वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर बिस्कोहर की बनेगी अलग पहचान
शासन की मांग पर बनी रिपोर्ट के आधार पर 52 मंदिरों, 38 कुओं और 38 तालाब का किया जाएगा संरक्षण- जिलाधिकारी शिवशरणपा जीएन
सिद्धार्थनगर से न्यूज 17 इंडिया संवाददाता कौशलेश मिश्र की रिपोर्ट।
सिद्धार्थनगर। धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को समेटे बिस्कोहर अब वैश्विक धार्मिक मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। वर्षों से उपेक्षा का शिकार रहे यहां के 52 प्राचीन मंदिरों, 38 कुओं और 38 तालाबों के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार की योजना निर्णायक चरण में पहुंच गई है। धर्मार्थ कार्य विभाग ने करीब एक माह पूर्व इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, जिसे जिला प्रशासन ने तैयार कर लिया है। अगले दो-तीन दिनों में यह रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी। जिला प्रशासन के प्रस्ताव के अनुसार पूरी परियोजना पर 20 करोड़ से अधिक रुपये खर्च होने का अनुमान है।
बिस्कोहर को प्राचीन काल से धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक वैभव का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां कभी भगवान शिव के 365 मंदिर थे, जहां श्रद्धालु प्रतिदिन एक मंदिर में दर्शन करते थे। इसी ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है।शासन स्तर पर बढ़ी सक्रियता से स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है कि वर्षों से उपेक्षित यह ऐतिहासिक नगरी फिर अपने गौरवशाली स्वरूप में लौट सकेगी।
एसडीएम इटवा की ओर से 18 अक्टूबर 2025 को भेजी गई रिपोर्ट में पहले चरण के लिए 52 मंदिर, 38 प्राचीन कुएं और 38 तालाब चिह्नित किए गए थे। अब धर्मार्थ कार्यों के नोडल अधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) को ज्ञानप्रकाश ने प्रत्येक स्थल का इतिहास, वर्तमान स्थिति, धार्मिक महत्व और प्रस्तावित कार्यों का विस्तृत ब्योरा तैयार कराया है। प्रस्तावित सूची में महादेव मंदिर, विनायक बाबा मंदिर, शिवालय, गोसाईं बाबा मंदिर, सर्वा माता मंदिर, राम जानकी मंदिर, हनुमान मंदिर, दुर्गा मंदिर सहित अन्य प्राचीन शिव मंदिर शामिल हैं।
योजना के तहत संरचनात्मक मरम्मत, फर्श, विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, प्रवेश द्वार, सूचना पट्ट, श्रद्धालु सुविधाओं का विकास, प्राचीन कुओं और तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षाजल संरक्षण, ध्वस्त मंदिरों का पुनर्निर्माण, 3-डी सर्वेक्षण, अभिलेखीकरण, पक्के मार्ग, सौरप्रकाश, पार्किंग, शौचालय, विश्राम स्थल और वार्षिक शिवरात्रि व धरोहर महोत्सव के आयोजन का प्रस्ताव है। बिस्कोहर के ऐतिहासिक महादेव मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए लगभग 14 लाख रुपये का अलग प्रस्ताव भी है तैयार किया गया है।
20 करोड़ रुपये की परियोजना से धार्मिक पर्यटन, रोजगार को मिलेगा नया आधार! 52 प्राचीन मंदिरों का प्रस्तावित है संरक्षण,तालाबों के जीर्णोद्धार की योजना में 38 तालाबों,38 प्राचीन कुएं के होंगे संरक्षण,धर्मार्थ कार्य विभाग द्वारा मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। इसे दो-तीन दिनों में शासन को भेज दिया जाएगा। शासन की स्वीकृति मिलने पर बिस्कोहर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में प्रभावी कार्य शुरू होंगे।वहीं स्थानीय लोगों का मानना है कि योजना लागू होने पर बिस्कोहर पूर्वांचल का प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र बन सकता है। इससे व्यापार, हस्तशिल्प, होटल, परिवहन और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

