दोनों पुस्तकों का प्रकाशन ज्ञानस्थली पब्लिकेशन , लखनऊ द्वारा किया गया है। पुस्तकें शीघ्र ही ऑनलाइन माध्यमों पर पाठकों के लिए उपलब्ध होंगी। इस अवसर पर लेखकों ने अपनी साहित्यिक यात्रा में साथ देने वाले परिवार, मित्रों, शुभचिंतकों एवं सभी स्नेहिल जनों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

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